किन्नर अखाड़े को न सरकार मान्यता देगी, न ही संत समाज – महंत रामकिशोर शास्त्री


किन्नरों के अखाड़े को न तो सरकार मान्यता देगी और न ही संत समाज। ये बात कही देश के तेरह प्रमुख अखाड़ों में से एक अखिल भारतीय पंच दिगंबर अणि अखाड़ा हरिद्वार के महंत रामकिशोर दास शास्त्री ने।


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– अखिल भारतीय पंच दिगंबर अणि अखाड़ा हरिद्वार के महंत रामकिशोर दास शास्त्री का हंसदास मठ पर सम्मान।
इंदौर। किन्नरों के अखाड़े को न तो सरकार मान्यता देगी और न ही संत समाज। ये बात कही देश के तेरह प्रमुख अखाड़ों में से एक अखिल भारतीय पंच दिगंबर अणि अखाड़ा हरिद्वार के महंत रामकिशोर दास शास्त्री ने।

रविवार को बड़ा गणपति, पीलियाखाल स्थित हंसदास मठ पधारे देश के तेरह प्रमुख अखाड़ों में से एक अखिल भारतीय पंच दिगंबर अणि अखाड़ा हरिद्वार के महंत रामकिशोर दास शास्त्री की महामंडलेश्वर व हंस पीठाधीश्वर महंत रामचरण दास महाराज एवं अन्य संतों ने अगवानी की।

इंदौर पहुंचे महंत रामकिशोर दास शास्त्री ने पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा करते हुए कहा कि

किन्नरों के अखाड़े को न तो सरकार मान्यता देगी और न ही संत समाज। किन्नर अखाड़े का पूरा सम्मान है, वे भी भगवान की देन है लेकिन 14वां अखाड़ा संभव नहीं है।

हंसदास मठ के पंडित पवन शर्मा ने बताया कि श्रीमहंत रामकिशोर दास शास्त्री के साथ दिगंबर अखाड़ा उज्जैन के महंत रामचंद्र दास एवं महंत बालकिशन दास भी आए थे। हंसदास मठ पर अखाड़ों की परंपरा के अनुसार महंत रामचरण दास महाराज एवं इंदौर मंडल के महंत गोपालदास, विजय रामदास, यजत्र दास, अमित दास, कैलाश गोवला, सुरेश अग्रवाल, श्याम अग्रवाल आदि ने उनका सम्मान किया।

इस अवसर पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि संत समाज की परंपराओं को लांघने के कारण ही कोरोना जैसी महामारी फैली है। पहले छूआछूत, पूजा-पाठ के दौरान गमछा या मास्क पहनने और घर के काम के दौरान भी कीटाणुओं को रोकने के उपाय किए जाते थे, लेकिन यह परंपरा तोड़ दी गई है और इसी कारण कोरोना को फैलने का मौका मिला है।

हालांकि दुनिया के ढाई सौ देशों की तुलना में भारत में कोरोना का असर बहुत कम, नहीं के बराबर हुआ है। मृत्यु दर भी बहुत कम है। अब धीरे-धीरे इस पर नियंत्रण हो रहा है।

महंत रामकिशोर दास शास्त्री ने हंसदास मठ परिसर में भगवान रणछोड़जी, पंचमुखी हनुमानजी एवं अन्य देवालयों में दर्शन-पूजन के बाद पंडित पवन शर्मा के साथ मठ की संस्कृत पाठशाला, गौशाला एवं संत निवास का भी अवलोकन किया।

उन्होंने मठ की स्वच्छता एवं अन्य व्यवस्थाओं की खुले मन से प्रशंसा की। हरिद्वार में होने वाले कुंभ का न्यौता देते हुए उन्होंने अखाड़ा परिषद की हरिद्वार में आयोजित बैठक के निर्णयों की भी जानकारी दी।

हंसदास गादी की मान्यता के बारे में उन्होंने कहा कि यहां की मान्यता डाकोर के बाद दूसरे नंबर पर है। देश में 13 अखाड़ों एवं लगभग 700 खालासाओं में इंदौर खालसा का भी महत्वपूर्ण स्थान और सम्मान है।



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