योगेश गर्ग हत्याकांड की सातवीं बरसी, अब भी इंसाफ़ के इंतज़ार में है परिवार


इस हत्याकांड के बाद महू में जमीनों के अवैध व्यापार से जुड़े मामले खुले हैं, सात साल से न्याय के इंतज़ार में हैं परिवारजन


DeshGaon
इन्दौर Published On :

इंदौर। महू में 18 नवंबर 2015 को एक वकील की हत्या कर दी गई। वकील का नाम था योगेश गर्ग जो दीवानी मामलों के केस लड़ते थे। गर्ग को गोली मारने वाले आरोपियों के मुताबिक उन्हें इसके लिए कुख्यात बदमाश मांगीलाल ठाकुर ने कहा था। पुलिस ने मांगीलाल ठाकुर को गिरफ्तार भी किया और उससे काफी राज भी उगलवाए लेकिन इस मामले की सुनवाई आज भी जारी है। मरहूम वकील योगेश गर्ग का परिवार आज भी न्याय की लड़ाई लड़ रहा है और उम्मीद लगाए बैठा है कि अदालत कभी तो उनके साथ न्याय करेगी।

18 नवंबर को रात साढ़े ग्यारह बजे जब वकील योगेश गर्ग अपने मेन स्ट्रीट के ऑफिस से बाहर निकल रहे थे तब दो बाइक सवार उनके नजदीक से गुजरे और वकील साहब कहकर उन्हें पुकारा और नजदीक से गोली मार कर भाग गए। इसके बाद गर्ग को नजदीकी मेवाड़ अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

गोली मारने वाले लोगों का नाम था विकास चौहान जो महू की इंदिरा कॉलोनी में रहता था और सावन खोड़े जो महू के ही तेलीखेड़ा में रहता था। इन्हें वकील की हत्या करने के लिए महू के चर्चित गुंडे मांगीलाल ठाकुर ने कहा था। इस मामले में पिगडंबर में रहने वाले सुरेश सिंह उर्फ सूरज ठाकुर को भी गिरफ्तार किया गया था।

आरोपी मांगीलाल का कहना था कि वकील योगेश गर्ग उसके जमीन खरीदी के तमाम मामलों में रुकावट डालते थे और हिस्सेदारी मांगते थे इसलिए उसने उन्हें मारने की सोची। हालांकि इस आरोप का एक पक्ष यह भी है कि मांगीलाल ठाकुर ने शहर के कुछ संभ्रांत धनाढ्य लोगों के साथ मिलकर करीब 200 करोड़ रुपये की रसलपुरा चर्च की जमीन को कब्जाने की कोशिश की थी जिस पर योगेश गर्ग ने आपत्ति दर्ज कराई थी। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया और वहां से चर्च की जमीन पर हुए किसी भी सौदे पर रोक लगा दी गई और जमीन प्रशासन के हवाले कर दी गई।

मांगीलाल ठाकुर ने गोल्डन फॉरेस्ट की जमीनों पर भी कब्जा कर रखा था और उनकी लगातार खरीदी बिक्री कर रहा था जिसे लेकर उस पर अब कई केस दर्ज हैं। बताया जाता है इनमें से कई मामलों की भनक योगेश गर्ग को भी थी जिन्होंने इन सौदों पर आपत्ति लगाई थी।

दरअसल गोल्डन फॉरेस्ट महू में हुआ एक चर्चित जमीन घोटाला है जिसमें एक कंपनी ने लोगों के पैसे निवेश के नाम पर जमीन खरीदी में लगा दिए थे लेकिन बाद में यह कंपनी दिवालिया हो गई और सुप्रीम कोर्ट ने जमीनों की खरीदी बिक्री पर रोक लगा दी। हालांकि इसके बावजूद महू इंदौर के ताकतवर लोग जो अपराध और राजनीति की दुनिया से जुड़े हुए थे वे गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन खरीदते और बेचते रहे।

इस दौरान मांगीलाल ठाकुर और सभी दूसरे आरोपियों को जेल भेज दिया गया। हालांकि जेल में भी इनके तेवर कम नहीं हुए। महू उपजेल पहले से ही काफी बदनाम था और इसके बाद उसे और बदनामी मिलने वाली थी।

जून 2016 में केंद्रीय जेल अधीक्षक ने महू उपजेल में अचानक तलाशी ली तो पता चला यहां मांगीलाल के पास चरस और गांजा पीने की भी सुविधा थी। उसके पास लोगों से बात करने के लिए एक मोबाइल फोन था और खर्च के लिए 4300 रुपये भी थे। उस समय के जेलर अनिल जैन इन्हें तमाम सुविधाएं उपलब्ध करा रहे थे और जैन पर कार्रवाई करने के अनुशंसा करते हुए जांच अधिकारियों ने डीजी जेल को भी पत्र भेजा था।

इसी जेल में रहते हुए मांगीलाल ने योगेश गर्ग के साथी वकील जय सिंह ठाकुर की हत्या की भी साज़िश रची थी। जयसिंह ठाकुर को महू में ही किशनगंज क्षेत्र में एक डंपर से कुचलने का प्रयास किया गया था। इसमें एक राहगीर की मौत हो गई थी और जयसिंह और उनका बेटा घायल हुआ था।

योगेश गर्ग की हत्या का यह मामला बेहद बड़ा साबित हुआ। इस मामले के बाद महू में रसलपुरा चर्च और गोल्डन फॉरेस्ट से जुड़ी कई जमीनों पर हो रहे अवैध सौदों की पोल खोल दी थी।

हालांकि इस सबके बावजूद योगेश गर्ग की हत्या के आरोपियों को सज़ा नहीं मिल सकी। कोर्ट में कभी पुलिस की ओर से देरी हुई तो कभी तकनीकी सुबूत गड़बड़ रहे।

ऐसे में गर्ग का परिवार लगातार इस मामले में लड़ाई लड़ता रहा है। उनकी पत्नी और बच्चे इस मामले के बाद जैसे सदमे में रहे वहीं केस की पूरी ज़िम्मेदारी उनके बड़े भाई जयेश ने संभाली। जो अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में बसे हैं। वे वहां से लगातार पुलिस, वकील और प्रशासन के संपर्क में रहे।

अमेरिकी एंबेसी से भी इस मामले में जयेश की मदद के लिए दखल आया। जयेश के मुताबिक इसके बाद भी उनके और महू में उनके परिवार की सुरक्षा के लिए खतरा बना रहा। ऐसे में उन्हें जल्दी न्याय की उम्मीद थी और इसी उम्मीद में वे अब तक यह लड़ाई लड़ रहे हैं।



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