अचानक कैसे बदल गए एकनाथ शिंदे! 19 जून को ही मनाया था शिवसेना का स्थापना दिवस, अब पार्टी के लिए ही बन गए परेशानी


– जानकारों के मुताबिक शिवसेना और एकनाथ शिंदे दोनों की राजनीति हुई कमज़ोर, दोनों हुए भाजपा का शिकार।
– महाराष्ट्र में हुए घटनाक्रमों ने पैदा की बेचैनी।


देश गांव
राजनीति Published On :

इंदौर। एकनाथ शिंदे ये नाम पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर ट्रैंड कर रहा है और कहें तो हर जगह छाया हुआ है। देशभर में भाजपा के राज को कायम करने में कुछ ही राज्य कम पड़ रहे थे इनमें एक है महाराष्ट्र, जहां एकनाथ शिंदे भाजपा के लिए बड़ी सफलता साबित हुए हैं। इस सियासी ड्रामे से जुड़ी ख़बरों, जानकारों और आंखों देखी मानें तो इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा का हाथ होने से नकारा नहीं जा सकता है। मध्यप्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में इस तरह के सियासी ड्रामे पहले भी हुए हैं।

कुछ जानकार कहते हैं शिंदे के इस सियासी ड्रामे का नतीजा कुछ भी हो लेकिन एक बात तो तय है कि अब शिवसेना और खुद शिंदे की राजनीति लंबे वक्त के लिहाज से कमजोर साबित रहे हैं। शिवसेना एक पार्टी के तौर पर और शिंदे एक नेता के तौर पर खुद को भारतीय जनता पार्टी से बचाए रखने में काफी हद तक नाकाम रहे हैं।

एकनाथ शिंदे  जिनकी पिछले करीब महीने भर की जानकारी देखें तो समझ आता है कि जैसे वे अचानक ही बदल गए। कुछ दिनों पहले शिवसेना और ठाकरे परिवार के बेहद नज़दीकी रहे शिंदे अब उसी परिवार और पार्टी को अब तक का सबसे बड़ा धोख़ा दे रहे हैं।

शिंदे की छवि कट्टर हिन्दू नेता की है और यही वजह है कि उन्हें महाराष्ट्र में हुए पिछले कुछ घटनाक्रम परेशान करते रहे हों और उनकी इस छटपटाहट का अंदाजा विपक्ष में बैठे नेताओं को था।

एक नज़र एकनाथ शिंदे की ट्विटर टाइमलाइन पर…

20 जून को शिंदे ने विधानपरिषद में शिवसेना के विजयी उम्मीदवारों को बधाई दी हालांकि इसमें उन्होंने गठबंधन के बाकी तीन उम्मीदवारों का ज़िक्र नहीं किया।

महाराष्ट्राच्या विधान परिषद निवडणुकीत शिवसेनेचे श्री.सचिन आहिर आणि श्री.आमश्या पाडवी यांची विधान परिषदेच्या सदस्य पदी निवड झाल्याबद्दल हार्दिक अभिनंदन!#Shivsena@ShivSena @AhirsachinAhir

इससे ठीक एक दिन पहले शिंदे ने शिवसेना के 56 वें स्थापना दिवस में हिस्सा लिया। इस दौरान उनके साथ सीएम उद्धव ठाकरे और उनके मंत्री बेटे आदित्य ठाकरे भी मौजूद रहे। इस दौरान शिंदे सामान्य नज़र आ रहे हैं। यहां उन्होंने एक अगले ट्वीट में कार्यक्रम की जानकारी दी और कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विधान परिषद के चुनावों में पार्टी की जीत का भरोसा दिलाया।

इससे पहले 16 जून को किए गए  उन्होंने एक ट्वीट में वे मंत्री आदित्य ठाकरे के साथ अयोध्या में थे। यहां वे अयोध्या को हिन्दू शक्ति और भक्ति का प्रतीक बता रहे थे। इससे ठीक पहले उन्होंने आदित्य ठाकरे को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी थीं। यहां भी तस्वीरों से किसी तरह की नाराज़गी का अंदाज़ा नहीं लगता।

 

आठ जून को ट्वीट में शिंदे ने महाविकास अघाड़ी गठबंधन में शिवसेना की ओर से प्रत्याशियों को नामांकन जमा करने की तस्वीरें भी साझा की थीं।

30 मई को वे महाविकास अघाड़ी और एनसीपी की ओर से राज्यसभा  के उम्मीदवार प्रफुल्ल पटेल का नामांकन जमा करवाने भी पहुंचे थे। इसकी तस्वीरें भी उन्होंने साझा कीं थीं।

इससे करीब एक महीने पहले तक भी एकनाथ शिंदे की ट्विटर टाइमलाइन पर कोई ऐसा ट्वीट नज़र नहीं आया जो शिवसेना नेताओं से इस कदर नाराजगी-दूरी या भाजपा से नज़दीकी दर्शाता हो। शिंदे अमूमन व्यस्त ही रहे लेकिन खबरों की मानें तो इसी बीच उन्हें तोड़ने की तैयारी भी की जा रही थी। इसमें देवेंद्र फणनवीस का बड़ा हाथ माना जाता है।



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