फरवरी में टूटे गर्मी के सारे रिकॉर्ड, सरकार ने दिया अलर्ट रहने का निर्देश


तापमान में बढ़ोत्तरी के साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने गर्मी से जुड़ी बीमारियों को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अलर्ट जारी किया है। उन्होंने सभी से ‘नेशनल एक्शन प्लान’ पर ध्यान देने को कहा है।


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नई दिल्ली। देश भर में अब गर्मी बढ़ने लगी है। इस बार फरवरी में ही तापमान के कई रिकॉर्ड टूटे हैं। भले ही सुबह और शाम को तापमान गिर रहा है, लेकिन दोपहर में लोगों को अभी से गर्मी सताने लगी है। मौसम में हो रहे इस उतार चढ़ाव ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

इसी के मद्देनजर तापमान में बढ़ोत्तरी के साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने गर्मी से जुड़ी बीमारियों को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अलर्ट जारी किया है। उन्होंने सभी से ‘नेशनल एक्शन प्लान’ पर ध्यान देने को कहा है।

केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को लिखी गई चिट्ठी में कहा गया है कि देश में कुछ जगहों पर टेंपरेचर पहले ही हाई लेवल पर पहुंच गया है। ऐसे में गर्मी से होने वाली बीमारियां भी अब बढ़ने लगेंगी। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र ने सभी राज्यों को पहले ही सचेत कर दिया है।

इस पत्र में कहा गया है कि 1 मार्च, 2023 से सभी राज्यों और जिलों में जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPCCHH) के तहत गर्मी से संबंधित बीमारियों पर दैनिक निगरानी एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP) पर आयोजित की जाएगी।

राज्यों को स्वास्थ्य कार्य योजनाओं को लागू करने का निर्देश –

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केन्द्र, स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों में जिला और शहर के स्वास्थ्य विभाग को गर्मी से संबंधित स्वास्थ्य कार्य योजनाओं को फिर से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही राज्य के स्वास्थ्य विभागों को चिकित्सा अधिकारियों, स्वास्थ्य कर्मचारियों, जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को एक मार्च से गर्मी से होने वाली बीमारी, इसकी शीघ्र पहचान और प्रबंधन के प्रति संवेदनशील बनाने और क्षमता निर्माण के प्रयास जारी रखने के लिए कहा गया है।

आवश्यक दवाओं की उपलब्धता के भी निर्देश –

पत्र में राज्य के स्वास्थ्य विभाग को सभी आवश्यक दवाओं, इंट्रावेनस फ्लूड, आइस पैक, ओआरएस और सभी जरूरी चीजों की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए निर्देश भी दिए गए हैं।

पत्र में राज्यों को स्वास्थ्य सुविधा तैयारियों की प्रतिदिन समीक्षा, पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता को भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।