65 हजार निजी स्कूलों ने बंद रखी ऑनलाइन क्लास, इंदौर में स्कूल संचालकों ने चाबी सौंपी


सीबीएसई और माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध मध्यप्रदेश के तकरीबन 65 हजार स्कूलों में सोमवार को ऑनलाइन क्लास नहीं हुईं। इंदौर में तो निजी स्कूल संचालकों ने स्कूल में ताला डालकर स्कूल शिक्षा विभाग जाकर इनकी चाबियां सौंपी।


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भोपाल/इंदौर। सीबीएसई और माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध मध्यप्रदेश के तकरीबन 65 हजार स्कूलों में सोमवार को ऑनलाइन क्लास नहीं हुईं। इंदौर में तो निजी स्कूल संचालकों ने स्कूल में ताला डालकर स्कूल शिक्षा विभाग जाकर इनकी चाबियां सौंपी।

प्रदेश के प्राइवेट स्‍कूल संचालक शिक्षण शुल्क बढ़ाने समेत अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। स्कूल संचालकों का तर्क है कि पिछले 15 माह से स्कूल बंद है, लेकिन उनके खर्च जारी हैं।

सरकार ने निजी स्कूलों को किसी तरह की आर्थिक मदद तो की नहीं है, लेकिन इस सत्र में भी केवल शिक्षण शुल्क लेने का एकतरफा फरमान सुनाया है जो गलत है।

मध्यप्रदेश प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजित सिंह ने बताया कि

अनेक अभिभावकों ने पिछले साल की बकाया फीस अब तक नहीं दी है। शासन इसे दिलवाने के लिए जरूरी कदम उठाए।

इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि स्कूलों की मान्यता का नवीनीकरण पांच साल के लिए किया जाए। इसके अलावा राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा आरटीई के तहत निजी स्कूलों को बकाया फीस का भुगतान भी तुरंत किया जाए।

एसोसिएशन ऑफ अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स के उपाध्यक्ष विनीराज मोदी का कहना है कि

सरकार स्कूल खोलने का निर्णय नहीं कर रही है। इस साल के लिए भी सिर्फ शिक्षण शुल्क लेने का शासन का फैसला सही नहीं है।

बता दें कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीसरी लहर की आशंका खत्म होने तक स्कूल बंद रखने एवं स्कूल संचालकों द्वारा शिक्षण शुल्क के अलावा कोई अतिरिक्त राशि नहीं लेने का ऐलान किया है।

इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश भी जारी कर दिए हैं। इसके विरोध में निजी स्कूल संचालकों ने आज ऑनलाइन कक्षाएं बंद रखीं।

निजी स्कूल संचालकों की सरकार से है ये मांग –

  • कोरोना की तीसरी लहर की आशंका की वजह से स्कूल बंद रखे जाने का बगैर सोचे-समझे लिए गया निर्णय तत्काल वापस लें।
  • हाईकोर्ट के निर्णयानुसार केवल शिक्षण शुल्क (ट्यूशन फीस) ही लेने का आदेश सत्र 2020-21 के लिए था। अत: इस सत्र 2021-22 में विद्यालयों को शिक्षण शुल्क के साथ-साथ अन्य शुल्क जैसे वार्षिक शुल्क, विकास शुल्क, इत्यादि लेने की अनुमति दी जाए।
  • प्रदेश के सभी निजी स्कूलों के लिए आर्थिक पैकेज घोषित किया जाए। इसके अंतर्गत उनके द्वारा लिए गए ऋण पर लगने वाले ब्याज की प्रतिपूर्ति हो सके और वे दिवालिया होने से बच सकें।
  • सभी शिक्षण संस्थानों के बिजली बिल उपयोग के अनुसार लेते हुए पुराने बिल समायोजित किए जाएं।
  • आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित विद्यार्थी के शिक्षण सत्र 2020-21 तक की बकाया शुक्ल की प्रतिपूर्ति शीघ्र की जाए।
  • केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के तहत नवमीं से बारहवीं तक की कक्षाएं तत्काल शुरू की जाएं।



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