राहत! DRDO की ऑक्सीजन सैचुरेशन बढ़ाने वाली दवा कारगर, कोरोना संक्रमितों को मिलेगा लाभ


मरीज को दवा दी जा रही थी, तब उसका ऑक्सीजन सेचुरेशन स्तर  92 था और उसे 14 लीटर ऑक्सीजन दी जा रही थी और यह दवा देने के एक घंटे बाद ऑक्सीजन 10 लीटर प्रति मिनट दी गई और ऑक्सीजन सेचुरेशन 94% आ गया।


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दवा-दारू Published On :

इंदौर। कोरोना महामारी के दौरान लोगों की जान बचाने के लिए डीरडीओ द्वारा विकसित की गई दवा टू डीजी का परिक्षण इंदौर के मरीज़ पर किया गया। इस परिक्षण में यह दवा असरकारक रही।

डीआरडीओ की बनाई गई कोरोना रोधी दवा 2-डीऑक्सी-डी ग्लूकोज निजी अस्पताल में भर्ती एक मरीज को दी गई। अस्पताल के एक डॉक्टर के द्वारा सोशल मीडिया पर इसका वीडियो जारी किया। अस्पताल का दावा है कि दवा दिये जाने के एक घंटे के बाद ही  मरीज के ऑक्सीजन सेचुरेशन में सुधार आया है।

वीडियो में बताया गया कि जब उक्त मरीज को दवा दी जा रही थी, तब उसका ऑक्सीजन सेचुरेशन स्तर  92 था और उसे 14 लीटर ऑक्सीजन दी जा रही थी और यह दवा देने के एक घंटे बाद ऑक्सीजन 10 लीटर प्रति मिनट दी गई और ऑक्सीजन सेचुरेशन 94% आ गया। 70 वर्षीया संतोष गोयल संक्रमित होने के बाद एक महीना अस्पताल में भर्ती रही लेकिन उनके ऑक्सीजन स्तर में सुधार नहीं आ रहा था। इसके बाद उन्हें 14 मई को अस्पताल से छुट्टी मिल गई लेकिन 18 मई को उन्हें फिर अस्पातल में भर्तीकर

14 मई को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन ऑक्सीजन सेचुरेशन में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें 19 मई को दोबारा अस्पताल में भर्ती किया गया। कोविड के नोडल अधिकारी डॉ. अमित मालाकार ने बताया कि बाजार में अभी यह दवा नहीं आई है। सीएचएल अस्पताल में भर्ती मरीज ने खुद के प्रयासों से दवा मंगवाई और लगवाई।

उन्हें कोशिशों के बाद चार डोज मिल पाए। उनके बेटे पीयूष ने बताया कि यह दवा देने के बाद अच्छे परिणाम मिले। करीब 30 प्रतिशत का सुधार है। डीआरडीओ का दावा है कि यह दवा मरीजों के अस्पताल में रहने के समय को कम करती है। ऑक्सीजन पर निर्भरता तेजी से कम करती है।

जब कोरोना संक्रमित मरीज को यह दवा दी जाती है तो यह शरीर में प्रवेश करते ही संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है। वायरस के सिंथेसिस और एनर्जी प्रोडक्शन को रोकती है। पहले चरण के ट्रायल के नतीजों के आधार पर देश के दवा नियंत्रक ने 2-डीजी के दूसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल के लिए मई 2020 में मंजूरी दी थी।

कोरोना के 110 मरीजों पर इस दवा का ट्रायल किया गया था। उन पर यह दवा सुरक्षित पाई गई। इसके बाद इसके तीसरे चरण के ट्रायल को मंजूरी मिली। दिसंबर 2020 से मार्च 2021 तक 220 मरीजों पर इस दवा का ट्रायल किया गया था।



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