यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, राहुल के करीबी जितिन प्रसाद भाजपा में शामिल


दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इससे पहले जितिन प्रसाद ने गृहमंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात भी की।


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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के कद्दावर नेता और राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले जितिन प्रसाद बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए।

दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इससे पहले जितिन प्रसाद ने गृहमंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात भी की।

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बता दें कि राष्ट्रीय प्रवक्ता और भाजपा के सांसद अनिल बलूनी ने बुधवार सुबह एक ट्वीट कर जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने की ओर एक संकेत भी दिया था।

भाजपा में शामिल होने के बाद जितिन प्रसाद ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि अब केवल भाजपा ही देशहित में काम करने वाली पार्टी है। बाकी दल व्यक्ति विशेष और क्षेत्र के हो गए हैं। राष्ट्रीय दल के नाम पर देश में अगर कोई पार्टी है तो वह सिर्फ भाजपा है।

जितिन प्रसाद ने कहा कि मेरा कांग्रेस पार्टी से तीन पीढ़ियों का साथ रहा है। मैंने ये महत्वपूर्ण निर्णय बहुत सोच, विचार और मंथन के बाद लिया है। आज सवाल ये नहीं है कि मैं किस पार्टी को छोड़कर आ रहा हूॅं, बल्कि सवाल ये है कि मैं किस पार्टी में जा रहा हूं और क्यों जा रहा हूं? पिछले 8-10 वर्षों में मैंने महसूस किया है कि अगर कोई एक पार्टी है, जो वास्तव में राष्ट्रीय है, तो वह भाजपा है। अन्य दल क्षेत्रीय है लेकिन यह एक राष्ट्रीय दल है, आज देश जिस स्थिति से गुजर रहा है, अगर कोई राजनीतिक दल या नेता देश के हित के लिए खड़ा है तो वह भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं।

कांग्रेस के बड़े ब्राह्मण चेहरों में से एक जितिन प्रसाद भी पिछले कई दिनों से पार्टी हाईकमान से नाराज थे और इस सिलसिले में उन्होंने यूपी कांग्रेस के कुछ नेताओं से अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी, लेकिन ऐसा करने के बाद भी उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ।

जब से ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हुए हैं तब से ही जितिन प्रसाद कांग्रेस के लिए अहम नेता थे, लेकिन जितिन के भाजपा में शामिल होने के कारण कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, जितिन के आने से भाजपा को कोई खास फायदा नहीं होगा, लेकिन कांग्रेस को इसका नुकसान जरूर उठाना पड़ सकता है।

ऐसा इसलिए क्योंकि एक समय लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस को जितिन ने ही पश्चिमी यूपी में खड़ा किया था। वह कांग्रेस के लिए बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर थे।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि प्रियंका गांधी की जब यूपी की राजनीति में एंट्री हुई तब से ही जितिन प्रसाद की अहमियत पार्टी की नजरों मे कम होती नजर आने लगी जिसका अहसास जितिन को भी हुआ।

यूपी में प्रियंका के आने के बाद प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार उर्फ लल्लू को बनाया गया। इतना ही नहीं ऐसे ही कई अहम समितियों में जितिन का नाम दूर-दूर तक नजर नहीं आया।

इसके बाद जितिन को पश्चिम बंगाल का चुनाव प्रभार का दायित्व सौंपा गया जिससे जितिन को यह समझ आने लगा था कि उन्हे यूपी की राजनीति से दूर किया जा रहा है।



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