किसान आंदोलन में शामिल चढ़ूनी ने बनाई संयुक्त संघर्ष पार्टी, 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा


पार्टी बनाने की घोषणा करते हुए चढ़ूनी ने कहा कि हमारी बदकिस्मती है कि देश में गुंडाराज है। मंत्री किसानों को कुचल रहा है। ऐसे गुंडे लोगों को राज करने दें। पंजाब में 80 लाख वोट किसानों की है। 59 लाख वोट से सरकार बनी है। चढूनी ने कहा कि राजनीति में गलत काम करने वालों को निकालने की जरूरत है।


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gurnam singh charuni

चंडीगढ़। किसान आंदोलन में शामिल रहे भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी नई पार्टी ‘संयुक्त संघर्ष पार्टी’ बनाने की घोषणा की।

किसान नेता चढूनी ने कहा कि राजनीति प्रदूषित हो गई है। इसे बदलने की जरूरत है। पूंजीवाद को बढ़ावा देने वाले नीति निर्माताओं, पूंजीपतियों के पक्ष में नीतियां बनाई जा रही हैं। आम आदमी, गरीबों के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है। इसलिए, हम अपनी नई पार्टी, संयुक्त संघर्ष पार्टी शुरू कर रहे हैं।

चढ़ूनी ने कहा कि हमारा मकसद अमीर होना नहीं है। भाजपा पांच प्रदेशों में चुनाव जीतती है तो बिल वापस लाएगी। हालांकि, ऐसी कोई संभावना नहीं है। फिर वापस लाएगी तो किसान लड़ने के लिए तैयार है। पंजाब में हमारा गठबंधन किसी के साथ नहीं है। 117 सीटों पर लड़ने के लिए हम तैयार हैं।

चढूनी ने कहा कि किसान, मजूदर और व्यापारी को एकजुट होना पड़ेगा। पंजाब में नौजवान परेशान है। जिन अंग्रेजों को निकाला था, हमारा युवा उन्हीं अंग्रेजों के पास जा रहा है। पंजाब के अंदर कारोबार और रोजगार नहीं है। हरसंभव प्रयास करेंगे कि पंजाब में हर व्यक्ति को रोजगार मिले।

उन्होंने कहा कि कृषि में बड़े बदलाव की जरूरत है। खेती की विदेशों में डिमांड हो सकती है। पैदा करने से लेकर उपभोक्ता तक का कारोबार किसान के पास होगा। ऐसी खेती की जाएगी, जिसके विदेशों में डिमांड हो। अफीम की खेती शुरू करें तो पंजाब उन्नति कर सकता है। अफीम नशा नहीं है, कमाई भी है। इसे हंसी में ना लेना।

चढ़ूनी ने कहा कि हमारी बदकिस्मती है कि देश में गुंडाराज है। मंत्री किसानों को कुचल रहा है। ऐसे गुंडे लोगों को राज करने दें। पंजाब में 80 लाख वोट किसानों की है। 59 लाख वोट से सरकार बनी है। चढूनी ने कहा कि राजनीति में गलत काम करने वालों को निकालने की जरूरत है।

अब कयास लगाए जा रहे हैं कि चढूनी द्वारा पार्टी गठन करने के बाद आने वाले दिनों में दूसरे किसान नेता भी सक्रिय राजनीति में उतर सकते हैं।



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