सतनाः बायो वेस्ट प्लांट नष्ट करने की बजाय गर्म पानी में धोकर खुले बाजार में बेच रहा पीपीई किट


शासन की गाइडलाइन के अनुसार पीपीई किट, ग्लव्स और मास्क को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने के लिए बड़खेरा में इंडो वाटर बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट में भेजा जाता है, लेकिन प्लांट में ऐसा नहीं किया जा रहा है।


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सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिले में आपदा को अवसर में बदलने का डरावना और शर्मनाक वाक्या सामने आया है। बड़खेरा बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट में सिंगल यूज पीपीई किट को गर्म पानी में धोकर बंडल बनाए जा रहे हैं।

इसके बाद कबाड़ियों के माध्यम से सतना और भोपाल के खुले बाजार में दोबारा पीपीई किट के तौर पर बेचा जा रहा है। इस पूरे काले कारनामे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, शासन की गाइडलाइन के अनुसार पीपीई किट, ग्लव्स और मास्क को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने के लिए बड़खेरा में इंडो वाटर बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट में भेजा जाता है, लेकिन प्लांट में ऐसा नहीं किया जा रहा है।

यहां के कुछ कर्मचारी प्लांट प्रबंधन के इशारे पर पीपीई किट को गर्म पानी से धोकर बाकायदा अलग बंडल बनाकर रख देते हैं। इसके बाद गोपनीय तरीके से इसे बेच दिया जाता है।

मंगलवार देर रात सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसे बड़खेरा गांव के एक स्थानीय युवक ने चोरी-छिपे बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट के अंदर चल रही करतूत का वीडियो मोबाइल फोन में कैद कर वायरल किया था।

वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि पीपीई किट और ग्लव्स को एक टब में गर्म पानी में डालने के बाद धोकर सुखाया जाता है। इसके बाद प्लांट के अंदर काम कर रहे मजदूर बंडल तैयार करते हैं। इसके बाद यह हूबहू नए बंडल की तरह ही दिखने लगता है। वीडियो वायरल होने के बाद अब जिला प्रशासन कार्रवाई करने का आश्वासन दे रहा है।

बता दें कि बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट के रखरखाव और देखरेख की ​जिम्मेदारी प्रदूषण विभाग, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की होती है, लेकिन सूत्रों की मानें तो किसी भी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कभी भी मौके पर नहीं जाते। ऐसे में बायो वेस्ट एजेंसी मनमाने तरीके से काम कर रही है।

मामले में सीएमएचओ डॉ. अशोक कुमार अवधिया ने कहा कि

बायो वेस्ट के मामले में जो वीडियो वायरल हुआ है। उसके बारे में बायो वेस्ट एजेंसी वाले ही बता सकते हैं। हम तो बायो वेस्ट उठाने के पैसे देते हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक, पीपीई किट, ग्लव्स और मास्क को एक बार ही इस्तेमाल करना है। साथ ही, इनको सार्वजनिक जगह पर नहीं फेंकना है बल्कि वैज्ञानिक तरीके से बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट में नष्ट कराना है।



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