छात्र और छोटे उद्यमी कर रहे आत्महत्या, 2021 में 1.64 लाख लोगों ने ख़त्म की अपनी ज़िंदगी


एनसीआरबी ने जारी किये आंकड़े, बीते साल की तुलना में 7.2 प्रतिशत बढ़ा आंकड़ा


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भोपाल। आत्महत्या को लेकर एनसीआरबी ने नए आंकड़े जारी किये हैं। ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट कहती है कि प्रति दस लाख की जनसंख्या पर 110 लोगों ने आत्महत्या की है। इनमें बीते साल की ही तरह छात्रों और छोटे उद्यमियों में आत्महत्या के मामले बढ़े हैं।  यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 6.1 प्रतिशत अधिक है। आत्महत्या के इन मामलों की संख्या अब तक आए आंकड़ों में सबसे अधिक हैं।  यह निष्कर्ष भारत में दुर्घटना से होने वाली मौतों और आत्महत्याओं (एडीएसआई) और भारत में अपराध (सीआईआई) की 2021 की रिपोर्ट से हैं। दोनों को केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत एनसीआरबी द्वारा प्रकाशित किया गया था।

इन आंकड़ों  से पता चलता है कि 2021 में  164,033 लोगों ने आत्महत्या की यह बीते साल की तुलना में 7.2% अधिक है।  2020 में 153,052 लोगों की जान गई थी। वहीं 2019 में यह आंकड़ा करीब 139,000 पर था। इससे पहले देश में आत्महत्या की अब तक की दूसरी सबसे बड़ी दर 2010 में दर्ज की गई थी, जब प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 113 मौतें हुई थीं। आंकड़ों से यह भी पता चलता है  सबसे कम आय वर्ग (प्रति वर्ष ₹1 लाख से कम आय वाले लोग), जो आत्महत्या से होने वाली मौतों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा हैं और यह सबसे अधिक हैं।



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