पीएम मोदी के आह्वान के बाद मिट्टी परीक्षण में सबसे आगे था नरसिंहपुर, अब प्रदेशभर की तरह यहां भी धूल खा रहीं प्रयोगशालाएं


किसानों की आय दोगुनी करने का था वादा, करोड़ों खर्च करके प्रयोगशालाएं तो बनवा दी लेकिन उनमें बैठने के लिए कर्मचारी नहीं, न खेती से लाभ मिला न सरकार से नौकरी


ब्रजेश शर्मा ब्रजेश शर्मा
उनकी बात Updated On :

नरसिंहपुर। केंद्र सरकार ने किसानों को साल 2022 तक खेती से दोगुनी आय देने की बात कही थी। दिसंबर के इस महीने के साथ साल भी बीता जा रहा है लेकिन किसानों की आमदनी में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई। किसानों को उम्मीद थी कि सरकार बेहतर खेती और आमदनी के लिए उन्हें कुछ बेहतर सुविधाएं देगी लेकिन फिलहाल उन्हें वे बेहद बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिली हैं जो वैज्ञानिक सोच से खेती करने के लिए सबसे जरुरी हैं। 

कुछ वर्ष पहले प्रदेश में मिट्टी की सेहत के हिसाब से खेती करने की बात हो रही थी इसके लिए ज़ोर शोर से कई प्रयोगशालाएं खुलवाईं गईं जिनमें मिट्टी परीक्षण किया जाना था लेकिन सालों बाद भी इन प्रयोगशालाओं से किसानों को कोई लाभ नहीं हुआ। ऐसा इसलिए क्योंकि मिट्टी परीक्षण का काम ठप्प है और प्रयोगशालाएं बंद पड़ीं हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2015 में राजस्थान के सूरतगढ़ से स्वाइल हैल्थ योजना शुरु की थी। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी मिट्टी की सेहत के बारे में बताना था ताकि किसान कम से कम रासायनिक खादों का उपयोग करें और अच्छी तरह से खेती कर पाएं।  इसके लिए सभी ब्लॉक में प्रयोगशाला खोलने के लिए दस-दस लाख रुपये दिए गए थे।

इसके बाद मध्यप्रदेश सरकार ने भी इस योजना को बेहद गंभीरला  प्रदेश भर की सभी तहसीलों में मिट्टी परिक्षण के लिए प्रयोगशालाएं खोली गईं थी। इसके लिए नए भवन बनाए गए और नए उपकरण खरीदे गए लेकिन इन्हें चलाने के लिए किसी कर्मचारी की नियुक्ति नहीं हुई।

नरसिंहपुर था पहले नंबर पर.

इस योजना में नरसिंहपुर जिला खास था क्योंकि पीएम मोदी के इस प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए नरसिंहपुर में सरकार के अधिकारियों ने स्वाइल हेल्थ टेस्टिंग अभियान तेजी से शुरु किया और कुछ ही समय में यहां 1.68 लाख स्वाइल कार्ड बना दिए गए और 72,500 किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर जांच शुरु की गई। इस तरह इस योजना को तेजी से लागू करने के मामले में नरसिंहपुर प्रदेश ही नहीं देश का भी अग्रणी जिला बन गया था।

 

नरसिंहपुर में इस तेजी का कारण यहां की उपजाऊ जमीनों पर  गुड़ और अरहर की खेती करने वाले यहां के जागरुक किसान थे। जो योजना के लिए खुद आगे आए लेकिन अब ये किसान बुरी तरह निराश हैं। इन्हें सरकार की इस योजना पर भरोसा नहीं रहा।

किसान कहते हैं कि हमने सोचा था कि मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला खुलने के बाद उन्हें लाभ मिलेगा और खेती बाड़ी की स्थिति सुधरेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसानों कहते हैं कि एक तरह से सरकार ने उस योजना पर करोड़ों रु खर्च कर डाले हैं जिसे चलाने का उनका कभी मन ही नहीं था और अब ये राशि लगभग बेकार जा रही है।

किसानों कहते हैं कि हम पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम शिवराज के बार-बार किसानों की आय दोगुनी करने के वादों को देखते हुए जोश में थे और मृदा परिक्षण करवाने के लिए लगातार आगे आए, राम स्वरूप नाम के एक कहते हैं कि उन्हें उम्मीद थी कि आगे कुछ अच्छा होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ और ये वादा भी पूरी तरह राजनीतिक और सरकारी साबित हुआ।

मिट्टी परीक्षण बस औपचारिकता.

किसान बताते हैं कि पिछले चार- पांच वर्षों से किसानों के खेतों की मिट्टी का परीक्षण पूरी तरह औपचारिकता बन गया है। वर्ष 2016-17 में जब मिट्टी परीक्षण रिकार्ड स्तर पर हुआ तो देश में पहले नंबर पर आया। नरसिंहपुर जिले में जिला मुख्यालय में मिट्टी परीक्षण की बड़ी प्रयोगशाला का निर्माण हुआ और एक-एक लाख रुपये की लागत से परीक्षण करने वाली मशीनें खरीदी गईं। शुरुआत में इन मशीनों से मिट्टी की जाँच हुई लेकिन फिर अभियान ठहरा और जांच थम गई। अब यह मशीनें खराब हो गईं हैं।

धूल खा रहीं मशीनें. वीरान पड़ी प्रयोगशालाएं.

जिले के सभी छह विकास खंडों में इस तरह की प्रयोगशालाएं बनाईं गईं और मशीनें भी खरीदी गईं लेकिन इनमें कभी भी स्टाफ की नियुक्ति नहीं हुई। लिहाज़ा ये प्रयोगशालाएं बंद रहीं। किसान कहते हैं कि इस तरह सरकार ने रोज़गार नहीं दिया और इसी के चलते न ही योजनाएं आगे बढ़ सकीं।

किसान इसे समझाते हैं कि प्रदेश भर में सैकड़ों प्रयोगशालाओं का निर्माण हुआ लेकिन कर्मचारियों के बिना कोई भी काम कैसे हो। वहीं किसान कहते हैं कि नरसिंहपुर जिले में  कृषि विभाग ने शत-प्रतिशत किसानों की स्वाइल हेल्थ कार्ड बनाए भी हैं तो वह किसानों तक नहीं पहुंचे हैं।

किसान भ्रमित और अधिकारी बेफिक्र.

जिले में अब मिट्टी परीक्षण को लेकर सरकारी अधिकारी भी कोई बहुत गंभीर नजर नहीं आते। ऐसे में किसान भी इसे लेकर उदासीन ही हैं हालांकि उन्हें इसकी महत्ता पता है एक किसान बताते हैं कि अगर सभी खेतों की मिट्टी का परीक्षण समय पर होता रहता तो किसानों को उपज में लाभ होता लेकिन अब ऐसा नहीं है।

 

किसान नेता बाबू सिंह पटेल बताते हैं कि मिट्टी परीक्षण बंद होने के बाद किसान एक भ्रमित हैं और नहीं समझ पा रहे हैं कि उनके खेतों में कौन से रासायनिक खादों की जरुरत है। पटेल बताते हैं कि दवा व्यापारी ही इस समय किसानों के मिट्टी के डॉक्टर बने हुए हैं वे बताते हैं कि खाद व्यापारी किसानों को जो खाद देते हैं ज्यादातर किसान बिना सोचे समझे उन्हें डाल लेते हैं ऐसे में खेती में रसायन की मात्रा बढ़ रही है और उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है।

नई नियुक्तियां हों तो चले प्रयोगशाला.

नाम प्रकाशित न करने की शर्त शर्त पर कृषि विभाग से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी बताते हैं कि शासन स्तर से मिट्टी जांचने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की जा रही है। इसके लिए प्रदेश भर में कम से कम एक हजार कर्मचारियों की आवश्यक्ता है। ऐसी कमी में प्रयोगशालाओं को फिलहाल कैसे चलाएं! अधिकारी बताते हैं कि किसान आते हैं लेकिन वे ब्लॉक स्तर पर उनकी मदद नहीं कर सकते क्योंकि प्रयोगशाला बंद है।

पोषक तत्व के बारे में नहीं पता.

वहीं करेली के एक किसान हरीराम बताते हैं कि मिट्टी का परीक्षण जरूरी है क्योंकि हमें मिट्टी की सेहत की जानकारी नहीं होती। वे कहते हैं कि मिट्टी में जिंक, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, मैग्नीशियम, कापर, सल्फर कैल्शियम, बोरान आदि जितना सही मात्रा में रहेगा उतनी फसल और पैदावार अच्छी होगी लेकिन इसे पता लगाने का कोई सुलभ तरीका उनके पास नहीं है।

हरीराम कहते हैं कि  मिट्टी के स्वास्थ परीक्षण से यह पता चल जाता है कि मिट्टी में किस खनिज तत्व की कमी है। जिसकी पूर्ति करना होगी ताकि पैदावार अच्छी हो  इसलिए मिट्टी के खनिज तत्वों को जांचने यह टेस्टिंग होती है। यह इसलिए और मायने रखती है, कि किसान अब साल भर में तीन-तीन, चार-चार फसलें लेता है जिससे मिट्टी कमजोर हो जाती ही परंतु जिले में कोरोनो के बाद से मिट्टी का स्वास्थ परीक्षण पूरी तरह बंद है।

फिलहाल हमारे पास लक्ष्य ही नहीं.

मिट्टी परीक्षण फिलहाल धीमा है, फिलहाल कोई बड़ा लक्ष्य नहीं आ रहा है। जो किसान आते हैं उनका करवा देते हैं। हम फिलहाल अपनी मुख्यप्रयोगशाला में ही काम कर रहे हैं लेकिन किसान सैंपल लेकर कम आ रहे हैं।  ब्लॉक स्तर पर चल रहीं प्रयोगशालाएं बंद हैं। इन प्रयोगशालाओं में भर्ती नहीं हुई है और मशीनें भी पूरी नहीं आई हैं। ऐसे में वहां काम रुका हुआ है।

डॉ. आरएन पटेल, सहायक जिला मिट्टी परीक्षण अधिकारी, नरसिंहपुर 



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