मुख्यमंत्री शिवराज की घोषणाओं से भ्रमित हैं शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी, 2018 में 60 हजार भर्ती की घोषणा की थी अब फिर 50 हजार


शिक्षक भर्ती के लिए संघर्ष कर रहे लोग लगातार इसका जवाब मांग रहे हैं लेकिन फिलहाल उनके हाथ खाली हैं, प्राथमिक शिक्षक के अभ्यर्थी भी 51 हजार पदों की मांग कर रहे हैं


देश गांव
उनकी बात Updated On :

भोपाल। पिछले कुछ दिनों में प्रदेश सरकार ने कई विभागों में हजारों की संख्या में नियुक्तियों का विज्ञापन जारी किया है। मुख्यमंत्री ने एक लाख पद जारी करने का वादा किया है और अब तक तकरीबन 34 हजार नौकरियों के लिए विज्ञापन जारी हो चुके हैं। शिक्षा विभाग, राजस्व, नगरीय निकाय जैसे विभागों में सबसे ज्यादा नौकरियों के अवसर दिखाई दे रहे हैं हालांकि अभी भी प्रदेश के बहुत से नौजवान नौकरियों के इंतजार में हैं क्योंकि प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी हुई बेरोजगारी के आगे यह नौकरियों के यह अवसर बेहद कमतर दिखाई देते हैं।

प्रदेश में जहां शिक्षकों के करीब सवा लाख पद खाली हैं तो वहीं स्कूल शिक्षा विभाग में 18 हजार पदों पर भर्ती हो रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार 50 हज़ार पदों पर शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। हालांकि पिछले दिनों आई लोक शिक्षण संचालनालय की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 2357 स्कूलों में शिक्षक ही नहीं है तो तकरीबन 8307 स्कूलों में केवल एक ही शिक्षक है। प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की यह स्थिति हैरान करने वाली है। वहीं एक और परेशान करने वाले आंकड़े हैं जो बताते हैं कि प्रदेश में तकरीबन 35 लाख बेरोजगार हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की घोषणा के अनुसार सरकार कुल 50 हजार शिक्षकों की भर्ती करने जा रही है। हालांकि अभ्यर्थी इस मामले में अब तक नहीं समझ पा रहे हैं कि मुख्यमंत्री आखिर कौन सी घोषणाओं की बात कर रहे हैं।

Rachna vyas, unemployed union
रचना व्यास

शिक्षक भर्ती परीक्षा की ग्रेड वन और ग्रेड 2 की अभ्यर्थी रचना व्यास बताती हैं कि मुख्यमंत्री ने साल 2018 में भी 60 हजार पद पर शिक्षक भर्ती की घोषणा की थी लेकिन यह घोषणा अब तक अधूरी है। मौजूदा समय में जिन 18 हजार पदों पर शिक्षकों की भर्ती की जा रही है उन्हें 2018 की घोषणा में गिना जाए या 2022 में की जा रही इस घोषणा में।

व्यास के मुताबिक मुख्यमंत्री ने भले ही 2018 में की गई अपनी घोषणा को 2022 में याद किया हो लेकिन इस दौरान बेरोजगारों की संख्या और उनकी उम्र लगातार बढ़ती रही ऐसे में चार साल पहले जितने बेरोजगार थे अब उससे कहीं ज्यादा हैं। सागर जिले की एक अन्य अभ्यर्थी रश्मि बताती है कि सभी अभ्यर्थी इसी बार में ही सरकारी भर्ती पा जाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें नहीं पता कि अगली बार मौका कब मिलेगा क्योंकि चुनावों के समय ही प्रदेश में भर्ती की बात की जाती है।

Ranjeet gaur, unemployed union Madhya Pradesh
रंजीत गौर

 

शिक्षकों की भर्ती के लिए संघर्ष कर रहे रणजीत गौर और उनके साथी तकरीबन रोज़ ही मुख्यमंत्री को खोजते हैं, पिछले एक हफ्ते में वे तकरीबन 2 बार मुख्यमंत्री से मिलकर पद वृद्धि करने का ज्ञापन दे चुके हैं। दरअसल इन अभ्यर्थियों को अधिकारी अक्सर एक विभाग से दूसरे विभाग में भेजते रहते थे और ऐसा करते हुए तकरीबन 4 साल हो गए। ऐसे में इन्होंने तय किया है कि अगवा सीधे मुख्यमंत्री को ही अपनी बात कहेंगे।

अभ्यर्थी बताते हैं कि फिलहाल शिक्षा विभाग में जो 18 हजार भर्तियां की जा रही हैं उनमें से भी कई भर्तियां पहले हो चुकी हैं जिनके नाम अब जारी किए जा रहे हैं। यानी सरकार पुरानी आंकड़ों को ही दिखा कर अभ्यर्थियों का गुस्सा शांत कर रही है। हालांकि अभ्यर्थी बताते हैं कि उन्होंने आंकड़ों के इस हेर फेर को भी पकड़ लिया है।

जो 18 हजार भर्तियां हो रहीं हैं उनमें से कुल 11 हजार भर्तियां केवल जनजातीय विभाग में हो रही हैं और तकरीब 7429 भर्तियां स्कूल शिक्षा विभाग में हो रहीं हैं। आने वाले विधानसभा चुनावों के चलते सरकार पहले ही जनजातीय इलाकों पर ज्यादा ध्यान दे रही है। ऐसे में अन्य जाति वर्ग के अभ्यर्थी भी परेशान हैं।

रचना व्यास बताती हैं कि फिलहाल 14 हजार पदों पर नियुक्ति हुई है और तकरीबन 4 हजार पद शेष हैं। हालांकि जनजातीय विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग में तकरीबन 50 हजार पदों पर भर्ती होनी चाहिए थी। हालांकि नियमों के मुताबिक खाली पदों पर केवल पांच प्रतिशत पर विभागों को भर्ती का अधिकार है और इसमें पदोन्नति भी शामिल है।

नौकरी के लिए प्राथमिक स्तर के शिक्षक की भर्ती परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थियों का संघर्ष भी जारी है। प्राथमिक शिक्षक के लिए कुल 51 हज़ार पदों पर भर्ती की मांग की जा रही है। सोशल मीडिया पर अभ्यर्थी इसके लिए मुख्यमंत्री से लगातार मांग कर रहे हैं लेकिन इस बारे में अब तक कोई घोषणा नहीं हुई है। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री खुद भी इस मामले में कुछ नहीं कर सकते क्योंकि स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षक भर्ती में बढ़ोतरी के लिए वित्त विभाग से कोई अनुमति ही नहीं ली।

शिक्षक भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों को राज्य सरकार से कई उम्मीदें हैं इसके पीछे यही खाली पद हैं जो करीब 10 वर्षों से नहीं भरे गए। यही वजह है कि अभ्यर्थी चाहते हैं कि प्रतिवर्ष पांच हजार भर्तियों के हिसाब से करीब 51000 पद भरे जाएं। हालांकि सरकार ने पिछले दिनों 7500 पदों पर भर्ती की जानकारी जारी की है।

Pramod Gusain, MPTET (unemployment story)
प्रमोद गुसाईं, अभ्यर्थी

प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थी प्रमोद गुसाईं बताते हैं कि सरकार ने 12 साल से प्राथमिक शिक्षक के पदों पर भर्ती नहीं की है और इस तरह से बेरोजगार हर बार बढ़ रही है। यही वजह है कि प्रदेश में हजारों शिक्षकों की कमी है और अगर सरकार हमारी बात मान लेती है तो हजारों पद तो इसी तरह से भरे जा सकते हैं इस तरह कुछ हद तक बेरोजगारी में भी कमी आएगी और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति भी सुधर पाएगी।

शिक्षकों की भर्ती के लिए अब तक कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं और बेरोजगार युवा भाजपा को वोट ना देने की कसम में तक खा चुके हैं लेकिन इसके बावजूद अब तक सरकार की ओर से कोई नर्म रुख दिखाई नहीं दे रहा है।