महू की लेखिका तृप्ति मिश्रा की पुस्तक ‘यादों के पत्ते’ को समीक्षकों से मिली सराहना


नगर की लेखिका तृप्ति मिश्रा द्वारा लिखित पुस्तक ‘यादों के पत्ते’ को देशभर के समीक्षकों ने खूब सराहा है। उन्होंने अपनी समीक्षा में कहा है कि लेखिका ने अपने कलम व शब्दों के माघ्यम से जिंदगी के अहसासों को पन्नों पर उतारा है जो एक सराहनीय काम है।


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इन्दौर Published On :
yaadon ke patte

महू। नगर की लेखिका तृप्ति मिश्रा द्वारा लिखित पुस्तक ‘यादों के पत्ते’ को देशभर के समीक्षकों ने खूब सराहा है। उन्होंने अपनी समीक्षा में कहा है कि लेखिका ने अपने कलम व शब्दों के माघ्यम से जिंदगी के अहसासों को पन्नों पर उतारा है जो एक सराहनीय काम है।

प्रसिद्ध गजलकार प्रवीण सक्सेना (दिल्ली) ने अपनी समीक्षा में कहा कि पुस्तक के शब्दों की ज़िंदगी में यादों की एक अहम जगह होती है। एक ख़ज़ाने की तरह होती हैं यादें। यादें हँसाती हैं, रुलाती हैं, गुदगुदाती हैं, ख़ुशी देती हैं, हर लम्हे का सहारा भी बन जाती हैं। इसका अहसास होता है।

इस पुस्तक में उन्होंने अपनी यादों को बड़ी ही ख़ूबसूरती से हम सभी को रूबरू करवाया है। ऐसा लगता है कि जब भी वे अपनी यादों के जुड़तीं हैं, उस पल के अहसास, उसके रंग, उस कविता में उभर आते हैं।

हर कविता उस समय की उनकी मानसिक स्थिति की परिचायक बन कर सामने आती है। इसमें फूलों सी महकती यादें हैं जो कभी कांटों सी भी चुभती हैं। रोशनी के इन्द्रधनुष सी यादों का ज़िक्र है, सूने घर का बयां है और सूनी अंधेरी दुनिया की बातेँ हैं।

एक विश्वास भी है किसी के आने का, इंतज़ार है प्रतीक्षा है… लेकिन जो भी है, ये यादें एक मीठे अहसास की तरह हैं। सक्सेना ने लिखा कि पूरी पुस्तक में कहीं भी निराशा और मायूसी तथा नकारात्मकता नजर नहीं आती। यह एक अच्छा प्रयास है जो सफल और पूर्ण भी होगा।

लेखिका का परिचय –

trupti mittal

भूतपूर्व सेना अधिकारी की पत्नी तृप्ति स्वतंत्र लेखन कार्य से जुडीं हैं। लेखिका एवं कवियित्री तृप्ति सरकारी विभागों में कौशल उन्नयन शिविरों में विभिन्न क्राफ्ट्स की मास्टर ट्रेनर रही हैं एवं बाल संरक्षण समिति, महिला एवं बाल विकास विभाग मप्र शासन की तहसील स्तर की समिति में मनोनीत सदस्य हैं। समाजसेवा के अनेक कार्यों से जुड़ी तृप्ति का जीवन अनेक उतार-चढ़ाव से गुजरा है।

तृप्ति मप्र हस्तशिल्प निगम एवं खादी बोर्ड प्रशिक्षण संस्थान के साथ रजिस्टर्ड ट्रेनर हैं, जिन्हें सिलाई-कढ़ाई से लेकर करीब 80 तरह के क्राफ्ट आते हैं। भारतीय मांडना आर्ट की एक्सपर्ट मानी जाती हैं। मध्यप्रदेश में पांच हजार से ज़्यादा महिलाओं को कौशल उन्नयन शिविरों में प्रशिक्षण दिया है।

तृप्ति एक लोकगायिका के रूप में भी जानी जाती हैं। लुप्त होते जा रहे ढोलक वाले गीतों के साहित्य पर शोध एवं लय सहित संरक्षण करना शुरू किया। इनकी लोकगीतों पर आधारित पुस्तक “लोक-लय” भी प्रकाशित हो चुकी है जिसमें अत्यंत पुरातन 70 भक्ति गीतों का संकलन है।

तृप्ति को अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं जिसमें महिला सशक्तिकरण से संबंधित पुरस्कार, नेशन बिल्डर अवार्ड (रोटरी क्लब) 2017, नारी शक्ति को सम्मान (ब्रजभूमि फाउंडेशन) 2019, पर्यावरण संरक्षण सम्मान (अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति) 2020 आदि प्रमुख हैं।



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