देशगाँव

जैसा कि नाम से ज़ाहिर है, देशगाँव भारत के गांव-कस्‍बों का हाल बताने वाला एक मंच है। चूंकि जीवित होने की पहली शर्त है शरीर में दिल का ठीक से काम करना, इसलिए देश के दिल का हाल जानना भी सबसे पहले ज़रूरी है। भारत का दिल है मध्‍य प्रदेश। दिल ठीक, तो बाकी अंग भी ठीक काम करेंगे। इसलिए देशगाँव देश के दिल से यानी सीधे मध्‍य प्रदेश से ख़बर लाता है। अपने इस देशगॉंव का विस्तार  छत्तीसगढ़ तक भी होने जा रहा है। आने वाले समय में  महाराष्ट्र और राजस्थान की ज़मीन भी हमारा ये देशगॉंव साझा करेगा।

ख़बर आम लोगों की, जिनके दम पर इस देश का लोकतंत्र जीवित है। आम लोग यानी किसान, मज़दूर, नौजवान। दलित, आदिवासी और औरतें। बच्‍चे, बूढ़े, दिव्‍यांग। सरकारी कर्मचारी से लेकर आम नौकरीशुदा लोग, शिक्षक, डॉक्‍टर, व्‍यवसायी और वे तमाम काम धंधे करने वाले लोग जिनके बल पर हमारी जिंदगी पटरी पर कायम रहती है।

देशगाँव कुछ समान सोच वाले पत्रकारों की एक पहल है। ये पत्रकार मध्‍य प्रदेश के गाँव-कस्‍बों से लेकर दिल्‍ली तक फैले हैं। अपने-अपने कोनों में बैठे ये ख़बरनवीस आप तक सही सूचना पहुंचाने का काम करते हैं। इसके अलावा कई वरिष्‍ठ लेखक और स्‍तम्‍भकार हैं जो रोज़मर्रा की ख़बरों के प्रवाह के बीच हमें और आपको वैचारिक खुराक देने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

देशगाँव फिलहाल बेहद सीमित संसाधनों में काम कर रहा है। अपने पाठकों से इस उम्‍मीद के साथ कि वे आने वाले समय में इसे अपनी मज़बूत आवाज़ का एक मंच बनाएंगे और साथ मिलकर हम इसे आगे ले जाएंगे।

देशगाँव के बारे में किसी और विवरण या जानकारी के लिए इस पते पर संपर्क करें:- deshgaonnews@gmail.com

Shravan Garg, Editorial Advisor

 प्रिंट पत्रकारिता में 40 से अधिक वर्षों से सक्रिय, श्रवण गर्ग नियमित रूप से राजनीतिक, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय मामलों पर लिखते हैं, और उनके कॉलम पाठकों के बीच पसंद किए जाते हैं।

पत्रकारिता के क्षेत्र में क्षेत्र में समृद्ध, विविध अनुभव रखने वाले श्रवण गर्ग दैनिक भास्कर के ग्रुप एडिटर, नई दुनिया के चीफ एडिटर (दैनिक जागरण ग्रुप का हिस्सा) और फ्री प्रेस जर्नल ग्रुप का चीफ एडिटर रह चुके हैं।

वे प्रजानीति एवं सर्वोदय के संपादन से भी जुड़े रहे। श्रवण गर्ग 1972 में प्रकाशित, डकैतों के आत्मसमर्पण पर आधारित किताब ‘चंबल की बंदूक गांधी के चरणों में’ के सह लेखक हैं।

श्रवण गर्ग को पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए 2012 में लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। वे नेशनल इंटीग्रेशन काउंसिल, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन सोसाइटी आदि के सदस्य रह चुके हैं। श्रवण गर्ग थॉमसन फाउंडेशन, लंदन, यूके और साल्ज़बर्ग सेमिनार, साल्ज़बर्ग, ऑस्ट्रिया के पूर्व छात्र रहे हैं।

Sudhir Gore, Consultant

सुधीर गोरे एक संचार सलाहकार, लंबे समय तक पत्रकार और संचार रणनीति, सामग्री विपणन, डिजिटल पत्रकारिता और मीडिया साक्षरता में गहरी रुचि रखने वाले मीडिया ट्रेनर हैं।

उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 30 से अधिक वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इंडिया टुडे, दैनिक भास्कर, जागरण ग्रुप, टाइम्स ऑफ इंडिया, नईदुनिया और फ्री प्रेस के साथ काम किया है।

उनके पास पत्रकारिता, अंग्रेजी साहित्य और राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री है। वह अपनी पीएचडी भी कर रहे हैं। बेनेट यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा, यूपी से और उनका शोध क्षेत्र “पर्यावरण संचार” है।

Shree Prakash, Managing Editor

दिल्‍ली में साहित्‍यिक पत्रिका ‘हंस’ से नौकरी की शुरुआत। ‘दिल्ली मिड-डे’ एवं ‘अमर उजाला’ के साथ कुछ वर्ष पत्रकारिता। एनजीओ सेक्टर में शिक्षा का अधिकार, मानवाधिकार एवं शहरी परिवहन पर केंद्रित नेशनल नेटवर्कों के लिए मीडिया कोऑर्डिनेशन एवं अलायंस बिल्डिंग का काम किया।

इंदौर में ‘वेबदुनिया’ और कुछ अन्य संस्थानों में अनुवादक के तौर पर कार्यरत रहे। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के लिए विश्व बैंक के पूर्व वाइस-प्रेसिडेंट, अर्थशास्त्री इयान गोल्डिंग की किताब ‘डेवलपमेंट: ए वेरी शॉर्ट इंट्रोडक्शन’ का हिन्दी अनुवाद किया। पिछले कुछ वर्षों से फ्रीलांस अनुवाद एवं संपादन कार्य कर रहे हैं।

Abhishek Shrivastava,  Editorial Mentor

अभिषेक श्रीवास्‍तव एक पत्रकार और अनुवादक हैं जो पिछले दो दशक से दिल्‍ली में स्थित हैं। शुरुआती दस साल विभिन्‍न मीडिया संस्‍थानों में काम करने के बाद 2011 से वे स्‍वतंत्र पत्रकारिता और लेखन कर रहे हैं।

फिलहाल वे आउटलुक हिंदी को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे केंद्रीय विश्‍वविद्यालय जामिया मिलिया इस्‍लामिया में पत्रकारिता के छात्रों को पढ़ाते हैं और संवैधानिक मूल्‍यों पर एक फैलोशिप में पत्रकारिता के प्रशिक्षक व मेन्‍टर हैं।

बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद उन्‍होंने भारतीय जनसंचार संस्‍थान, दिल्‍ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्‍लोमा और गुरु जम्‍बेश्‍वर युनिवर्सिटी, हिसार से जनसंचार में एमए किया।

जनसत्‍ता से अपनी पत्रकारिता शुरू कर के उन्‍होंने यूनिवार्ता, नवभारत टाइम्‍स, इकनॉमिक टाइम्‍स, दैनिक भास्‍कर, दूरदर्शन आरकाइव्‍स, बीबीसी, आदि को अपनी सेवाएं दी हैं। उन्‍हें संकटग्रस्‍त क्षेत्रों से रिपोर्टिंग का अनुभव है। ऐसे करीब एक दर्जन इलाकों से लिखी उनकी रिपोर्ताजों का एक संकलन 2018 में आ चुका है।

2011 में भ्रष्‍टाचार विरोधी आंदोलन से पैदा हुई आम आदमी पार्टी के राजनीतिक सफरनामे पर उनकी किताब 2022 में ‘आम आदमी के नाम पर’ के शीर्षक से पंजाबी और हिंदी में आयी है। इसी साल गुजरात के कच्‍छ की यात्राओं पर केंद्रित एक एथ्‍नोग्राफिक यात्रा-वृत्‍तांत ‘कच्‍छ कथा’ भी राजकमल प्रकाशन से छप कर आया है।

उन्‍होंने कुछ किताबों के अनुवाद भी किए हैं। अरुणा रॉय की ‘आरटीआइ कैसे आई’ (राजकमल), प्रो. अरुण कुमार की ‘भारत में ब्‍लैक इकोनॉमी’ (ऑक्‍सफर्ड युनिवर्सिटी प्रेस), रामचंद्र गुहा की ‘बागी फिरंगी’ (पेग्विन), जॉर्ज ऑरवेल की ‘1984’ (राजकमल) इनमें प्रमुख हैं।

Aditya Singh, Editor

Deshgaon

पिछले दस वर्षों से मप्र में रहकर पत्रकारिता कर रहे हैं। इससे पांच साल पहले शुरुआत एनडीटीवी के साथ की और आख़िरी नौकरी नईदुनिया इंदौर में की। इस बीच कुछ अंग्रेज़ी और हिन्दी टीवी चैनलों में अल्प समय के लिए और मप्र में आकर दैनिक भास्कर, पत्रिका संस्थानों के लिए काम किया।

नईदुनिया में रहकर इंदौर ज़िले की ज़िम्मेदारी संभाली। आंबेडकर की जन्मभूमि को समझा। महू छावनी में रहते हुए सेना से जुड़ी ख़बरों के अलावा प्रदेश के उद्योग क्षेत्र की खबरों भी अच्छी पहुंच रही। इस बीच ग्रामीण पत्रकारिता जारी थी जो सबसे ज्यादा भाई भी इसलिए देशगांव शुरू किया।

Manish Kumar, Content Editor  

मनीष, आधुनिक पत्रकारिता के इस डिजिटल माध्यम को अच्छी तरह समझते हैं। इसके पीछे उनका करीब चौदह वर्ष का अनुभव ही वजह है। वे दैनिक भास्कर, नईदुनिया जैसे संस्थानों की वेबसाइट में काफ़ी समय तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

देशगांव डॉट कॉम की स्थापना से पहले न्यूज निब (शॉर्ट न्यूज ऐप) की मुख्य टीम का हिस्सा रहे। मनीष फैक्ट चैकिंग में निपुण हैं। वे गूगल न्यूज इनिशिएटिव व डाटालीड्स के संयुक्त कार्यक्रम फैक्टशाला के सर्टिफाइट फैक्ट चेकर व ट्रेनर हैं।

भोपाल के माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपा से पढ़ाई कर चुके मनीष मानते हैं कि गांव और शहर की खबरों को जोड़ने के लिए मीडिया में माध्यमों की लगातार ज़रूरत है, ऐसे में देशगांव एक उपयुक्त पहल है।

Arun Solanki, Journalist

 

देशगांव डॉट कॉम से जुड़ने से पहले नईदुनिया व कई अन्य अखबारों में अपना योगदान देते रहे हैं। देशगांव के लिए इंदौर के महू से रिपोर्टिंग करते हैं।

Brajesh Sharma, Journalist

 

नईदुनिया व कई अन्य अखबारों में सेवाएं देने के बाद देशगांव से जुड़े हैं। किसानों, मजदूरों के साथ एग्री सेक्टर की खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं। देशगांव के नियमित सहयोगी हैं।

Neetu Singh, Journalist

नीतू सिंह एक स्वतंत्र पत्रकार और शेड्स ऑफ रूरल इंडिया की संस्थापक हैं। वह महिला सशक्तिकरण, यौन और लिंग आधारित हिंसा, आदिवासी समुदाय आदि के मुद्दों के प्रति बहुत संवेदनशील हैं।

ग्रामीण भारत में लिंग आधारित हिंसा के मामलों की उनकी लगातार रिपोर्टिंग ने पीड़ितों के लिए प्रभावी पुलिस कार्रवाई और न्याय का नेतृत्व किया है।

ग्रामीण पत्रकारिता के 11 वर्षों के लंबे अनुभव में, नीतू ने लैंगिक संवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए 10 बार लाडली मीडिया और विज्ञापन पुरस्कार जीता। उन्होंने उत्कृष्ट महिला मीडियाकर्मियों के लिए चमेली देवी जैन पुरस्कार और 2020 में एक युवा होनहार पत्रकार के लिए प्रियंका दहेले पुरस्कार भी जीता।

नीतू अपनी “रिपोर्टर सखी” पहल के माध्यम से पत्रकारिता में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक कम्युनिटी जर्नलिस्ट ट्रेनर के रूप में भी काम करती हैं।

Nityanand Gayen, Journalist

 

देशगांव से जुड़ने से पहले स्वतंत्र रूप से कई वेबसाइटों व मैगजीनों के लिए योगदान करते रहे हैं। नित्यानंद, की मूल पहचान एक कवि के रूप में है। अपने देशगांव में उनका विशेष योगदान होता है।

Aman Gupta, Journalist

अमन गुप्ता स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर काम कर रहे। पत्रकारिता में पांच साल का अनुभव है। एक पत्रकार के तौर समाज, संस्कृति, और राजनीतिक को समझने और समझाने की कोशिश कर रहे हैं।

स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर द कारवां, न्यूज लॉन्ड्री, डाउन टू अर्थ, मीडिया विजिल जैसे संस्थानों में अलग-अलग विषयों पर लिख रहे हैं। पत्रकारिता की औपचारिक पढ़ाई भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली से की हुई है।