मजदूरों के हक में उपवास पर बैठीं मेधा पाटकर, आंदोलन को कई मजदूर संगठनों का सर्मथन


सेंचुरी के आंदोलनकारियों को मिला अनेक किसान , मज़दूर और जनसंगठनों का समर्थन,मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग*


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उनकी बात Published On :

इंदौर। उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला की कपड़ा मिल सेंचुरी यार्न/ डेनिम मिल को बेचने का निर्णय ले लिया गया है और यहां के मजदूरों को वीआरएस लेने के लिए कहा गया है। कंपनी के इस फैसले के विरोध में मजदूर  विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और अब उनके इस विरोध में सामाजिक मेधा पाटकर के साथ के साथ कई दूसरे सामाजिक और मजदूर संगठन भी आगे आ रहे हैं।  पाटकर ने मजदूरों के सर्मथन में चौबीस घंटे का उपवास शुरु किया है।

इस मिल के मजदूर 1366 दिन से मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में एबी रोड पर सतराटी में आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन 75 से ज्यादा संगठनों और व्यक्तियों ने समर्थन दिया है और प्रदेश के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मजदूरों और कर्मचारियों के पक्ष में दख़ल देने की मांग की है।

वहीं इंदौर में श्रम आयुक्त को एआईटीसीयू के नेता सुनील गोपााल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपा ।प्रतिनिधिमंडल में प्रसिद्ध गांधीवादी लेखक एवं विचारक चिन्मय मिश्र, समाजवादी नेता रामस्वरूप मंत्री एवं एस यू सी आई के प्रदीप भाई ने श्रम आयुक्त से  मुलाकात की।

इन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सेंचुरी के मालिकों द्वारा कर्मचारियों और मजदूरों को अवैधानिक रूप से वीआरएस देने और  मिल बेचने की कोशिशों पर रोक लगाने तथा मिल को चलाए जाने का प्रबंध करने की मांग की है।

विभिन्न संगठनों की ओर से मुख्य मंत्री को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि 29 जून 2021 को कारखाना प्रबंधक द्वारा श्रमिक एवं कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) के संबंध में पत्र लिखकर कहा गया कि 13 जुलाई तक सभी श्रमिक एवं कर्मचारी वीआरएस ले लें। सेंचुरी डेनिम का यह निर्णय गैरकानूनी है तथा 90 प्रतिशत श्रमिकों को मंजूर नहीं है।

पत्र में आगे कहा गया है कि आप जानते ही हैं कि जनता श्रमिक संघ की याचिका के चलते औद्योगिक ट्रिब्यूनल, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मिल बंद होने के बावजूद श्रमिकों को वेतन दिया जा रहा है। यह भी उल्लेख करना जरूरी है कि कुमार मंगलम बिड़ला समूह ने मिल बेचने का फर्जी विक्रय पत्र बनाकर जो धोखा किया था वह ट्रिब्यूनल और हाई कोर्ट द्वारा खारिज कर दिया गया।

श्रमिक ‘वीआरएस नहीं, रोजगार चाहिए’ संघर्ष कर रहे हैं। कंपनी ने यह भी निर्णय किया है कि वह मंजीत सिंह को मिल बेच रही है। जबकि उन्हें मिल चलाने का कोई अनुभव नहीं है। यह जमीन हथियाने का मामला है। इसलिए श्रमिकों के पक्ष में राज्य सरकार का हस्तक्षेप आवश्यक हो गया है।

पत्र में लिखा गया है कि सेंचुरी टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज द्वारा लॉकडाउन के पहले 680 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया गया, 2019-20 में 360 करोड रुपए मुनाफा कमाया। उसके बावजूद एक हजार श्रमिकों के रोजगार को खत्म करने पर कंपनी आमादा है।

 



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