जिले में औसत से बेहतर बारिश से बढ़ा गेंहू का रकबा, 4.04 लाख हैक्टेयर में होगी रबी फसलों की बुआई


गेहूं की बुआई में व्यस्त हैं किसान लेकिन खाद की कमी बन रही बड़ी परेशानी


आशीष यादव आशीष यादव
धार Published On :

इस बार सितंबर माह में पर्याप्त बरसात होने से क्षेत्र में रबि के लिए प्रर्याप्त बारिश हुई है, जिसके चलते इस बार क्षेत्र के किसानों का रुझान चने की अपेक्षा गेहूं की तरफ अधिक देखने को मिल रहा है। गेहूं की बोवनी को लेकर किसान अपने खेतों को तैयार करने में जुट गया है और कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली किस्म का चयन करने में जुटा हुआ है। रबी सीजन के लिए किसानों के द्वारा खेतों में  बखराई तो कुछ ने बोवाई का कार्य शुरू कर दिया है।

बता दें कि इस बार लगातार चार माह तक हुई बारिश ने रबी की बोवनी के कार्यक्रम  को प्रभावित कर दिया था। खेतों में नमी होने के कारण इस बार किसानों को कम समय में सिंचाई हो रही है। ओर वही खेतो में कम पानी लगे रहा है  बारिश का दौर भी लगातार होने से रबी सीजन की बोवनी करने की तैयारी भी लेट ही शुरू कर पाई है। बारिश खुलने के बाद ही सोयाबीन कटाई के साथ किसानों ने खेतों की जुताई शुरू कर दी है क्योंकि इस वर्ष बारिश के कारण खेतों में नमी है और कही किसान बगैर सिंचाई के बोवनी कर दी है व बीज भी अंकुरित हो गया है कुछ समय बाद पानी भी छोड़ दिया जायेगा।

इस बार  बोवनी का रकबा 4 लाख  40 हजार हैक्टेयर है। जिसमें सबसे ज्यादा चना और गेहूं की बोवनी की जाएगी। इसके अलावा शेष रकबा में लहसुन, अरहर अन्य आदि फसलें की बोई की जाएगी हैं। कई बार समय से पहले बारिश रुक जाने के कारण खेतों की नमी चली जाती है, जिससे किसानों को लाखों रुपए खर्च कर सिंचाई करने के बाद बोवनी करनी पड़ती है और जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन नहीं रहते वह बोवनी नहीं कर पाते हैं, लेकिन इस वर्ष अच्छी बारिश होने के बाद किसान बोवनी की तैयारियों में जुट गए हैं। कुछ जगह बोवनी शुरू हो गई है।

जिले में रबी फसल की बुआई को लेकर सहायक संचालक संगीता तोमर ने बताया कि कृषि विभाग भी अपनी तैयारियां पूरी कर चुका है। विभाग की ओर से इस बार गेहूं और चने का रकबा बढाया गया है, लेकिन जो अनाज मक्का का रकबा 8 हजार है। इस बार जिले में अन्य फसलो के रकबों में ज्यादा अंतर नहीं है जिले में अंतिम समय में हुई बारिश से किसानों को काफी फायदा मिला।

बारिश की नमी के कारण किसानों को कम पानी की जरूरत पडेगी। अच्छी बारिश के साथ कृषि विभाग ने भी खेती को बढ़ावा देने और किसानों को उन्नत तकनीकी अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। जिले में लगभग अभी 20 प्रतिशत बुवाई का कार्य हो चुका है। किसान भी किसानी के कार्य में व्यस्त है। किसानों ने बताया कि जिन किसानों ने अगेती फसल की बुआई की थी। वे अब फसल की निंदाई. गुड़ाई कर रहे हैं। किसान खेतों की अच्छे से हंकाई जुताई करके खाद डालकर लहुसन व गेहूं की बुवाई कर रहे हैं। क्षेत्र में कब बारिश वाले क्षेत्रों में फसलें बो दी गई है।

बढ़ा है गेहूं का रकबा:
इस वर्ष बारिश अच्छी होने के कारण गेहूं का 10 हजार हेक्टेयर में बढ़ा है। क्योकि बाद कि बारिश ने किसानों के चहरे रोनक लौटा दी थी क्योंकि गेहूं की फसल को पानी की जरूरत ज्यादा रहती है और जलस्तर अच्छा होने के कारण यह फसल ज्यादा बोई जा रही है। साथ ही किसानों का मानना है कि बारिश ज्यादा होने के कारण चना कम लगने की संभावना है। किसान रबी फसल की बुवाई के लिए किसान तापमान कम होने का इंतजार कर रहे है। अभी तापमान अधिक है। ऐसे में रबी की बुवाई के लिए किसानों को 8से10 दिन का इंतजार करना पड़ेगा। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों ने रबी की बुवाई की तैयारियां शुरू कर दी है, लेकिन तापमान कम होने पर ही बुवाई करेंगे।

किसान कर रहे यूरिया की मांग:
गेहूं में सर्वाधिक मांग यूरिया खाद की होती है। सरकार के भरपूर प्रयास के बावजूद यूरिया की किल्लत बनी हुई रहती है।जिले भर में सभी विकासखंड में सोसायटियों एवं नकदी बिक्री केंद्रों पर किसान अभी से लाइन में लग रहे हैं, क्योंकि गेहूं बुवाई के 15 से 20 दिन के बाद पहला पानी लेने के दौरान ही यूरिया की आवश्यकता पड़ती है। यह वर्ष चुनावी होने से यूरिया की किल्लत सरकार के लिए मुसीबत का सबक बन सकती है। मालवां के कृषकों को पर्याप्त पानी और समय पर खाद उपलब्ध हो जाए तो वे धरती से सोना उगाने की क्षमता रखते हैं। एक अनुमान के मुताबिक पूरे भारत ने में धार जिले का गेहूं उत्पादन में अपनी अगल पेट रखता है ओर मालवा का गेंहू खाने के साथ उत्पादन में भी बम्बर पैदावार किसान करते है।

12:32:16 की मांग ज्यादा है:
वहीं जिले में यह स्थिति है खाद की आज की स्थिति में  11 हजार मीट्रिक टन से अधिक यूरिया खाद वही किसानों के लिए पर्याप्त खाद है वही लगातार रैक लगी हुई है जिसमे अलग अलग जिलो से खाद जिले में आयेगा जिसे किसानों को पर्याप्त खाद मिलेगा किसानों को चिंता नही करने किसान आवश्यकता अनुसार खाद ले वही आने वाले रैक में यूरिया  व 12:32:16 खाद मिलेगा। अभी जिले में डीएपी के 16:16:16 ओर 20:20:0:16 का किसानों द्वारा उपयोग किया जा रहा है।

रबी की फसलों का रकबा
फसल                             रकबा (हैक्टेयर)
गेंहू                                     3. 20 लाख 
चना                                    65 000 
मटर                                   7 000
मक्का जो व अन्य              8500
गन्ना                                   5500
उघानीकी                          32500

इस बार बारिश अच्छी होने के कारण किसानों ने गेहूं का रकबा व चने का रकबा बढ़ाया है वहीं गेहूं में पानी की आवश्यकता अधिक होती है और इस बार बारिश अच्छी हुई इसके लिए किसान गेहूं की ओर ज्यादा रुझान कर रहे है। वही खाद को लेकर जिले में स्थिति ठीक है लगातार रैक लग रही है।
ज्ञानसिंह मोहनिया, उपसंचालक कृषि, धार



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