प्रशासन सख्त लेकिन हॉस्पिटल में व्यवस्था नहीं, मरीजों के उपचार में हो रही देरी


भले ही राज्य शासन के मंत्री और प्रशासन के अधिकारी कोरोना नियंत्रण के लिए संपूर्ण साधन और संसाधन होने का दावा करें, लेकिन हालात इसके विपरित हैं। जिला अस्पताल में जाने वाले कोविड संदिग्धों को सही उपचार नहीं मिल पा रहा है।


आशीष यादव आशीष यादव
धार Published On :
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धार। भले ही राज्य शासन के मंत्री और प्रशासन के अधिकारी कोरोना नियंत्रण के लिए संपूर्ण साधन और संसाधन होने का दावा करें, लेकिन हालात इसके विपरित हैं। जिला अस्पताल में जाने वाले कोविड संदिग्धों को सही उपचार नहीं मिल पा रहा है।

यहां एक बार फिर मरीजों को ऑक्सीजन देने के लिए फ्लो मीटर की कमी सामने आई है। ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य महकमे के पास ये सामग्रियां नहीं हैं, लेकिन कोविड झोन और आइसोलेशन वार्ड में इसकी आपूर्ति नहीं की जा रही है।

प्रतिदिन बड़ी संख्या में ऐसे मरीज आ रहे हैं जिन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है। प्राइवेट अस्पताल में जाने पर ऐसे मरीजों को कोविड सिंपटम्स बताकर सरकारी अस्पतालों में जाने की सलाह दी जा रही है। जिला अस्पताल के कोविड झोन में पहुंचने पर ऐसे मरीजों को ऑक्सीजन तक नहीं मिल पा रही है।

ऑक्सीजन भरपूर है, लेकिन इसके सप्लाई के लिए फ्लो मीटर नहीं है। ऐसे में परिजन अपने लोगों को तड़पते देखते हैं और डॉक्टरों को गुहार लगा रहे हैं।

कहां है बेड, गलियारे में सात मरीज –

बेड कैपेसिटी को लेकर व्यवस्था सुदृढ़ होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जिला अस्पताल के कोविड झोन में हालात अलग ही हैं। टीबी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में 15 बेड की कैपेसिटी है और यहां के सभी बेड फुल हैं।

मंगलवार को बेड फुल होने के बाद भी मरीजों की आमद होती रही। ऐसे में गलियारे में कुर्सियों को जोड़कर बेड बनाए गए। इन बिस्तरों पर मरीजों को ऑक्सीजन लगाई गई। सबसे मुख्य बात यह है कि मरीजों को घबराहट हो रही थी और गलियारे में एक भी पंखा नहीं है।

पोर्च में बीमार बोले भर्ती कर लो हमें –

मंगलवार को शाम को साढ़े पांच बजे के लगभग पोर्च में मीरा बाई नाम की महिला घबराहट के साथ लेटी हुई थी। करीब डेढ़ बजे यह अस्पताल में पहुंची थी। इनके पति इन्हें भर्ती करने और कोविड जांच करने की गुहार लगा रहे थे, लेकिन आइसोलेशन में वार्ड और गलियारे फुल थे।

इधर मेहरबान सिंह निवासी कडोद को परिजन लेकर पहुंचे थे। मेहरबान को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इसे ऑक्सीजन देने के लिए सिलेंडर तो थे, लेकिन फ्लो मीटर नहीं थे। इस दौरान एक भर्ती मरीज की छुट्टी हुई।

मरीज के परिजन फ्लो मीटर खरीदकर लाए थे, जिन्होंने फ्लो मीटर मेहरबान सिंह के परिजनों को दिया। कहा उपयोग करके उन्हें लौटा देना। इसके बाद मेहरबान सिंह को ऑक्सीजन दी गई।

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डॉक्टर डरते हैं ‘अपनों’ से बात करने में –

मंगलवार को इस तरह की स्थिति सामने आने के बाद प्रतिनिधि ने एडीएम सलोनी सिड़ाना (आईएएस) को जानकारी दी। एडीएम ने दिन में ही दौरा किया था जिसके बाद फ्लो मीटर की व्यवस्था की गई थी।

ऐसे में फ्लो मीटर की कमी से मरीजों को ऑक्सीजन नहीं देने की जानकारी के बाद एडीएम ने मौके पर मौजूद डॉक्टरों से प्रतिनिधि के मोबाइल से ऑन स्पीकर चर्चा की।
इस दौरान डॉक्टरों ने कहा कि हमारी बात मत कराओ। हमें नौकरी करने दो। इसके बाद डॉक्टर रवि मौर्य ने कहा कि मैं खुद मैडम को फोन लगाकर स्थिति बता दूंगा।

कुल मिलाकर संविदा नियुक्ति पर तैनात आयुष चिकित्सक काम तो कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों और फील्ड वर्करों में ‘विश्वसनीयता’ का संकट दिखाई दिया। डॉक्टर और स्टाफ को डर है कि खुलकर समस्याओं पर चर्चा की तो संविदा नौकरी चली जाएगी।

रिपोर्ट को लेकर भी लोग परेशान –

आरटीपीसीआर रिपोर्ट को लेकर प्रतिदिन लोग परेशान हो रहे हैं। वहीं सैम्पलिंग के लिए पर्ची बनवाने के बाद सैम्पलिंग की समयावधि समाप्त होने पर लोगों को लौटाया जा रहा है। इसके कारण भी नाराजगी हो रही है।

मंगलवार को इस तरह की अव्यवस्थाओं का शिकार आरएसएस विचाराधारा के आशीष बसु और उनका परिवार हुआ। हालांकि उन्होंने विवाद नहीं किया, लेकिन उन्हें भी सैम्पलिंग का समय खत्म होने का हवाला देकर लौटाया गया। इस मामले की जानकारी के बाद डॉक्टर अनिल वर्मा ने पर्ची लेकर कतार में खड़े लोगों की सैम्पलिंग करवाई।

2 आयुष डॉक्टर नदारद मिले, इलाज के लिए एमडी नहीं –

इस बात में कोई शक नहीं है कि सरकारी अस्पताल नहीं होते तो अब तक हजारों गरीब और मध्यमवर्गीय लोग तड़प कर मर जाते। सरकारी अस्पताल का नि:शुल्क उपचार लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

इन सब स्थितियों के बावजूद उपचार के लिए एमडी मेडिसीन और एमबीबीएस चिकित्सक के ना होने से उपचार व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। अभी संपूर्ण व्यवस्थाएं आयुष विभाग के चिकित्सकों के माध्यम से संचालित की जा रही हैं।

मंगलवार शाम को स्थितियों की जानकारी के बाद एडीएम मौके पर पहुंची तो उन्होंने ड्यूटी डॉक्टरों की जानकारी ली। दो डॉक्टर मौके पर नहीं मिले। हालांकि सहयोगी डॉक्टरों ने कहा कि अचानक पारिवारिक इमरजेंसी आने से घर गए हैं।

बता दें कि कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद गत वर्ष की तरह स्टाफ तो बढ़ा दिया गया है, लेकिन इस मर्तबा संक्रमण बढ़ने का मामला गत वर्ष से कहीं अधिक है। ऐसे में और स्टाफ की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए 5 दिन का कोरोना कर्फ्यू –

दो दिन में 200 मरीज और 7 की मौत के बाद जिला प्रशासन ने धार में पांच दिन का कोरोना कर्फ्यू लगाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय जनप्रतिनिधियों और चिकित्सकों के परामर्श के बाद लिया गया है।

इसके तहत बुधवार 14 अप्रैल को शाम 6 बजे से सोमवार सुबह 6 बजे तक शहर में कोरोना कर्फ्यू रहेगा। इस दौरान आवश्यक वस्तुओं से संबंधित दुकानें खुली रहेगी, लेकिन इनका संचालन भी सांकेतिक होगा।

इधर मंगलवार को करीब 80 कोरोना संक्रमित फिर बढ़े हैं। वहीं दो संक्रमितों की मौत हुई है। इसमें एक जिला अस्पताल में और एक निजी अस्पताल में हुई है।