पार्षदी का सपना पाले AAP की शिव-बारात देख भाजपा-कांग्रेस के दलबदलू भी शर्मा जाएं!


मध्य प्रदेश आम आदमी पार्टी में इस तरह से अन्य दलों से बड़ी संख्या में लोगों का आना और आप पार्टी द्वारा उनका बिना परहेज स्वागत करना संकेत है कि पार्टी नगरीय और जिला स्तर पर मजबूत दावेदार के तौर पर उभर रही है। इसलिए भगवा, कांग्रेसी, बीजेपी और जेडीयू जैसे दलों से जिला और नगर स्तर के कार्यकर्ता उसकी ओर पलायन कर रहे हैं।


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राजनीति Updated On :

आज जब पूरे मीडिया में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं की चर्चा है, वहीं दूसरे दलों में भी पालाबदल की घटनाएं बहुत तेजी से जारी हैं। न केवल कांग्रेस से नेता टूट रहे हैं, बल्कि भाजपा और अन्‍य दलों से भी भाग रहे हैं लेकिन यह सब कुछ नगर और जिला स्तर पर जारी है जहां विधायक बनने की ख्‍वाहिश नहीं है, छोटे-छोटे अरमान हैं। जो इकलौती पार्टी धार्मिक भाव से सबको स्‍वीकार कर रही है, आश्‍चर्यजनक रूप से वह मध्य प्रदेश की आम आदमी पार्टी है।

नगर निकाय चुनावों के मद्देनज़र आम आदमी पार्टी इस काम में पूरी तत्‍परता में लगी हुई है। भाजपा की राह पर चलते हुए बिना किसी वैचारिक भेदभाव के हर वर्ग, दल और विचारधारा के लोगों का अपनी पार्टी में दिल खोलकर स्वागत करने में आम आदमी पार्टी इन दिनों जुटी हुई है।

चाहे वो अंतरराष्ट्रीय भगवा सेना से हों फिर किसी जाति की महासभा से और चाहे वो विश्व हिंदू विकास परिषद के सदस्य ही क्यों न हों, सबका खुले दिल से पार्टी में स्वागत और दाखिला शुरू है! ऐसी खबरें सार्वजनिक करते हुए न तो आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को कोई संकोच हो रहा है न ही राज्‍यस्‍तर के बड़े नेताओं को, जिनका वैचारिक अतीत और पृष्‍ठभूमि सांप्रदायिकता विरोधी रही है।

मध्यप्रदेश में भाजपा के जिला स्तर के छुटभैये नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ कर आम आदमी पार्टी में जा रहे हैं। भाजपा के अलावा कांग्रेस और जनता दल (युनाइटेड) जैसे दलों के नगर और जिलास्तर के कार्यकर्ता भी आम आदमी पार्टी की सदस्यता ले रहे हैं। ज़ाहिर है, इन सब को पार्षद बनना है, विधायक नहीं।

पिछले दिनों भाजपा के सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-संयोजक नितेश पाण्डेय, नगर सह-संयोजक सी.के. सिंह व जिला कार्यालय मंत्री अरविंद राठौर समेत कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। दिलचस्‍प है कि धूर वैचारिक विरोधी लगने वाले भाजपा के लोगों को पार्टी में शामिल करने की सूचना पार्टी के राज्‍य में अध्‍यक्ष पंकज सिंह खुद ट्विटर पर दे रहे हैं, जिनका अतीत एनजीओ का रहा है।

आम आदमी पार्टी में आने वाले नेताओं का उद्देश्य सिर्फ एक है- स्‍थानीय स्‍तर पर सत्ता का लाभ और पहचान। बड़े नेता केंद्रीय स्तर पर पार्टी बदलते हैं, जैसे ज्‍योतिरादित्‍स सिंधिया को लें। उनसे छोटे नेता राज्य स्तर पर पार्टी बदलते हैं, जिसका उदाहरण रोज़ मध्‍य प्रदेश में दिख रहा है। अब केवल संख्‍या गिनना बाकी रह गया है।

सबसे निचले स्तर के नेता जिला स्तर पर दल बदल कर लेते हैं। मीडिया का सारा ध्यान चूंकि केवल राष्ट्रीय और राज्‍य स्तर पर रहता है, तो जमीन पर हो रहे बदलाव पर किसी का ध्यान नहीं जाता।

मध्य प्रदेश आम आदमी पार्टी में इस तरह से अन्य दलों से बड़ी संख्या में लोगों का आना और आप पार्टी द्वारा उनका बिना परहेज स्वागत करना संकेत है कि पार्टी नगरीय और जिला स्तर पर मजबूत दावेदार के तौर पर उभर रही है। इसलिए भगवा, कांग्रेसी, बीजेपी और जेडीयू जैसे दलों से जिला और नगर स्तर के कार्यकर्ता उसकी ओर पलायन कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज सिंह जिन्होंने अन्य दलों से आने वालों का स्वागत करते हुए तस्वीरें लगाई हैं, वे कभी ग्रीनपीस नाम के अंतरराष्‍ट्रीय एनजीओ में काम करते थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बैढ़न की उनकी एक महिला कार्यकर्ता का टिकट काट के उन्‍हें अचानक लोकसभा का टिकट दिया था।

पंकज सिंह, अध्यक्ष, आम आदमी पार्टी, मध्य प्रदेश

ग्रीनपीस जैसी संस्था, जहां अधिकतर आन्दोलन की पृष्‍ठभूमि वाले राजनीतिक रूप से उदारवादी लोग होते हैं, वहां से निकला एक व्यक्ति अगर किसी घोषित भगवा सेना के सदस्‍य को अपनाए तो सवाल उठने लाजिमी हैं। विडम्‍बना यह है कि इस तरह के सवाल न तो दिल्‍ली में उठते हैं, जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है, न ही राज्‍य में जहां पार्टी के कई वरिष्‍ठ चेहरों का आंदोलन से जुड़ाव रहा है।

ऐसे चेहरों में हम मेधा पाटकर के नर्मदा बचाओ आन्दोलन के संयोजक आलोक अग्रवाल को भी गिन सकते हैं और खुद मेधा को भी, जो पार्टी के टिकट पर 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं और जिनके आंदोलन का बेस ही मध्‍य प्रदेश में है। आलोक 2018 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का चेहरा थे।

जल सत्‍याग्रह के दौरान बाबासाहब अंबेडकर को श्रद्धांजलि देती आलोक अग्रवाल की 2015 की एक तस्‍वीर

इन सब के मध्‍य प्रदेश में रहते हुए ज़मीनी स्‍तर पर आम आदमी पार्टी ने सबके लिए दरवाज़े खोल दिए हैं। बिलकुल यही घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में हुआ था जहां पंचायत चुनाव, विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले वाम दलों के सैकड़ों काडरों ने भाजपा की सदस्यता ली थी और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के मुकुल राय सहित पंचायत स्तर के कई नेता भाजपा में शामिल हो गये थे।

मध्यप्रदेश में इस साल के अंत तक या अगले साल के आरम्भ में कभी भी निकाय चुनाव यानी नगर निगम और नगरपालिका के चुनाव हो सकते हैं और आम आदमी पार्टी ने प्रदेश की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। ऐसे में जिला स्तर पर तमाम दलों के कार्यकर्ता अपने लिए मौके की तलाश में वहां जा रहे हैं जहां उनको संभावना नज़र आ रही है।

आम आदमी पार्टी का जन्म भ्रष्‍टाचार विरोधी अन्ना आन्दोलन से हुआ था जिसका सच कुछ दिनों पहले ही वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता प्रशांत भूषण ने सार्वजनिक किया था कि कैसे वह आंदोलन राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ द्वारा समर्थित था। यह बात और पुख्‍ता इसलिए हो जाती है क्‍योंकि पार्टी बनने के बाद काफी बाद तक भूषण उसकी केंद्रीय समिति का हिस्‍सा थे।

प्रशांत भूषण ने यह भी कहा था कि पार्टी के अध्‍यक्ष अरविंद केजरीवाल की जानकारी में यह बात थी कि आरएसएस उनकी पार्टी के साथ है। फिर क्‍या आश्‍चर्य्र कि मध्‍य प्रदेश की आम आदमी पार्टी को किसी से कोई परहेज़ नहीं है और वह हर नए दिन प्रशांत भूषण के कहे को सच साबित करती दिख रही है।



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