सिंधिया से पीछा छुड़ाने की तरकीब में क्या टूटेंगे कुछ और कांग्रेसी विधायक!


भाजपा का यह प्लान दरअसल ज्योतिरादित्य सिंधिया से पीछा छुड़ाने यानी उनके दबाव से बाहर आने की एक तरकीब है। भारतीय जनता पार्टी ज्योतिरादित्य को फिलहाल केवल चुनावी मंचों पर ही महत्व देती नजर आ रही है। पार्टी के प्रचार वाहनों और पोस्टरों से ज्योतिरादित्य गायब हैं। 


देश गांव
राजनीति Updated On :

भोपाल। उपचुनाव में मतदान से ठीक पहले कांग्रेस से एक विधायक का टूटकर भारतीय जनता पार्टी जाना भाजपा का अगला प्लान बताया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि मुमकिन है इसके तहत अगले कुछ दिनों में कुछ और विधायक कांग्रेस से भाजपा में आएं।

इस कदम के बाद टीम शिवराज यह माहौल बनाने में कामयाब भी हो गई है कि कांग्रेस में अभी भी भगदड़ मची हुई है। ज़ाहिर है भाजपा कांग्रेस में अपने द्वारा तोड़-फोड़ की ऐसी किसी भी योजना से इंकार करती है लेकिन केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर रविवार को कह चुके हैं कि भारतीय जनता पार्टी के पास अभी कई प्लान बाकी हैं जिन्हें पूरा करने का जिम्मा अलग-अलग नेताओं को दिया गया है। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस में अब और  विधायकों के जाने की आशंकाएं प्रबल हो चुकी हैं।

अब आने वाले विधायक मार्च में पार्टी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके बाईस विधायकों से अलग होंगे। ख़बरों की मानें तो भाजपा का यह प्लान दरअसल ज्योतिरादित्य सिंधिया से पीछा छुड़ाने यानी उनके दबाव से बाहर आने की एक तरकीब है। भारतीय जनता पार्टी ज्योतिरादित्य को फिलहाल केवल चुनावी मंचों पर ही महत्व देती नजर आ रही है। पार्टी के प्रचार वाहनों और पोस्टरों से ज्योतिरादित्य गायब हैं।

कुछ नेताओं की मानें भाजपा नेताओं को भी लगता है कि गद्दार मुद्दा उपचुनाव में कांग्रेस के पक्ष में कुछ करामात कर सकता है लेकिन प्रदेश भाजपा नेतृत्व को यकीन है कि इसके बावजूद भी वे कम से कम 12-15 सीटें जीतने में सफल होंगे।

जीतने वाले विधायकों में ज्यादातर उन 22 में से होंगे जो सिंधया के साथ आए थे। ऐसे में आने वाली सरकार में फिर सिंधिया का मजबूत हस्तक्षेप रहेगा। यही स्थिति कांग्रेस की सरकार में भी थी। जहां सिंधिया ने अपनी अनदेखी होने पर सरकार गिरा दी थी।

भारतीय जनता पार्टी के नेता अपने साथ ऐसा होने देना नहीं चाहते और यही वजह है कि अब वे कांग्रेस के उन विधायकों को अपने खेमे में ला रही है जो ज्योतिरादित्य सिंधिया के सर्मथकों में नहीं गिने जाते हैं। राहुल सिंह लोधी सहित इस तरह के तीन-चार विधायक फिलहाल पार्टी में शामिल हो चुके हैं। इनकी संख्या जितनी ज्यादा होगी  भाजपा में सिंधिया उतने कमजोर होंगे।

बताया जाता है कि भाजपा नेता ऐसे कुछ और विधायकों के संपर्क में हैं। जो कांग्रेस से टूट सकते हैं। संभव है कि इनके बारे में अगले एक दो दिनों में ही खबरें भी आ जाएं। इस काम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सबसे करीबी लोग लगे हुए हैं।

दमोह के राहुल सिंह को लाने में कैबिनेट मंत्री और शिवराज सिंह के पुराने दोस्त भूपेंद्र सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कमलनाथ सरकार गिराए जाने से ठीक पहले भी भूपेंद्र सिंह एक्टिव हुए थे। उस समय वे दमोह के पथरिया से ही बसपा की विधायक राम बाई परिहार से बातचीत कर रहे थे।

टीम शिवराज अगर ऐसे कुछ और विधायक ले आती है तो एक बार फिर उपचुनाव होंगे। भाजपा के पास ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव से बाहर वाले जितने ज्यादा विधायक होंगे वे शिवराज उतने ज्यादा मजबूत होते जाएंगे।



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