MP: भोपाल गैस कांड की 36 वीं बरसी पर मनाया जा रहा है कॉरपोरेट विरोध दिवस, किसान संघर्ष समिति ने लिखा मोदी को पत्र


यूनियन कार्बाइड के मालिकों को न तो सजा हुई ,न ही सभी गैस पीड़ितों को पूरा मुआवजा मिला । यहां तक कि इलाज तक की व्यवस्था नहीं की गई। दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक हादसे के बाद भी आज तक जहरीले कचरे को तमाम न्यायालय के निर्देशों के बावजूद नहीं हटाया गया है।


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फाइल फोटो


आज जब किसान नेताओं और सरकार के बीच कृषि कानूनों को लेकर चौथे दौर की बातचीत होने जा रही है इसी बीच तमाम किसान और अन्य जनवादी संगठनों किसानों के प्रति अपना समर्थन जाहिर करते हुए पूरे देश में धरना प्रदर्शन करते हुए ‘कॉरपोरेट विरोध  दिवस’ मनाने का एलान किया है। इसी कड़ी में आज मध्यप्रदेश में भोपाल गैस त्रासदी की 36 वीं बरसी के मौके पर किसान संघर्ष समिति , मध्य  प्रदेश की  ओर  से  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसान विरोधी कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर चेतावनी ज्ञापन पत्र लिखा गया है।  


पत्र का मुख्य अंश पढ़िए-

श्री नरेन्द्र मोदी
प्रधानमंत्री
भारत सरकार, नई दिल्ली

विषय:- भोपाल गैस कांड की 36 वीं बरसी पर आयोजित कॉरपोरेट विरोध दिवस के अवसर किसान विरोधी कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर चेतावनी ज्ञापन पत्र।

माननीय महोदय

आप जानते ही हैं कि देश के किसानों द्वारा दिल्ली में 26-27 नवंबर से तीन किसान विरोधी कानूनों को रद्द कराने और बिजली बिल वापस लेने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जा रहा है। पंजाब – हरियाणा – उत्तरप्रदेश के लाखों किसान दिल्ली में
डेरा डाले हुए हैं। सात दिन होने के बावजूद अब तक सरकार द्वारा तीनों कानूनों को रद्द करने एवं बिजली बिल वापस लिए जाने की घोषणा नहीं की है। आपकी सरकार एक तरफ बातचीत कर रही है दूसरी तरफ आपके द्वारा कानूनों के पक्ष में लगातार बयान देकर किसानों को विपक्षियों द्वारा भ्रमित बतलाया जा रहा है।आपके गोदी मीडिया द्वारा किसानों के आंदोलन को खालिस्तानी ,विपक्षी दलों की कठपुतली ,विदेशी पैसों से आंदोलन चलाने वाला बतलाकर
अपमानित किया जा रहा है।

आज 3 दिसंबर को  देशभर में गैस कांड की 36 वीं बरसी के अवसर पर देश के किसान संगठनों द्वारा कारपोरेट विरोध दिवस मनाया जा रहा है।जिसके तहत 5 दिसंबर तक देश भर में 500 किसान संगठनों द्वाराआंदोलनात्मक कार्यवाहियां की जाएंगी।

उल्लेखनीय है कि 2 दिसंबर 1984 की देर रात,3 की सुबह भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड में मिथाइल आइसोसाइनाइट गैस के रिसाव होने से सोलह हज़ार नागरिकों की मौत हुई थी तथा साढ़े पांच लाख नागरिक प्रभावित हुए थे। अब तक मरने वालों की संख्या 30 हजार के ऊपर पहुंच चुकी है। कोरोना के संक्रमण से 254 गैस प्रभावितों की मौत हो चुकी है।

यूनियन कार्बाइड के मालिकों को न तो सजा हुई ,न ही सभी गैस पीड़ितों को पूरा मुआवजा मिला । यहां तक कि इलाज तक की व्यवस्था नहीं की गई। दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक हादसे के बाद भी आज तक जहरीले कचरे को तमाम न्यायालय के निर्देशों के बावजूद नहीं हटाया गया है।

इससे यह पता चलता है कि कारपोरेट मुनाफा कमाने के लिए आम नागरिकों की जान माल की चिंता नहीं करते। उनकी कोई
जबाबदेही नहीं होती।देश के कानूनों का पालन नहीं करते तथा सरकार से गठजोड़ कर बड़े से बड़ा अपराध करने के बावजूद
सरकार और न्याय पालिका को प्रभावित कर देश के कानून की गिरफ्त से बाहर रहते हैं। अब देश देश के किसान भी कॉरपोरेट की गिरफ्त में जाने वाले हैं।

आपके द्वारा जबरजस्ती बनाये गए तीन कृषि कानूनों का मकसद खेती का कार्पोरेटिकरण करना है। हम चाहते हैं कि किसान में खेती करें ।
आप कारपोरेट को खेती सौंपना चाहते हैं। हमारी समझ है कि कानून किसानों की जमीन छीनने के उद्देश्य से लाए गए हैं ताकि किसान, किसानी और गांव खत्म कर कारपोरेट के लिए सस्ते मजदूर उपलब्ध कराया जा सकें।

एक तरफ आप आत्मनिर्भर भारत और किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ कानूनों के माध्यम से आपने कारपोरेट को खेती में असीमित निवेश करने, कृषि उत्पादों की खरीद करने, भंडारण करने, खाद्य प्रसंस्करण करने तथा कृषि उत्पादों की जमाखोरी करने की खुली छूट दे दी है जिससे मंडी व्यवस्था, एमएसपी व्यवस्था, जन वितरण प्रणाली (खाद्य सुरक्षा) खत्म होना तय है।

आपकी सरकार द्वारा कोरोना काल में 68 ,000 करोड़ की छूट कारपोरेट को दी गई। आजादी के बाद अब तक कुल 48 लाख करोड की छूट दी जा चुकी है, दूसरी तरफ किसान गत 4 वर्षों से अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले देश के किसानों की संपूर्ण कर्जा मुक्ति के लिए आंदोलन चला रहे हैं। लेकिन सरकार द्वारा अब तक संपूर्ण कर्जा मुक्ति नहीं की गई है। जिसमें 14 लाख करोड़ खर्च होंगे।
हम खेती के कारपोरेटीकरण  के खिलाफ आंदोलनरत किसानों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने और आपको चेतावनी देने के लिए यह ज्ञापनपत्र सौंप रहे हैं।

किसान सभी कृषि उत्पादों की लागत से डेढ़ गुना मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।आप जानते ही हैं कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति की ओर से हमारे प्रतिनिधियों द्वारा लोकसभा और राज्यसभा में इस आशय का बिल पेश किया जा चुका है।
संसद का विशेष सत्र बुलाकर आप तत्काल किसान विरोधी कानून रद्द करें और किसानों की ओर से प्रस्तावित बिलो को पारित कर कानून बनाएं।

यदि तत्काल किसान विरोधी कानून और बिजली बिल 2020 रद्द नहीं किए गए तो देश भर के किसान भी दिल्ली में डेरा डाले किसानों की तरह हम भी अनिश्चितकालीन आंदोलनात्मक कार्यवाही करने के लिए बाध्य होंगे।

भवदीय

किसान संघर्ष समिति- जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय- अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति -संयुक्त किसान मोर्चा

प्रतिलिपि:-
1 नरेंद्र सिंह तोमर
कृषि मंत्री ,भारत सरकार ,नई दिल्ली

 



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