किसान आंदोलन: सरकार के साथ किसान नेताओं की आज 5वीं बैठक, देशभर में किसानों का प्रदर्शन हुआ तीव्र


किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी, पंजाब के संयुक्त सचिव ने  वार्ता बैठक से पहले कहा कि, आज की बैठक में समाधान निकलने की संभावना है लेकिन जैसे सरकार ने कमियों के साथ बिलों को पारित किया उससे उनकी नीतियों पर आज भी हमें शक है। वो शायद कोई फाॅर्मूला निकालें, लेकिन फाॅर्मूले से बात नहीं बनेगी।


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बड़ी बात Updated On :

आज कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार के साथ बात करने के लिए किसान नेता सिंघु बाॅर्डर से  विज्ञान भवन के लिए  रवाना हो गये। एक किसान नेता ने कहा, “ये कानून रद्द करने चाहिए। अगर आज कोई नतीजा नहीं निकलता तो भारत बंद (8 दिसंबर को) किया जाएगा।”

 

देशभर में किसानों का प्रदर्शन तेज हो गया है और पूरे देश में सरकार और अडानी, अम्बानी का पुतला दहन का आह्वान किया गया है।

इस बीच किसान संयुक्त मोर्चा के प्रधान रामपाल सिंह ने कहा कि, आज आर-पार की लड़ाई करके आएंगे, रोज-रोज बैठक नहीं होगी। आज बैठक में कोई और बात नहीं होगी, कानूनों को रद्द करने के लिए ही बात होगी।

किसान महा पंचायत के प्रेसिडेंट रामपाल जाट ने कहा कि, सरकार तीनों काले कानून रद्द करना चाहिए और एमएसपी के बारे में लिखित में  देना चाहिए, उन्होंने कहा कि यदि आज की बातचीत का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं आता तो राजस्थान किसान दिल्ली मार्च करेंगे और जंतर मंतर पर डेरा डालेंगे।

किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी, पंजाब के संयुक्त सचिव ने  वार्ता बैठक से पहले कहा कि, आज की बैठक में समाधान निकलने की संभावना है लेकिन जैसे सरकार ने कमियों के साथ बिलों को पारित किया उससे उनकी नीतियों पर आज भी हमें शक है। वो शायद कोई फाॅर्मूला निकालें, लेकिन फाॅर्मूले से बात नहीं बनेगी।

गौरतलब है कि,नए कृषि कानूनों के मुद्दे पर किसानों और केंद्र सरकार में टकराव बरकरार है। पांचवें दौर की बातचीत के लिए किसान नेता विज्ञान भवन जा रहे हैं। इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह कैबिनेट के वरिष्‍ठ साथियों को आवास पर बुलाया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि नरेंद्र सिंह तोमर इस मीटिंग में मौजूद रहे। रेल मंत्री पीयूष गोयल भी इसका हिस्‍सा था। मीटिंग के बाद नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, ‘शनिवार को किसानों के साथ दोपहर 2 बजे मीटिंग तय है। मुझे उम्मीद है कि किसान सकारात्मक विचार करेंगे और विरोध प्रदर्शन खत्म करेंगे।’ हालांकि किसान संगठनों के नेता दो-टूक कह रहे हैं कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने से कम कुछ भी मंजूर नहीं होगा।

कृषि कानूनों के खिलाफ टिकरी बाॅर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “सरकार बार-बार तारीख दे रही है, सभी संगठनों ने एकमत से फैसला लिया है कि आज बातचीत का आखिरी दिन है।”

दिल्ली-यूपी बाॅर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान अभी भी डटे हुए हैं। केंद्र सरकार के साथ आज होने वाली बैठक पर एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हमें उम्मीद है कि मसला हल हो जाएगा, सरकार हमारी सुनेगी।”

कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बाॅर्डर पर चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए बाॅर्डर पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात है।

बिहार के गाँधी मैदान में आज कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर आरजेडी नेता तजस्वी यादव ने कहा -“कृषि क़ानून किसान विरोधी हैं, हमारी मांग है कि जो किसान सड़कों पर आंदोलन कर रहें हैं उनकी सभी मांगों को पूरा किया जाए। हम किसानों की मांगों के साथ हैं।”

 

वहीं, तमिलनाडु के सेलम में डीएमके पार्टी के अध्यक्ष एमके स्टालिन के नेतृत्व में कृषि क़ानूनों के खिलाफ प्रदर्शन रैली का आयोजन किया गया। 

एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा, केंद्रीय सरकार की बैठक हो रही है, हमें लगता है कि सरकार को अपना अड़ियल रवैया छोड़ना होगा। किसानों की मांगों को मानना पड़ेगा, किसान क्या चाहता है उसे अनदेखा करना उचित नहीं है। किसान आंदोलन पूरे देश में फैलता जा रहा है इसलिए सरकार जल्द ही उनकी मांगे पूरी करें

बता दें कि, इससे पहले वरिष्ठ वकील और सुप्रीमकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट ने भी किसानों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट में किसानों के लिए कोई भी केस लड़ने का प्रस्ताव दे चुके हैं



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