किसान आंदोलनः झुकने को तैयार नहीं किसान, छह जनवरी को ट्रैक्टर मार्च की तैयारी


बीते साल 26 नवंबर को तीन कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू हुए अपने आंदोलन में पहली बार किसानों ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस की है। जो तीन मुख्‍य घोषणाएं आज किसानों ने की हैं, उनमें 26 जनवरी को समानांतर परेड करने की बात शामिल है।


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दिल्‍ली में डेरा डाले किसानों के बीच बीती रात तीन मौतें हुई हैं। टिकरी बॉर्डर पर एक किसान की ठंड लगने से मौत हो गयी। ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर एक किसान की ठंड से मौत हुई तो एक बुजुर्ग किसान ने खुदकुशी कर ली। इस बीच संयुक्‍त किसान मोर्चा ने प्रेस क्‍लब ऑफ इंडिया में एक प्रेस वार्ता कर के गणतंत्र दिवस पर समानांतर परेड करने का एलान कर दिया और अब तक आंदोलन में शहीद हुए 50 से ज्‍यादा किसानों की मौत के लिए केंद्र की मोदी सरकार को दोषी ठहराया है 

सोमवार को सरकार के साथ किसान संगठनों की बातचीत प्रस्‍तावित है और 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। उससे पहले ही शनिवार दोपहर संयुक्‍त किसान मोर्चा ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर के जिस तरीके से 26 जनवरी तक के अपने कार्यक्रमों की घोषणा की है, उससे समझ में आता है कि परसों की बातचीत से वे किसी नतीजे के निकलने की उम्‍मीद नहीं कर रहे हैं।

बीते साल 26 नवंबर को तीन कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू हुए अपने आंदोलन में पहली बार किसानों ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस की है। जो तीन मुख्‍य घोषणाएं आज किसानों ने की हैं, उनमें 26 जनवरी को समानांतर परेड करने की बात शामिल है। साथ ही देश भर के किसानों से ट्रैक्‍टर लेकर दिल्‍ली आने को कहा गया है और नागरिकों को किसानों की परेड में आमंत्रित किया गया है।

किसान नेता डॉ. दर्शन पाल ने साफ कहा कि अगर 4 जनवरी की बातचीत विफल हो जाती है और 5 जनवरी को कोर्ट से राहत नहीं मिलती है, तो 6 जनवरी को करनाल-पलवल-मानेसर हाइवे पर ट्रैक्‍टर मार्च करेंगे। यह रैली 26 जनवरी की परेड का रिहर्सल होगी। इसके बाद 6 जनवरी से 20 जनवरी के बीच 15 दिन पूरे देश में भंडाफोड़ अभियान चलेगा और किसान मार्च करेंगे। 23 जनवरी को राजभवनों की ओर किसानों को मार्च का कॉल दिया गया है।

दिल्‍ली के इर्द-गिर्द जितने भी शहर हैं, उन्‍हें 25 जनवरी तक दिल्‍ली बुलाया गया है। अगले दिन 26 जनवरी को ट्रैक्‍टर और वाहन मार्च राज्‍य की राजधानियों और जिला मुख्‍यालयों में निकाला जाएगा।

देर रात टिकरी बॉर्डर पर कैथल के 60 वर्षीय बुजुर्ग किसान राम कुमार (60) और गाज़ीपुर बॉर्डर पर 57 वर्षीय किसान गलतान सिंह की मौत हुई। राम कुमार को ब्रेन हैमरेज बताया जा रहा है जबकि गलतान सिंह को ठंड के मारे छाती में दर्द हुआ था।

गा़जीपुर बॉर्डर पर ही बिलासपुर, रामपुर के किसान कश्‍मीर सिंह ने शुक्रवार राम खुदकुशी की है। वे एक चिट्ठी छोड़ गये हैं जिसमें उन्‍होंने अपनी मौत के लिए नरेंद्र मोदी को दोषी ठहराया है। इनका जिक्र प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में अशोक धावले और अभिमन्‍यु कोहाड़ ने करते हुए कहा कि अब तक करीब 55 किसान आंदोलन में शहीद हो चुके हैं।

अंत में डॉ. दर्शन ने बताया कि अडानी और अम्‍बानी का बहिष्‍कार पहले की तरह जारी रहेगा और देश भर भाजपा के नेताओं का भी बहिष्‍कार जारी रहेगा।

साभारः जनपथ



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