किसान आंदोलनः एक और किसान का सुसाइड, लिखा- समाधान निकले, इसलिए जान दे रहा हूं


केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर 38 दिन से किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। वहीं, गाजीपुर बॉर्डर पर शनिवार को 75 साल के एक किसान कश्मीर सिंह ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।


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नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर 38 दिन से किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। वहीं, गाजीपुर बॉर्डर पर शनिवार को 75 साल के एक किसान कश्मीर सिंह ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।

किसान कश्मीर सिंह ने सुसाइड से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि वे इसलिए अपनी जान दे रहे हैं ताकि किसानों की समस्या को लेकर समाधान निकले।

किसान कश्मीर सिंह ने सुसाइड नोट में लिखा है- ‘सरकार फेल हो गई है। आखिर हम यहां कब तक बैठे रहेंगे। सरकार सुन नहीं रही है, इसलिए मैं जान देकर जा रहा हूं। अंतिम संस्कार मेरे बच्चों के हाथों दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर होना चाहिए। मेरा परिवार, बेटा-पोता यहीं आंदोलन में निरंतर सेवा कर रहे हैं।’

यूपी पुलिस ने किसान का शव बिना पोस्टमॉर्टम के परिजन को सौंप दिया है और किसान का सुसाइड नोट अपने कब्जे में ले लिया है। वहीं, किसान नेता अशोक धवाले ने बताया कि अब तक 50 किसानों की जान जा चुकी है।

दूसरी तरफ, देर रात टिकरी बॉर्डर पर कैथल के 60 वर्षीय बुजुर्ग किसान राम कुमार और गाज़ीपुर बॉर्डर पर 57 वर्षीय किसान गलतान सिंह की मौत हुई। राम कुमार को ब्रेन हैमरेज बताया जा रहा है जबकि गलतान सिंह को ठंड लगने की वजह से छाती में दर्द हुआ था।



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