महालक्ष्मी नगर स्टाम्प शुल्क क्षति व बंधक प्लॉट बिक्री मामले में 16 लोगों के खिलाफ एफआईआर के आदेश


– कलेक्टर न्यायालय ने दिया फैसला, उच्च न्यायालय में पारित आदेश के तहत प्रकरण निपटान के तहत हुई कार्रवाई।
– पूर्व नपा सीएमओ सहित उप पंजीयक कार्यालय के कर्मियों पर भी विभाग को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए लिखा।
– आदेश के बाद कोतवाली पुलिस एफआईआर की प्रक्रिया में जुटी, आरोपियों पर कॉलोनी एक्ट के उल्लंघन का भी मामला।


आशीष यादव आशीष यादव
धार Published On :
dhar land scam updated

धार। भू व्यवसाय से जुड़े 16 लोगों के खिलाफ कलेक्टर न्यायालय ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने कॉलोनी विकास पेटे बंधक रखे प्लॉटों को बेचा और विकास से संबंधित कार्य भी पूर्ण नहीं किए।

इसके अतिरिक्त सौदे पेटे जो दस्तावेज बनाए गए हैं उसमें स्टाम्प शुल्क की सरकार को क्षति भी पहुंचाई गई है। एफआईआर दर्ज करने के आदेश पुलिस विभाग को भेज दिए हैं। शीघ्र ही प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर न्यायालय ने यह कार्रवाई उच्च न्यायालय में श्रीनाथ बिल्डर्स एवं डेवलपर्स द्वारा मप्र शासन के विरुद्ध दायर रीट पिटीशन में न्यायालय द्वारा अप्रैल 2022 में पारित आदेश के तहत दिए गए निर्देशों के परिपालन में की है।

न्यायालय ने आवेदक द्वारा प्रस्तुत 24 मार्च 2014 के आवेदन पत्र पर दो माह में सुनवाई के लिए लिखा था।

सीएमओ के आदेश को बनाया आधार –

उच्च न्यायालय के आदेश के तहत मामले की सुनवाई की गई थी जिसमें श्रीनाथ बिल्डर्स एवं डेवलपर्स द्वारा वर्ष 2015 में धार में पदस्थ नगरपालिका सीएमओ आधार सिंह द्वारा जारी आदेश की छायाप्रति प्रस्तुत की गई।

इसमें सीएमओ ने बंधक प्लॉटों को रिलीज करने के लिए आदेश जारी किए थे। इस मामले में सीएमओ ने अपने प्रस्तुत जवाब में इस तरह के आदेश के लिए निकाय को अधिकृत ना बताते हुए आदेश को महज अनुविभागीय अधिकारी द्वारा मांगी गई जांच रिपोर्ट के तहत प्रस्तुत कार्रवाई बताया।

वहीं संपूर्ण जिम्मेदारी कॉलोनी में विकास कार्यों की जांच करने वाले इंजीनियर एवं अन्य लोगों पर डाल दी थी। इस मामले में तत्कालीन सीएमओ रहे आधार सिंह पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भी आदेश में उल्लेख किया गया है।

वर्तमान में आधार सिंह देवास में बतौर सीएमओ पदस्थ हैं। आदेश में उल्लेखित किया है कि कॉलोनाइजर के साथ होकर सीएमओ ने आदेश जारी किए थे।

विकास कार्य भी अपूर्ण –

जानकारी के अनुसार बंधक प्लॉटों को विक्रय करने के साथ कॉलोनी के 5 बगीचों में विकास कार्य भी अपूर्ण होना पाया गया है। इसके अतिरिक्त कमजोर आय वर्ग के लिए आरक्षित भूखंडों पर भी जी-प्लस के तहत कार्य नहीं करवाया गया है।

जांच के दौरान तमाम तरह की गलतियां पाई गई हैं। बड़े भूखंडों को खंड-खंड में अन्य लोगों के नाम विक्रय पत्र भी किया गया है। इधर कॉलोनी से संबंधित अनुबंधों को रजिस्टर्ड कराने में स्टाम्प शुल्क की क्षति भी पाई गई है।

इस मामले में उप पंजीयक कार्यालय के तत्कालीन उप पंजीयक धार राजेन्द्र मंडलोई, रेखा किराडे, भास्कर राव खानविलकर के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक वाणिज्यिक कर विभाग मप्र शासन भोपाल को लिखा गया है।

जांच में पाया गया कि 165(6) की अनुमति आदेश का अवलोकन किए बिना भूखंडों के पंजीयन करके नियमों का उल्लंघन किया गया है।

इन पर होगा प्रकरण दर्ज –

कालोनाईजर मेसर्स श्रीनाथ बिल्डर्स एवं डेवलपर्स तर्फे भागीदार विश्वास जोशी, विभित जोशी, संजय अग्रवाल, अनुज तिवारी, प्रणय तिवारी, मुर्तजा सैफुद्दीन, सैफुद्दीन पिता अब्देअली, कुसमलता जैन, लक्ष्मी राजेन्द्र जैन, रेखा हिरवानी, पूनम हिरवानी, लक्ष्मीबाई कन्हैयालाल, दिलीप, कमलेश, रविन्द्र एवं विष्णु पर एफआईआर के लिए 17 जून शुक्रवार को आदेश किए गए हैं।

तिवारी अस्पताल में भर्ती –

पुलिस को जिन लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई के लिए लिखा गया है, उनमें से एक आरोपी अनुज उर्फ भोला तिवारी पहले से ही दो मामलों में बेल खारिज होने के बाद जेल में बंद है।

कुछ दिनों पूर्व ही स्वास्थ्य खराब होने के चलते उसे जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। 11 आरोपियों में तिवारी के भाई का नाम भी शामिल है। रविवार शाम तक कोतवाली पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज करने की कोई पुष्टि नहीं हुई।