रैपिड किट खत्म होने से भर्ती मरीजों की नहीं हुई सैम्पलिंग, कोविड संदिग्ध मानकर 5 का अंतिम संस्कार


– काम ज्यादा स्टाफ कम, विभागीय समन्वय की भी कमी
– निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद भी ऑक्सीजन लगे मरीज जनरल वार्ड में नहीं हो पा रहे शिफ्ट।
– अपनों की फिक्र में जान जोखिम में डालकर आइसोलेशन वार्ड में बैठे परिजनों को सख्ती के साथ बाहर निकाला।
– डॉक्टर ने कहा, इनके ठीक होने के बाद तुमको भर्ती होना है क्या।


आशीष यादव आशीष यादव
धार Published On :
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धार। मुख्यालय के कोविड झोन में पिछले तीन दिनों से रैपिड किट नहीं होने के कारण भर्ती मरीजों की सैम्पलिंग नहीं हो पा रही है। रिपोर्ट को लेकर लोग परेशान हो रहे हैं। इधर सोमवार को बगैर सैम्पलिंग भर्ती करीब 5 मरीजों की मौत हो गई।

कोविड संदिग्ध मानकर इनका अंतिम संस्कार करवाया गया। वहीं शहर के निजी अस्पतालों में पांच मौतें दर्ज की गई हैं। प्रतिदिन ऑक्सीजन लेवल कम होने की दिक्कत के चलते मरीजों के अस्पताल आने का सिलसिला लगातार जारी है।

जिला अस्पताल के कोविड झोन में कई ऐसे मरीज हैं जिनकी हालत बेहद गंभीर है। इस तरह की स्थिति सामने आने के बाद सोमवार को 25 रैपिड किट पहुंचाई गई है।
रैपिड टेस्ट सिर्फ अस्पतालों में भर्ती मरीजों की त्वरित कोरोना स्थिति जानने के लिए की गई थी, लेकिन आम लोगों की रैपिड टेस्टिंग से किट की खपत बढ़ गई। नतीजे में इसका असर भर्ती मरीजों की जांच पर पड़ा है।

स्टाफ की कमी, समन्वय भी नहीं –

जिला अस्पताल में सबसे बड़ी समस्या ऑक्सीजन का निदान तो हो गया है, लेकिन अब स्टाफ की कमी और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों में तालमेल के अभाव ने अव्यवस्थाएं बढ़ा दी हैं।

कोविड झोन में सिर्फ दो ही व्यवस्था बेहतर चल रही है। एक ऑक्सीजन आपूर्ति और दूसरी आरटीपीसीआर टेस्टिंग की। इसके अतिरिक्त आईसीयू एवं आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों को देखने वाला कोई नहीं है।

सोमवार को महामारी नियंत्रण अधिकारी डॉ. संजय भंडारी के समक्ष मरीजों के परिजनों ने पीड़ा बताई। इसी दौरान डीसीएचसी में भर्ती मरीज बाबुलाल का ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गया था।

उन्होंने बेटे को फोन लगाया जिसके बाद बेटे ने नर्स को सिलेंडर बदलने के लिए कहा। कई मरीज बिस्तर से उठकर शौचालय तक नहीं जा पा रहे है। ऐसे लोगों को शौचालय तक ले जाने के लिए कर्मी ही नहीं है। कोविड झोन में लगातार लोड बढ़ रहा है, लेकिन स्टाफ की कमी है।

सैनिटाइजेशन तो दूर बेडशीट भी नहीं बदल रहे –

कोविड झोन में मेडिकल स्टाफ पूरी शिद्दत के साथ काम में जुटा है, लेकिन अनेकों ऐसे काम हैं जहां पर मेडिकल स्टाफ के साथ फील्ड वर्क के स्टाफ की अधिक आवश्यकता है। हालात यह हैं कि संक्रमितों के वार्ड में सैनिटाइजेशन तो दूर बेडशीट तक नहीं बदली जा रही है।

परिसर में मौजूद मरीजों के परिजन उनकी देखरेख कर रहे हैं। अस्पताल से मरीजों को भोजन मिलने के बावजूद परिजन घर से पौष्टिक भोजन लाकर खिला रहे हैं। आइसोलेशन वार्ड में परिजनों की संख्या बढ़ने के बाद सोमवार को सख्ती दिखाई गई।

डॉ. भंडारी ने आइसोलेशन वार्ड से लोगों को खदेड़ने के लिए लाठी का सहारा लिया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पॉजिटिव को हम देख रहे हैं। आइसोलेशन में आकर परिजन कोरोना कैरियर का रोल अदा ना करें।

इकलौते बेटे की कोरोना से मौत, सदमे में पिता का निधन –

कोविड संक्रमण हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहा है। शहर के निजी अस्पताल में रविवार रात को एक युवा की कोविड संक्रमण से मौत हो गई। शिवविहार निवासी जैन परिवार के इकलौते बेटे की मौत के खबर के बाद पिता की सदमे से मौत हो गई। परिवार में चार सदस्य थे। दोनों पुरुषों की मौत के बाद मां और बेटी अकेले रह गए हैं।

बीमारों को परिजन खिला रहे हैं कोरोनिल –

कोविड झोन में भर्ती मरीजों को ठीक करने के लिए ऐलोपैथिक दवाइयां दी जा रही हैं। वहीं परिजन अपनी ओर से भी बेहतर से बेहतर दवाइयां दे रहे हैं। कोई होम्योपैथिक दवाई का भी उपयोग कर रहा है तो किसी मरीज को परिजन आयुर्वेदिक दवाइयां खिला रहे हैं।

आईसीयू वार्ड में भर्ती एक वृद्ध को उनके बच्चे पतंजलि की कोरोनिल दवाई भी खिला रहे हैं। उनका विश्वास है कि भले ही सरकार ने इसे सहमति ना दी हो, लेकिन यह दवाई उनके बुजुर्ग को ठीक करने में मददगार साबित होगा।

अनुमति लेने की जद्दोजहद में भूले फिजिकल डिस्टेंसिंग –

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अनुभाग क्षेत्र (राजस्व धार) के अंतर्गत अगले सप्ताह करीब 100 से अधिक शादियां होने वाली है। इनमें कई ऐसे विवाह आयोजन हैं जो पिछले वर्ष भी कोविड लॉकडाउन के कारण नहीं हो पाए थे।

इस मर्तबा कोरोना का लॉकडाउन तो नहीं कर्फ्यू घोषित है। ऐसे में कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए विवाह समारोह आयोजित करने को लेकर अनुमतियां ली जा रही हैं।

अनुमति लेने की जद्दोजहद में लोग कोरोना की फिक्र भूलकर फिजिकल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सोमवार को एसडीएम कार्यालय में अनुमति के लिए आवेदन करने वाले लोग अनुमति लेने के लिए इस तरह जुटे कि फिजिकल डिस्टेंसिंग भूल गए।