खतरे में पचास करोड़ का घोटाला खोलने वाले चावल!


इन्दौर Updated On :

 

इंदौर। महू तहसील में सामने आए चावल घोटाले के बाद जांच जारी है। मामला करोड़ों का है तो अब आर्थिक अपराध शाखा भी इस जांच में शामिल हो चुका है। संभव है कि यह जांच लंबी चले और इस बीच चावल नष्ट हो जाए। मंडी के जिन गोदामों में चावल रखा गया है वहां इसकी देखभाल की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है और मंडी कर्मचारियों को डर है कि अगर चावल इसी तरह पड़ा रहा तो कुछ महीनों बाद शायद वह खराब होने लगे।

राशन घोटाले में तीन स्थानों से चावल जब्त किए गए थे। इनमें सबसे बड़ी मात्रा महू मंडी परिसर में आरोपित मोहन अग्रवाल की संस्था कैलामाता सोसायटी के गोदाम से मिला था। यहां करीब 471 क्विंटल चावल मिला था। इसी तरह मंडी परिसर के ही एक अन्य गोदाम में जो कि आरोपित लोकेश अग्रवाल ने किराये पर ले रखा था उसमें 43 क्विंटल चावल मिला था। इसके अलावा 75 क्विंटल चावल एक एक निजी गोदाम में मिला था। जो अशोक चौहान नाम के व्यक्ति का है। बताया जाता है कि आयुष अग्रवाल ने इसे यहां रखवाया था।

जब्त चावल 900 लूज पैकिंग बोरियों में बंद है। यानी बोरियां मशीन से अच्छी तरह बंद नहीं की गई हैं। चावल की ये बोरियां जब्ती के बाद अब महू मंडी की सुपुर्गदी में ही परिसर के दो गोदामों में सीलबंद रखी हुईं हैं। मंडीकर्मी इनका ध्यान केवल शटर के बाहर से ही रख पा रहे हैं। सचिव संतोष मंडरे बताते हैं कि चूहे मारने के लिए दवाएं डाल दी गई हैं लेकिन अनाज से उन्हें दूर रखना भी मुश्किल है। कर्मियों को डर है कि मौसम में बदलाव और लूज पैकिंग चावल को प्रभावित करेगा और जल्दी ही यह खराब होने लगेगा और अगर मामला लंबा चला तो चावल पाउडर की तरह बाहर आएगा।

एक्सपर्ट व्यू— महू बार काउंसिंल के अध्यक्ष एड. रवि आर्य के मुताबिक चावल को खराब होने योग्य खाद्य पदार्थ है। ऐसे में सही तौल के बाद इसके नमूने लेकर इसका उपयोग किया जा सकता है क्योंकि संभव है कि यह मामला काफी दिनों तक चले।