कलेक्टर मनीष सिंह अपनी नाकामी और संक्रमण से मौत का आंकड़ा छुपा रहे हैं डॉ. पूर्णिमा गरड़िया


एक दिन पहले इस्तीफ़ा देने वाली डॉ. गरड़िया ने कलेक्टर मनीष सिंह पर लगाए कई आरोप, कहा- अपनी नाकामी छिपा रहे और दोष स्वास्थ्य विभाग के सिर मढ़ रहे हैं।


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इन्दौर Updated On :

इंदौर। कलेक्टर मनीष सिंह को अपने इस्तीफ़ा का कारण बताने वाली डॉ. पूर्णिमा गरड़िया अब प्रशासन की पोल लगातार खोल रहीं हैं। डॉ. गरड़िया ने कलेक्टर के बारे में कहा है कि प्रशासन स्वास्थ्य विभाग को कठपुतली समझता है और लगातार काम करने का दबाव बना रहा है। डॉ. गड़रिया ने आरोप लगाया कि प्रशासन मौत का आंकड़ा छुपा रहा है।

डॉ. गरड़िया ने कहा कि कलेक्टर समझते हैं कि केवल उन्हें ही काम आता है लेकिन ऐसा नहीं है, हमने भी मेहनत करके पढ़ाई की है, तभी तो नौकरी लगी है। कलेक्टर ऑफिस बंद है और लोग परेशान हो रहे हैं।

लोगों के परिवार उजड़ गए और आप दो-दो घंटे मीटिंग में समय खराब कर रहे हैं। राधा स्वामी आश्रम पर ही फोकस किया जा रहा है, जबकि ऑक्सीजन प्लांट लगाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि कलेक्टर मनीष सिंह लगातार रोजाना काम के लिए दबाव बना रहे थे। राधा स्वामी सत्संग आश्रम में अस्थाई नर्सों की नियुक्ति के लिए रोजाना दबाव बना रहे हैं।

जिला प्रशासन के अधिकारी कमरों में बैठकर केवल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को ऑर्डर दे रहे हैं। जिला प्रशासन का काम है कि वह ऑक्सीजन की व्यवस्था करे, लगातार हो रही मौतों पर नियंत्रण करे, लेकिन कलेक्टर हमेशा स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार ठहराते हैं और खुद कुछ नहीं कर रहे।

एक दिन पहले ही इस्तीफ़ा देने वाली डॉ. गरड़िया यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने कहा कि दरअसल कलेक्टर अपनी असफलता छुपा रहे हैं और सारा दोष स्वास्थ्य विभाग के सिर मढ़ रहे हैं जबकि सभी को पता है कि स्वास्थ्य विभाग में लोगों की कमी है और ऐसे में बहुत सी व्यवस्थाएं नहीं हो पातीं। लेकिन, यह बात प्रशासन को समझनी चाहिए। प्रशासन को स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों की परेशानी भी समझनी चाहिए क्योंकि वे सबसे अगली कतार के लोग हैं जो फिलहाल संक्रमितों से मिल रहे हैं, वे भी बिना पूरे संसाधनों के साथ।

स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि पूरा विभाग यदि मेरे साथ खड़ा हो गया, तो आप क्या कर लेंगे। कलेक्टर ऑफिस लंबे समय से बंद है। लोग परेशान हो रहे हैं। इंजेक्शन की सप्लाई नहीं हो रही है। यह लापरवाही नहीं तो फिर क्या है।

शहर में अस्पतालों के अंदर कई तरह की विकट स्थिति भी है। कई पीड़ित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फोन लगाकर परेशानी बताते हैं, लेकिन प्रशासन के अधिकारी अपने फोन बंद करके घरों में बैठे रहते हैं।

डॉ. गरड़िया  ने कहा कि प्रशासन अपना सारा ध्यान केवल राधा स्वामी कोविड सेंटर पर लगा रहा है। जहां करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं लेकिन अस्पतालों में सुविधाओं की कमी से लोग मर रहे हैं वह प्रशासन को नज़र नहीं आ रहा है।

प्रशासन ने करोड़ों रुपये खर्चा करके राधा स्वामी सत्संग सेंटर को बनाया है। 4.50 करोड़ की फाइल अभी भी राधा स्वामी सत्संग की पास होना बाकी है जबकि ऑक्सीजन प्लांट के लिए भी काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मीडिया अंदर जाकर देखे तो समझेगा, लेकिन उसकी अनुमति नहीं है।