दिन-रात भर जल रहीं चिताएं, महू के हाल इंदौर से ज़्यादा त्रासद


महू के हालात इंदौर से ज़्यादा ख़राब हैं। यहां इंदौर से ज्यादा मौतें संक्रमण से दर्ज की जा रही हैं। आलम ये है कि श्मशान को भी आराम नहीं है।


अरूण सोलंकी अरूण सोलंकी
इन्दौर Updated On :

इंदौर। महू तहसील में  संक्रमण से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। गूजरखेड़ा  के मुक्तिधाम पर बुधवार को रात नौ बजे तक बीस शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका था जबकि तीन और शवों के आने की सूचना थी।

ऐसे में श्मशान के व्यवस्थापक परेशान थे क्योंकि हिन्दू  धर्म की मान्यता के अनुसार शाम को दाह नहीं किया जाता।

महू तहसील में संक्रमण की स्थिति भयावह होती जा रही है। बुधवार को यहां 188 नए संक्रमित आए और आठ लोगों की मौत का औपचारिक आकड़ा जारी किया गया।

इसके साथ ही तहसील में संकमितों की संख्या साढ़े छह हजार के पार पहुंच चुकी है तो वहीं अब मरने वालों की संख्या भी दिनों दिन बढ़ती जा रही है।

मंगलवार को जहां महू के मुक्तिधाम पर सत्रह शवों का अंतिम संस्कार किया गया था तो बुधवार को यह संख्या तेईस तक गई।
जानकारी के अनुसार इन बीस शवों में सत्रह शव संक्रमण के शिकार थे। बुधवार को यह स्थिति थी कि रात नौ बजे तक अंधेरे में शवों अंतिम संस्कार किया जा रहा था।
यहां के संचालक मनीष शर्मा ने बताया कि रात नौ बजे तक बीस शवों के अंतिम संस्कार के बाद  भी  तीन और शवों को लाने की सूचना दी गई थी जबकि हिन्दू धर्म के रिति रिवाज के अनुसार सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता।
शर्मा के अनुसार बुधवार को देर रात तक अंतिम संस्कार अब नहीं किया जा सकता। अब शाम सात बजे तक ही शवों को यहां लाया जाएं तो उचित होगा।
अंतिम संस्कार के लिए  बाहर परिसर में व्यवस्था करना एक बड़ी समस्या है। जिसमें सबसे बड़ी परेशानी बाहर पर्याप्त बिजली व्यवस्था का न होना है। इसके अलावा कई तरह की परेशानियां सामने आती हैं।



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