इंदौरः करोना से लड़ने के लिए एमपी की मंत्री बता रहीं वैदिक उपाय


मंत्री ठाकुर ने कोविड-19 को लेकर ऐसे उपाय बताए हैं, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। मंत्री उषा ठाकुर ने इसके लिए बकायदा भिंड सीएमओ प्रियव्रत यादव का उदाहरण भी दिया।


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इंदौर। शहर में रविवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर महिला पत्रकारों सहित समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में विश्वास के साथ सफलता के मार्ग को प्रशस्त करने वाली महिलाओं का इंदौर प्रेस क्लब में सम्मान किया गया। इस अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश की संस्कृति और अध्यात्म मंत्री उषा ठाकुर मौजूद रहीं।

इस दौरान मंत्री ठाकुर ने कोविड-19 को लेकर ऐसे उपाय बताए हैं, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। मंत्री उषा ठाकुर ने इसके लिए बकायदा भिंड सीएमओ प्रियव्रत यादव का उदाहरण भी दिया।

अपने बयानों को लेकर हमेशा मीडिया की सुर्खियों में रहने वाली मंत्री उषा ठाकुर ने इंदौर में कहा कि पत्रकार साथियों ने भी मेरी बातों को ठीक प्रकार से सुनकर ठीक ही प्रसारित किया है।

उन्होंने कोविड-19 को अजातशत्रु बताते हुए कहा कि इसके आने के बाद इसकी किसी को कोई जानकारी नहीं थी। सब अपने से ही भरसक कोशिश करते हैं कि इस कष्ट से कैसे उबरा जाए।

उन्होंने कहा कि एलोपैथी की अपनी भूमिका है, लेकिन अपनी वैदिक दिनचर्या की भी अपनी भूमिका है। उन्होंने दावा किया कि यदि सूर्योदय और सूर्यास्त के वक्त गाय के गोबर के कंडे पर गाय के घी में अक्षत मिलाकर रखें और सूर्योदय-सूर्यास्त के वक्त दो आहुति डालें तो आप यकीन मानिये आपका घर 12 घंटे तक सैनिटाइज रहने वाला है।

उन्होंने कहा कि ये मनगढ़ंत बात नहीं है। ये विज्ञान है और ये सिद्ध हो चुका है। उन्होंने भिंड के सीएमओ प्रियव्रत यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि जो बीमार हुआ और दादाजी ने हॉस्पिटल नहीं जाने दिया। उनके दादा ने पुराने घरेलू नुस्खों से उसे ठीक किया और सात दिन बाद उसकी जीभ का स्वाद भी लौटा और उसकी सूंघने की क्षमता भी यथावत बरकरार रखी।

इसी वैदिक जीवन पद्धति को आपने विस्मृत किया और पाश्चात्य जीवन की दौड़ में लगकर आज बहुत कम घरों में संध्या आरती होते हुए दिखती है। ये विज्ञान है कि जब भगवान सूर्य अस्त होंगे और उदय होंगे तो गुरुत्वाकर्षण शक्ति 20 गुना तक बढ़ती है और शाम को ऑक्सीजन कम होता है। उस समय भीजब ऑक्सीजन की मात्रा प्रचुर मात्रा में चाहिए तो घी की दो आहुतियां उस प्रचुरता को सम्पूर्ण पर्यावरण में व्याप्त करती हैं।

ये दो आहुतियां घर को सैनिटाइज रखने वाली हैं और आप जिस मत-पंथ के मानने वाले हों उसकी प्रार्थना को बच्चों को अवश्य पढ़वाएं और याद करवायें और उनकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनायें। उन्होंने कहा कि प्रार्थना व्यक्ति के आत्मबल को बढ़ाती है और जीवन के किसी दोराहे पर वो संकट के समय खड़े होंगे तो ये कंठस्थ प्रार्थनाएं उन्हें सदमार्ग की ओर ले जाने के लिए प्रेरित करेंगी। वो सकारात्मक ऊर्जा से भरे होंगे।

मंत्री उषा ठाकुर ने बताया कि कोविड-19 के इस दौर में देखा कि आदमी बीमारी से नहीं अवसाद से ज्यादा पीड़ित होकर तकलीफ में आया है और इस अवसाद से निकालने का कोई रास्ता है तो वो वैदिक जीवन पद्धति है।

कुल मिलाकर इंदौर में मंत्री उषा ठाकुर ने वैदिक जीवन पद्धति और उसमें समाहित अंशों के साथ ये बताया कि भले ही समूचे विश्वास के कई देश कोरोना से एक तरह से हार मान चुके हैं लेकिन वैदिक जीवन पद्धति की शक्ति आज कोविड-19 को मात देने में सक्षम है। फिलहाल, मंत्री के इन दावों ने अब एक नई बहस को जन्म दे दिया है जिस पर सवाल भी उठेंगे।