झाबुआः आदिवासी किसानों ने भी किया ‘भारत बंद’ का समर्थन, जिले में यूरिया की कालाबाजारी का लगाया आरोप


झाबुआ किसान यूनियन संघ के अध्यक्ष महेंद्र हामण ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इन नये कानूनों में बहुत कमियां हैं और इनमें बहुत संशोधन की जरुरत है। इस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीते कई हप्तों से किसान दिल्ली बॉर्डर पर बैठे हुए हैं, सरकार उनकी बात क्यों नहीं सुन रही है। जबकि किसान इस देश की रीढ़ हैं। सरकार को एमएसपी पर वादा करने पर क्या दिक्कत है।


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इन्दौर Updated On :
किसान आन्दोलन की एक तस्वीर


मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के आदिवासी किसान भी अब केंद्र सरकार के नये कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। यहां के किसान संघ नेताओं ने प्रेस कान्फ्रेंस बुलाकर कहा कि झाबुआ में यूरिया की काला बाजारी हो रही है और किसानों को प्रयाप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो रहा है।

झाबुआ किसान यूनियन संघ के अध्यक्ष महेंद्र हामण ने मीडिया से बात करते हुए

झाबुआ किसान यूनियन संघ के अध्यक्ष महेंद्र हामण ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इन नये कानूनों में बहुत कमियां हैं और इनमें बहुत संशोधन की जरुरत है। इस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीते कई हप्तों से किसान दिल्ली बॉर्डर पर बैठे हुए हैं, सरकार उनकी बात क्यों नहीं सुन रही है। जबकि किसान इस देश की रीढ़ हैं। सरकार को एमएसपी पर वादा करने पर क्या दिक्कत है।

झाबुआ किसान यूनियन संघ ने 8 दिसंबर के भारत बंद का समर्थन किया है।

यह पहलीबार है जब बीते 12 दिनों से चल रहे  विरोध प्रदर्शन के बीच पहलीबार मध्यप्रदेश के किसी आदिवासी क्षेत्र के किसानों ने इन कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन को समर्थन देने की बात कही हो।



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