सचिव हफ्ते में दो दिन ग्राम पंचायत में नहीं बैठे तो जिला और जनपद सीईओ पर भी होगी कार्रवाई


इस व्यवस्था के बीच पंचायत सचिवों की परेशानियों को भी समझना जरुरी होगा। मध्यप्रदेश में पंचायत सचिवों के काफी अधिक जिम्मेदारियां दी गई हैं और ग्राम पंचायत में सरपंच और आमजनों से लेकर जनपद पंचायत और जिला पंचायत के सीईओ तथा दूसरे अधिकारी तक का दबाव उन्हें झेलना होता है। 


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महेंद्र सिंह सिसौदिया, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री


भोपाल। पंचायत स्तर पर व्यवस्थाएं सुधारने के लिए अब शासन स्तर पर काम शुरु हो रहा है। इसके लिए अब पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया ने मोर्चा संभाला है।

सिसौदिया ने पंचायत स्तर पर शासन के द्वारा लागू की गईं व्यवस्थाएं लागू करने के लिए पंचायत सचिवों और रोजगार सहायकों को सप्ताह में दो बार सोमवार और गुरुवार अपनी ग्राम पंचायत में बैठने को कहा है ताकि ग्रामीणजनों के ग्राम पंचायत कार्यालय संबंधी कामकाज में दिक्कत न आए।

इस नए नियम के तहत पंचायत सचिवों और रोजगार सहायकों से लेकर जनपद और जिला पंचायत सीईओ तक पर कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। मंत्री सिसौदिया ने जनपद पंचायत के कार्यपालन अधिकारियों को इस व्यवस्था की निगरानी के लिए कहा है।

उन्होंने कहा है कि

सभी सचिव व रोजगार सहायक ग्राम पंचायत मुख्यालय में रहकर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को देवे जानकारी के अभाव में ग्रामीण जन योजनाओं का लाभ होने से वंचित रह जाते है वे वहां उपस्थित रहकर उनके आवेदन आदि प्राप्त करें।

सिसौदिया ने चेतावनी दी है कि अगर इस निर्देश का पालन नहीं होता है तो वे ऐसी स्थिति में जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत के सीईओ की भी जिम्मेदारी मानी जाएगी और पंचायत सचिव तथा रोजगार सहायकों के साथ उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि इस व्यवस्था के बीच पंचायत सचिवों की परेशानियों को भी समझना जरुरी होगा। मध्यप्रदेश में पंचायत सचिवों के लिए ग्रामीण विकास व्यवस्था का काफी अधिक काम दिया गया है और ग्राम पंचायत में सरपंच और आमजनों से लेकर जनपद पंचायत और जिला पंचायत के सीईओ तथा दूसरे अधिकारी तक का दबाव उन्हें झेलना होता है।

शासन की विभिन्न योजनाओं के लिए आए दिन जनपद पंचायत कार्यालयों में बैठकें होती हैं जिनमें पंचायत सचिव की उपस्थिति जरूरी होती है ऐसे में कई बार वे अपनी पंचायत में ही पूरी समय नहीं दे पाते हैं। ग्राम पंचायत सचिवों के मुताबिक पंचायत में बैठकर कम से कम दो-तीन दिन काम करना जरूरी है लेकिन इसके लिए उच्चाधिकारियों का सहयोग मिलना ज़रूरी है।



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