घुटने टेकने वाले बयान पर नरोत्तम मिश्रा का तंज, कहा- वो नहीं समझेंगे इसका महत्व

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भोपाल। मध्यप्रदेश उपचुनाव के ऐलान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं का एक-दूसरे पर जुबानी हमला जारी है। नारियल वाले बयान के बाद अब घुटनों पर बैठकर प्रणाम करने वाला बयान पर बहस तेज हो गई है। इस बीच मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के घुटने टेकने वाले बयान पर तंज कसा है।
कमलनाथ कहा था कि अब मुख्यमंत्री शिवराज को जनता के सामने घुटने टेकने पड़ रहे हैं। इस बयान को लेकर गृहमंत्री मिश्रा ने कहा कि इसका महत्व वो लोग नही समझेगे जो जिंदगी भर गांधी परिवार के सामने घुटने टेके रहे हैं।
मिश्रा ने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन होती है और अपने भगवान रूपी जनता के सामने घुटने टेक कर झुके रहना हर जनप्रतिनिधि का कर्तव्य होता है। लेकिन, इसका महत्व वो लोग नहीं समझ पाएंगे जो जिंदगी भर गांधी परिवार के सामने घुटने टेके हैं। कमलनाथ ने तो अपने 15 महीने के कार्यकाल में पूरे प्रदेश को ही घुटनों पर ला दिया था।
बता दें कि रविवार को ही घुटनों पर बैठकर प्रणाम करने के मामले में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ली प्रतिज्ञा कर कहा कि-

अब मैं हर भाषण से पहले घुटने पर बैठकर जनता को प्रणाम करूंगा। मध्यप्रदेश मेरा मंदिर है और जनता मेरी भगवान। मैं तो सदैव अपनी जनता के चरणों में शीश झुकाता हूं। मेरे घुटनों पर बैठने से जिन्हें तकलीफ है, उनकी जनता को कुचलने की प्रवृत्ति रही है। वे आपातकालीन मानसिकता के लोग हैं। मेरे लिए तो मध्यप्रदेश की जनता ही मेरी भगवान है। अन्नदाता के साथ सदैव खड़े रहते हैं हम। हर वक्त उनका सम्मान करते हैं हम। बिना थके बिना रुके निरंतर उनके लिए काम करते हैं हम।

गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने आगे कहा कि हम तो पहले से कहते आए हैं कि कमलनाथ जैसे नेता सोने का चम्मच लेकर पैदा होते हैं इसीलिए इन्हें जनता के बीच से निकलकर आने वाले नेता नहीं सुहाते। उनकी सरकार ने गरीबों के कल्याण की कई योजनाएं बंद कर दीं। दरअसल जनता के दुख-दर्द वही नेता समझ सकता है जिसने गरीबी देखी हो।
गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस, सरकार के कामकाज के बारे में जनता से ज्यादा सवाल नहीं करने चाहिए वरना जनता जनार्दन उन्हें ऐसे ही आइना दिखाएगी। कर्जा तो कनमनाथ सरकार ने भी बहुत लिया था, लेकिन उनकी सरकार और भाजपा सरकार के कर्ज के उद्देश्य में बहुत अंतर है। उन्होंने सलमान और जैकलीन की अगुआई में आइफा अवार्ड जैसे आयोजन कराने के लिए कर्ज लिया जबकि हमारी सरकार का कर्ज लेने का उद्देश्य बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय है।



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