मांडू में फिर सजेगी सुर और ताल की शाम, प्रशासन की कोशिश से संभव हुआ आयोजन


एक-दो दिनों में मांडू उत्सव की तिथियां होगी घोषित चर्चाओं का दौर जारी


आशीष यादव आशीष यादव
धार Updated On :

इस वर्ष मांडव उत्सव के आयोजन की आस छोड़ चुके कला प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। धार जिले के कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के विशेष प्रयासों से इस वर्ष भी इस उत्सव का रंगारंग आयोजन होगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आने वाले एक-दो दिनों के अंदर मांडू उत्सव की तिथियां भी सामने आ जाएगी। वर्ष 1998 से आयोजित हो रहा है मांडू उत्सव को लेकर इस बार आशंका के बादल मंडरा रहे थे। इस बीच कलेक्टर और जिला प्रशासन के अधिकारियों की विशेष रुचि के चलते उत्सव सीमित स्वरूप में होगा पर आयोजन होना तय है।

दुनिया में प्रसिद्ध मांडू नाम: अपनी विशिष्ट प्रस्तुतियों के लिए देश और दुनिया में प्रसिद्ध मांडू उत्सव इस बार फरवरी के अंतिम सप्ताह में आयोजित होगा।आयोजन की तैयारी को लेकर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के निर्देश पर जिला पंचायत के सीईओ श्रृंगार श्रीवास्तव मांडू पहुंचे थे। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा द्वारा मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों से लगातार संपर्क कर उत्सव के आयोजन के लिए प्रयास किया जा रहे थे। जिसे सफलता मिली है।

जानकारी के अनुसार पर्यटन बोर्ड के एएमडी विवेक क्षोत्रीय ने एक्सपर्ट और प्लानर मांडू भेजे थे ताकि जिले के उच्च अधिकारियों से तालमेल बैठ कर उत्सव के स्वरूप को तय किया जाए। पहले दौर की बातचीत पिछले शनिवार को हो चुकी है। झाबुआ में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर धार जिले के अधिकारी भी व्यस्त थे उसके बाद रविवार पड़ा। बताया जा रहा है कि मांडव उत्सव का स्वरूप तय हो चुका है पर जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ वेंडर और प्लानर की बैठक होने के बाद ही उत्सव के स्वरूप से पर्यटन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। और पर्यटन बोर्ड से बजट की स्वीकृति होते ही इसी मांडू उत्सव का आयोजन होगा ऐसी संभावनाएं व्यक्ति की जा रही है।

दरअसल मांडू उत्सव का आयोजन प्रतिवर्ष होता है और पिछले वर्ष तत्कालीन पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर और टूरिज्म बोर्ड के एमडी शिवसेखर शुक्ला ने मांडू उत्सव को कैलेंडर राइस कर प्रतिवर्ष 25 दिसंबर से 2 जनवरी तक मनाने की घोषणा की थी पर घोषणा को अमली जामा नहीं पहना सकीं।

ए फैक्टरएंटरटेनमेंट को 3 वर्ष का ठेका मिला था जिसके 2 वर्ष ही पूरे हुए थे पर पर्यटन बोर्ड ने उसके पहले ही कंपनी का ठेका निरस्त कर दिया जिसके कारण मांडू उत्सव में देरी हो रही है। इधर मध्य प्रदेश के सभी पर्यटन स्थलों पर बड़े बजट के व्यापक उत्सव हो रहे हैं पर मध्य प्रदेश की इस ऐतिहासिक नगरी को लेकर पर्यटन बोर्ड का रुख कला प्रेमियों के गले नहीं उतर रहा है।

कला प्रेमियों का कहना है कि मांडू उत्सव के स्वरूप को और विस्तृत करने की बजाय इसे सीमित क्यों किया जा रहा है। साथ ही बजट में कटौती क्यों की जा रही है। यह बात है कि अगर धार जिला प्रशासन के अधिकारी इस विषय में अपनी तरफ से प्रयास नहीं करते तो उत्सव का आयोजन होना ही मुश्किल था।