पश्चिमी मप्र के आदिवासी इलाकों में पहली बार पहुंचने को है रेल


टीही रेलवे टनल के काम ने पकड़ी रफ़्तार, अत्याधुनिक मशीनों का हो रहा प्रयोग टनल निर्माण में


आशीष यादव आशीष यादव
धार Published On :

साल 2008 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इंदौर दाहौद रेल लाइन की आधारशिला रखी थी। आदिवासी इलाकों के लिए यह एक बड़ा सपना था जो उन्हें आजादी के बाद पहली बार अपनी धरती से रेल में सफर करने का मौका देने वाला था। इसके साथ ही रोजगार और उद्योगों को भी इसका लाभ मिलना था लेकिन लगातार बजट की कमी से यह स्थिति बिगड़ती रही। शिलान्यास के करीब साढ़े छह साल बाद साल 2014 में मोदी सरकार के शुरुआती कार्यकाल में इस योजना को लेकर पटरियां बिछाने का काम हुआ और अब 9 साल बाद यह माना जा रहा है कि इस रेल लाइन का काम 2024 में पूरा हो सकता है। पश्चिमी  मप्र के आदिवासी इलाकों के लिए यह एक सकारात्मक बात है।  

इंदौर-दाहोद रेल लाइन का काम तेज गति से जारी है। नए साल के साथ ही 2024 के अंत तक ट्रेन चलाने के लक्ष्य को लेकर रेलवे द्वारा अर्थवर्क करने के साथ पुल-पुलियाएं बनाई जा रही हैं। इस रेलखंड में सबसे बड़ी सुरंग पीथमपुर चौपाटी के पास बनाई जा रही है। जो लगभग पूरी होने को हे जो तीन किमी लंबी सुरंग में बीच के हिस्से में खोदाई का काम बचा है।

मशीनों की सहायता से यह काम किया जा रहा है। वर्षों से लंबित इंदौर-दाहोद रेल लाइन का काम इस वित्तीय वर्ष में बजट स्वीकृत होने के बाद तेज गति से हो रहा है। पीथमपुर से धार तक नई लाइन बिछाने के लिए रेलवे टुकड़ों में काम कर रहा है। तीन किमी लंबी सुरंग का कार्य भी आधुनिक मशीनों की सहायता से किया जा रहा है, ताकि जल्द खोदाई कर पटरियां बिछाई जा सकें। यह काम पूरा होने के बाद धार तक रेल चलाने की बड़ी बाधा का समाधान हो जाएगा।

पिछले डेढ़ दशक से धार के लोग रेल की आवाज सुनने और पटरी पर ट्रेन को दौड़ते हुए देखने के लिए बेताब है लेकिन अब तक इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ा है। इंदौर से धार होते हुए दाहोद रेल परियोजना के अंतर्गत तेज गति से चल रहा है। अफसरों का दावा है कि 2024 के अंत तक इंदौर से धार के बीच ट्रैक बनकर तैयार हो जाएगा। जिसके बाद इस हिस्से में ट्रेन चालू हो सकती है। ऐसा होने से व्यापार और रोजगार के द्वार खुलेंगे।

वर्तमान में इस प्रोजेक्ट पर इंदौर से धार और कटवारा से झाबुआ के बीच काम चल रहा है जो पूर्व होंने को हे। वही दूसरी ओर धार में नौगांव के समीप दो किमी में रेलवे स्टेशन (प्लेटफॉर्म) तैयार हो रहा है। इसके लिए अर्थवर्क का काम चालू हो चुका है। सीमेंट कांक्रीट सहित स्लीपर व गिट्टी बिछाने का काम शुरू हो गया है।

बिजली के लिए अलग से लाइन भी डाली जा रही है। हालांकि पास ही एक नाले के कारण ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। इसके निर्माण में काफी समय लगेगा। अभी तक इसके कॉलम तैयार नहीं हुए है। माना जा रहा है कि इस कार्य में अभी वक्त लगेगा।

दो चरणों में चल रहा काम: पश्चिमी रेलवे के पीआरओ खेमराज मीणा के मुताबिक परियोजना की कुल लंबाई 204.76 किमी में से 32.30 किमी लंबाई में ट्रेक तैयार हो चुका है। पटरी बिछाने का एक चरण इंदौर-तिही 21 किमी और दूसरे चरण में दाहोद से कटवारा 11.30 किमी का काम पूरा हो चुका है। टीही से धार 46.67 किमी और कटवारा-झाबुआ 22.97 किमी में काम प्रगति पर है। इसे पूरा करने का लक्ष्य जून 2024 तक रखा गया है।

शेष लंबाई के लिए निविदाएं तैयार की जा रही है और संपूर्ण परियोजना मार्च 2026 तक पूरा होने की संभावना है। दरअसल धार से गुणावद के बीच बचे 17 किमी के हिस्से में ब्रिज व अंडरपास को लेकर 9 माह पूर्व स्वाइल टेस्टिंग (मिट्टी की जांच) के लिए सैंपल लेकर प्रयोगशाला भेजे गए थे। जहां से मिट्टी की भार वहन क्षमता को लेकर रिपोर्ट ओके मिलते ही काम आगे बढ़ाया जा रहा है।

इंदौर दाहोद रेल लाइन के तहत पीथमपुर चौपाटी पर काम जारी है।

रेलवे का फोकस पीथमपुर से धार के बीच 38 किमी हिस्से पर है। यहां पुल-पुलियाओं के साथ सिविल वर्क तेजी से चल रहा है। अफसरों का कहना है वे टनल के साथ इस भाग का काम पूरा कर लेना चाहते हैं।

व्यापार व्यवसाय बढेगा रोजगार: इस रेल लाइन से सिर्फ आवागमन ही सुगम नहीं होगा रोजगार के अवसर भी बढेगे ओर दो राज्यों के बीच व्यापार संपर्क बढेगा जिले में आवागमन अभी सड़क मार्ग से ही होता है। यहां रेल की सुविधा नहीं है। वहीं इंदौर-दोहाद रेल परियोजना से गुजरात और मप्र का सीधा संपर्क होगा। जिससे धार ओर इंदौर व अन्य जगह के व्यापार को फायदा मिलेगा। साथ ही रोजगार नए द्वार खुलेंगे। आजाद दी के बाद से ही जिले में रेल लाइन की दरकार थी वही लम्बे अंतराल के बाद आदिवासी इलाकों में रेल की छुक छुक की आवाज जिले की जनता को सुनाई देगी।

बारिश का पानी बना चुनौती: अब मौसम ठंडा होने के साथ ही बारिश का पानी रिस रहा, काम जल्दी हो, इसलिए 90 से अधिक लोगों की टीम टनल के काम में लगे है यह एक चुनौती भरा है इस बार मानसून बाद में होने से बारिश वजह से परेशानी आ रही हैं। जैसे-जैसे खुदाई होती जाती है, पानी रिसना तेज हो जाता है। अब कंपनी खुदाई करती है और फिर एक टीम उस पानी को भीतर एक जगह एकत्र करती है। वहां से पानी बाहर निकाला जाता है। जैसे-जैसे मौसम बदल रहा है, पानी रिसने की समस्या सामने आ रही है। गत दिनों भूमिगत रेल मार्ग बनाने के लिए निर्माणाधीन टनल में विस्फोट के बाद रास्ता बनाने में सफलता मिल गई है। अब इस टनल को मजबूत बनाने के लिए इसमें चारो तरफ सरियों का जाल बनाया जा रहा है। सरियों का जाल बन जाने के बाद इसके माध्यम से सीमेंट कांक्रीट का कार्य संम्पन्न किया जाएगा। संभवत फरवरी माह में यह कार्य पूरा हो जाएगा।

अर्थवर्क पर हार्ड मुरम का कर रहे भराव: रेल लाइन बिछाने के लिए धार बायपास तक अर्थवर्क कर लेवल मापा गया था। जहां हर 50 मीटर की दूरी से दूरबीन द्वारा ये देखा जा रहा है कि जमीन का लेवल ऊंचा-नीचा तो नहीं हो रहा है। ताकि जब रेल पटरी पर चलेगी तो वो डगमगाते हुए चलने की बजाय सीधी सरपट तेज गति से चलती रहे। जहां-जहां जमीन का लेवल ऊंचा-नीचा आ रहा है, वहां हार्ड मुरम का भराव कर रोलर चलाते हुए समतलीकरण किया जा रहा है। इसके बाद बोल्डर गिट्टी बिछाते हुए पटरी बिछाई जाएगी। रेलवे बोर्ड के अफसरों की माने तो अंडरपास व ब्रिज का काम लंबा चलेगा लेकिन इस बीच बचा काम पूरा कर लिया जाएगा।

धार में फिर भू अधिग्रहण: इंदौर-दाहोद रेल लाइन निर्माण के लिए धार नगर के नौगांव क्षेत्र में फोरलेन के आसपास निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। इसके लिए जमीन का समतलीकरण एवं मजबूती करण का कार्य किया जा रहा है। धार के लिए रेल्वे स्टेशन का निर्माण कार्य भी नौगांव क्षेत्र में ही बनाय जाएगा। इसके लिए पूर्व में भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा हो चुका था, किंतु अब रेल्वे स्टेशन पर आवागमन के लिए रास्ता बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता थी। इस संबंध में राजस्व विभाग निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण करने में लगा हुआ है।

फैक्ट फाइल

  •  204.76 किमी कुल लंबाई
  •  440 करोड़ का बजट
  •  2008 में हुआ था भूमिपूजन
  •  2026 तक परियोजना पूर्ण होने की संभावना
  •  इंदौर से टीही के बीच 22 किमी में 2015 में पटरी बिछ चुकी है।
  •  दाहोद से कटवाड़ा तक पटरी बिछाने का काम चल रहा है।
  •  टीही से गुणावद तक 32 किमी में अंडरपास बनाए जा रहे है।
  •  गुणावद से धार तक 17 किमी में अंडरपास के लिए काम चल रहा।
  •  पीथमपुर में 2.9 किमी लंबी टनल के लिए 150 करोड़ खर्च किए जा रहे है
  •  2012 में पूरा होना था प्रोजेक्ट, 12 साल लेट चल रहा है, बजट और तकनीकी खामियां भी बनी रोड़ा।
  •  50 किलोमीटर के हिस्से में हो चूका है काम।

 

जल्द दौड़ेगी रेल पटरी पर:

प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में इंदौर दाहोद रेल परियोजना का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है । रेलवे विभाग की योजना अनुसार वर्ष के अंत तक धार – इंदौर पटरी पर रेल दौड़ने लगेगी ।

 छतरसिंह दरबार सांसद,धार-महू

 

दाहोद-इंदौर परियोजना के कार्य तेज गति से चल रहा है। पीथमपुर टनल का काम चल रहा है जल्द ही पूरा होगा वही इस साल के अंत तक कार्य पूरा करने का प्रयास किया जायेगा धार से इंदौर के बीच अर्थवर्क और पुल-पुलिया का निर्माण हो रहा है। व धार के नौगांव पर ब्रिज के साथ स्टेशन का कार्य प्रगति पर है।

       खेमराज मीणा, पीआरओ, पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल

 

इंदौर- दाहोद परियोजना को लेकर क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी है जल्दी पटरी पर रेल दौड़ती नजर आयेगी। केंद्र की मोदी सरकार आदिवासी क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है, परियोजना के पूरा होने के बाद यह क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी

          गुमानसिंह डामोर रतलाम-झाबुआ अलीराजपुर सांसद



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