बमोरी में पांच हजार की उधारी के लिए युवक को जिंदा जलाया, आरोपी गिरफ्तार


बमोरी थानाक्षेत्र के उकावदखुर्द गांव में केवल पांच हजार रुपये के लेन-देन के विवाद में एक युवक को किरोसिन तेल डालकर जिंदा जला दिया गया।गंभीर रूप से झुलसे युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने इलाज के दौरान ही दम तोड़ दिया।


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ग्वालियर Published On :
bamori youth burnt alive

गुना। बमोरी थानाक्षेत्र के उकावदखुर्द गांव में केवल पांच हजार रुपये के लेन-देन के विवाद में एक युवक को किरोसिन तेल डालकर जिंदा जला दिया गया।

गंभीर रूप से झुलसे युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने इलाज के दौरान ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने शनिवार की सुबह चार बजे के लगभग आरोपी को गांव से ही गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, राधेश्याम (35 वर्ष) पुत्र चुन्नीलाल लोधा निवासी उकावदखुर्द ने शुक्रवार रात करीब 10 बजे गांव के ही विजय (28 साल) पुत्र कालूराम सहरिया पर मिट्टी का तेल डालकर जला दिया और घटनास्थल से भाग खड़ा हुआ।

सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने गंभीर रूप से झुलसे युवक को जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन यहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई।

बमोरी थाना में आरोपी राधेश्याम लोधा के खिलाफ धारा 307 3(2)(वी) का मामला दर्ज किया गया, जबकि युवक की मौत के बाद धारा 302 बढ़ाई गई है। पोस्टमार्टम के बाद मृतक का शव परिजनों को सौंप दिया गया।

जिले के एसपी राजेशकुमार सिंह ने बताया कि

घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस द्वारा आरोपी की तलाश करते हुए शनिवार सुबह करीब चार बजे गांव से गिरफ्तार कर लिया है, जो पुलिस को देखकर भागने की कोशिश कर रहा था। मृतक के परिजनों को मालूम नहीं है कि कितने की उधारी थी, लेकिन आरोपी ने पूछताछ में पांच हजार रुपये लेने की बात की है। पुलिस मामले की बारीकी से जांच कर रही है।

घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने शनिवार की सुबह एसडीएम अंकिता जैन को अस्पताल भेजा।

उन्होंने मृतक के अंतिम संस्कार के लिए 20 हजार रुपये की राशि तत्काल दी। साथ ही मृतक को अंतिम संस्कार के लिए एम्बुलेंस से उसके निवास पहुंचाने की व्यवस्था करवाई।

इसके अतिरिक्त अजा-जजा अत्याचार अधिनियम के तहत भी मृतक के परिजन को राहत राशि के रूप में 8 लाख 50 हजार रुपये की सहायता भी दिलाई जाएगी। इसकी 50 फीसी राशि रविवार को वैध वारिस के खाते में पहुंचा दी जाएगी।

इसके साथ ही मृतक के बच्चों की शिक्षा का इंतजाम भी किया जाएगा। यदि वे छात्रावास में रहना चाहेंगे, तो छात्रावास में प्रवेश दिलाकर पढ़ाई की व्यवस्था की जाएगी और पीड़ित परिवार के पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी।



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