इंदौरः क्यों धीमी पड़ती जा रही है महू में हुए सौ करोड़ के राशन घोटाले की जांच!


इस मामले में खाद्य विभाग, कृषि उपज मंडी, राशन की दुकानों के संचालक और नागरिक आपूर्ती निगम के कई कर्मचारियों-अधिकारियों के शामिल होने की बात कही गई थी। जांच के दौरान ही कुछ अधिकारी यहां से तबादले लेकर अन्य स्थानों पर चले गए। इनमें नागरिक आपूर्ती निगम के वे एक अधिकारी भी थे जिनका नाम प्रेस वार्ता के दौरान कलेक्टर मनीष सिंह बार-बार ले रहे थे।


अरूण सोलंकी अरूण सोलंकी
इन्दौर Updated On :
राशन घोटाले के आरोपी मोहन अग्रवाल को कोर्ट ले जाती पुलिस (फाइल फोटो)


इंदौर। करीब चार महीने पहले 11 सितंबर को प्रशासन ने बताया था कि महू तहसील में प्रदेश का सबसे बड़ा खाद्यान्न घोटाला हुआ है। चार महीने बाद अब  इस घोटाले की चर्चा कम होते-होते जैसे थमने लगी है। प्रशासन ने तेजी से इस मामले की जांच तेज़ी से शुरु की थी जो अब धीमी पड़ चुकी है।

मामला सामने आने पर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दावा किया गया था कि आरोपी मोहन अग्रवाल और उनके बेटों के साथ इसमें कुछ सरकारी अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हैं लेकिन अब तक उनमें से एक के भी नाम स्पष्ट नहीं हो सके हैं।

महू में हुआ राशन और कैरोसीन का यह घोटाला अनुमानित तौर पर कम से कम पचास करोड़ और अधिक से अधिक सौ करोड़ रुपयों का था। प्रशासन के मुताबिक इसमें कांग्रेस नेता मोहन अग्रवाल और उनके दो बेटों और दो अन्य व्यापारी शामिल थे।

कलेक्टर मनीष सिंह ने ही इसे बीते करीब बीस वर्षों से जारी सौ करोड़ तक का संभावित घोटाला बयाया था। उन्हीं ने इस घोटाले में सरकारी तंत्र के शामिल होने की बात कही थी।

इस खबर को मीडिया के एक बड़े हिस्से ने कवर किया। अधिकारियों ने इस पर खूब वाहवाही भी लूटी। जांच शुरु होने पर आरोपियों की धड़पकड़ तेजी से हुई। मोहन अग्रवाल सहित सभी पांच आरोपी पकड़े भी गए लेकिन इसके बाद भी कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी अब तक नहीं पकड़ा गया।

उस समय यह मामला इतना बढ़ चुका था कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक ने इंदौर प्रशासन को इसके लिए बधाई दी थी और इसके बाद पूरे प्रदेश में इस तरह के मामलों के शुरु करने की बात कही थी। हालांकि अब प्रदेश शासन के कार्रवाईयां भी किसी तरह के बड़े पैमाने पर नहीं हो रहीं हैं।

इस मामले में खाद्य विभाग, कृषि उपज मंडी, राशन की दुकानों के संचालक और नागरिक आपूर्ती निगम के कई कर्मचारियों-अधिकारियों के शामिल होने की बात कही गई थी। जांच के दौरान ही कुछ अधिकारी यहां से तबादले लेकर अन्य स्थानों पर चले गए। इनमें नागरिक आपूर्ती निगम के वे एक अधिकारी भी थे जिनका नाम प्रेस वार्ता के दौरान कलेक्टर मनीष सिंह बार-बार ले रहे थे।

तहसील के 94 शासकीय दुकानों का पूरा रिकार्ड भी जांच अधिकारी को मुहैया करवा दिया गया और उसमें सब कुछ स्पष्ट हो गया कि किस प्रकार इस घोटाले को अंजाम दिया गया लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक सब कुछ शून्य ही है।

भाजपा नेता तुलसी सिलावट के साथ आरोपी मोहन लाल अग्रवाल
(फाइल फोटो)
Photo Credit: FB

 

बीते बीस वर्षो में महू के खाद्य विभाग में तैनात एक भी अधिकारी का नाम फिलहाल इस घोटाले के संबंध में सामने नही आ सका है जबकि इस विभाग का अनियमितता से सीधा संबंध बताया जाता है।  इसके अलावा शासकीय दुकानों के संचालकों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

 

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ मोहन अग्रवाल (फाइल फोटो)
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मामले में राजनीतिक दबाव और हस्तक्षेप की भी बातें की जा रहीं हैं और कुछ व्यापारिक पृष्ठभूमि के नेता इस बीच अपने लिए मुनाफ़ा खोज रहे हैं। ऐसे में जांच के धीमे या प्रभावित होने की आशंकाएं तो पहले ही शुरु हो गईं थीं।

अब तक जांच में जो मिला है…

वहीं अब तक जो जांच में मिला है उसके मुताबिक नागरिक आपूर्ति निगम से अनुमान के तौर पर एक दुकान के लिए दस बोरी चावल निकला जो वहां के रजिस्टर में दर्ज किया गया लेकिन असलियत में केवल पांच बोरी ही चावल दिया गया।

दुकानदार ने भी दस बोरी चावल लेना स्वीकार किया। यही नहीं  दस बोरी चावल उपभोक्ताओं को देना भी रजिस्टर में दर्शाया गया । इस प्रकार पांच बोरी नान के गोदाम में जांच के दौरान मिला।  यही नहीं जिस वाहन में माल ले जाना दर्शाया गया वह भी नकली मिले या फिर टेंकर के नंबर मिले।

मामला उजागर करने वाले प्रशासनिक अधिकारी महू एसडीएम अभिलाष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने अपनी ओर से पूरी जांच कर पुलिस विभाग को सौंप दी है और अब जांच उनकी ओर से की जा रही है।