सैन्य अस्पतालों में हो सकेगा संक्रमितों का इलाज, सबसे प्रभावित छावनी महू को नहीं मिली सुविधा


सेना ने भोपाल, ग्वालियर, सागर और जबलपुर छावनियों में कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए अनुमति दी है। इसके तहत भोपाल के आर्मी अस्पताल में 150 बेड, सौ बेड जबलपुर, चालीस-चालीस बेड सागर में सुविधाएं दी जाएंगी। 


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इन्दौर Updated On :

इंदौर। मध्यप्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए अब कई सेवाएं सरकार की मदद के लिये आगे आ रहीं हैं। भारतीय सेना ने भी सरकार की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।

सेना ने सरकार से संक्रमितों का इलाज अब सैन्य अस्पतालों में करने के लिए अनुमति दे दी है। इससे सरकार को काफी राहत मिलेगी क्योंकि सैन्य अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्स और तमाम दूसरे उपकरण हैं, ऐसे में अब सरकार को कोई नई व्यवस्था करनी नहीं होगी।

हालांकि यहां सीमित सुविधाएं ही दी जाएंगी। वहीं इंदौर में जहां की महू छावनी को सबसे ज़्यादा मदद की ज़रूरत है अब तक वहां के नागरिकों को सैन्य अस्पताल में इलाज की कोई सुविधा नहीं दी जा रही है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को सेना की सुदर्शन कोर  के कमांडर ले.ज. अतुल्य सोलंकी और ब्रिगेडियर आशुतोष शुक्ला से मिले। इन दोनों अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को पूरे सर्मथन का आश्वासन दिया। दक्षिणी कमान के तहत आने वाली सुदर्शन कोर (21 कोर) का मुख्यालय भोपाल में है।

सेना ने भोपाल, ग्वालियर, सागर और जबलपुर छावनियों में कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए अनुमति दी है। इसके तहत भोपाल के आर्मी अस्पताल में 150 बेड, सौ बेड जबलपुर, चालीस-चालीस बेड सागर में सुविधाएं दी जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बात करके यह सुविधा जुटाई है। दक्षिणी कमान ने अपने सभी केंद्रों में राज्य सरकार को सुविधा दी है लेकिन मध्यकमान के तहत आने वाली महू छावनी को अब तक कोई सुविधा नहीं दी गई है। जबकि महू में एक हज़ार से अधिक सक्रिय संक्रमित हैं और यहां अस्पतालों में इलाज के लिए फिलहाल केवल दो सौ बेड ही उपलब्ध हैं।

महू में सोमवार को करीब 250 संक्रमित फिर मिले हैं। ऐसे में यहां के नागरिकों के पास या तो इलाज के लिए महू और इंदौर के ही सरकारी और निजी अस्पताल हैं जहां पहले ही जगह कम है।

महू के एसडीएम अभिलाष मिश्रा के मुताबिक उन्हें अबतक इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। एसडीएम मिश्रा यहां कुछ निजी और समाजसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर इलाज के लिए सुविधाएं जुटा रहे हैं।