डीज़ल महंगा हुआ तो निगम के खर्चे भी बढ़े, नागरिकों से वसूलेंगे ढाई सौ गुना टैक्स


यह बोझ उन ईमानदार करदाताओं पर भी पड़ेगा जो अपने कर नियमित रुप से जमा करते हैं। सीधे तौर पर यह मामला बढ़ी हुई महंगाई का है जिसके चलते अब निकाय भी अपने करों में बढ़ोत्तरी करने को मजबूर हैं।  


देश गांव
इन्दौर Updated On :

इंदौर। नगरीय निकायों के द्वारा अब जनता पर भारी बोझ डाला जा रहा है। इंदौर नगर निगम ही करों में करीब ढाई सौ गुना की बढ़ोत्तरी कर रहा है यानी जो परिवार पहले 350 रुपये प्रति माह टैक्स देते थे अब वह 940 रुपये प्रति महीना देंगे।
कहा जा रहा है कि राजस्व वसूली में पिछड़ने के बाद निकायों में यह टैक्स बढ़ाया जा रहा है।  ऐसे में यह बोझ उन ईमानदार करदाताओं पर भी पड़ेगा जो अपने कर नियमित रुप से जमा करते हैं। सीधे तौर पर यह मामला बढ़ी हुई महंगाई से संबंधित है जिसके चलते अब निकाय भी अपने करों में बढ़ोत्तरी करने को मजबूर हो चुके हैं।  

इंदौर के रहवासियों पर अब जलकर, संपत्ति कर व कचरा संग्रहण शुल्क में बढ़ोतरी करने के साथ अब सीवरेज शुल्क भी जनता पर लादा जा रहा है। इसमें दो गुने से अधिक गुना बढ़ोत्तरी की जा रही है।  उदाहरण के लिए अभी तक विजय नगर क्षेत्र में 750 वर्गफीट पर बने मकान में रहने वाले व्यक्ति को जहां जलकर, संपत्तिकर, कचरा संग्रहण शुल्क के रूप में 5500 रुपये देने होते थे वहीं अब  उन्हें 12 262 रुपये देने होंगे। होंगे। इस तरह अब 458 रुपये प्रतिमाह की बजाय अब 1021 रुपये प्रतिमाह  करों का खर्च बढ़ेगा, जबकि अभी तक इस परिवार पर प्रतिमाह 458 रुपये का बोझ ही आता था।

 

निगम ने करों में सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी कचरे और सीवरेज सफाई को लेकर की है। पहले जहां सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए 425 रुपये में हो जाती थी तो वहीं अब इसके 5320 रुपये देने होंगे। यह राशि पहले के मुकाबले दस गुना तक अधिक है।  हालांकि निगम ने अब हर कर में बढ़ोत्तरी कर दी है।  स्वच्छता कर, जल अभिकर, जल निकास कर, नगरीय विकास उपकर शामिल है।

 

दरअसल नगरीय निकायों में यह फैसला उनके खर्चों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इसका संबंध सीधे बढ़ती महंगाई से जुड़ता है। प्रदेश के निकाय बढ़ती लागत से परेशान हैं। कचरा संग्रहण, सफाई आदि में ईंधन की खपत काफी मात्रा में होती है। ऐसे में सरकार ने जो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई हैं वे भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। प्रदेश के हर छोटे-बड़े निकाय में इसका विरोध हो रहा है लेकिन अधिकारी इस पर कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं और राज्य सरकार चुप्पी साध के बैठी है।