सोनकच्छ उपजेल में कैदी की रहस्यमयी मौत, होगी मैजिस्ट्रियल जांच


सोनकच्छ उपजेल में कैदी की रहस्यमयी मौत की अब मैजिस्ट्रियल जांच होगी। इससे पहले परिजनों ने आरोप लगाया था कि जेलर की लापरवाही से समय पर उपचार नहीं मिलने की वजह से कैदी की मौत हुई है।


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इन्दौर Published On :
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परिजनों का आरोप- समय पर उपचार नहीं मिलने की वजह से कैदी की मौत हुई


सोनकच्छ। स्थानीय उप-जेल में शुक्रवार की शाम एक कैदी की अचानक तबीयत खराब होने के बाद जब उसे अस्पताल ले जाया गया तो वहां मौजूद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

दूसरे दिन मृतक कैदी का न्यायाधीश की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कर शव को परिजनों को सौंप दिया गया।

वहीं परिजनों ने जेल प्रशासन पर कैदी को सही समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाने का आरोप लगाया है। इसके बाद न्यायाधीश ने परिजनों को निष्पक्ष मैजिस्ट्रियल जांच का आश्वासन दिया।

उप-जेल अधीक्षक सुरेन्द्र सिंह राणावत के मुताबिक, देवास जेल में कैदियों की संख्या ज्यादा होने की वजह से धन्नालाल पिता गंगाराम गेहलोद (48) निवासी मल्हार रोड देवास को सोनकच्छ उप-जेल में 3 माह पूर्व भेजा गया था।

शुक्रवार शाम 5.35 बजे पर अचानक कैदी की तबीयत खराब हुई जिसे उपचार हेतू सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया। डॉक्टरों की जांच अनुसार कैदी को मृत घोषित किया गया।

दूसरे दिन शनिवार सुबह 10 बजे न्यायाधीश रूचिता सिंह गुर्जर की उपस्थिति में मृतक कैदी का पोस्टमार्टम कर शव को परिजनों के सुपुर्द किया गया।

मामले में बीएमओ डॉक्टर आदर्श ननेरिया के अनुसार,

मृतक कैदी के शरीर पर तीन चोट के निशान पाए गए एवं कैदी की मौत 5.45 बजे हो चुकी थी। वहीं अभी पोस्टमार्टम में स्पष्ट नहीं हो पाया कि मौत किस कारण से हुई है। मृतक का विसरा लेकर जांच हेतू भेजा गया है।

परिजनों ने लगाया जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप – 
मृतक कैदी के बड़े भाई सत्यनारायण गेहलोद व जीजा दिलीप पिता शिवनारायण ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में जेल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि

धन्नालाल की जेल प्रशासन 5.35 बजे अचानक तबीयत खराब होना बता रहा है। वहीं दूसरी ओर डॉक्टर के अनुसार 5.45 पर मृत घोषित बताया जा रहा है। उप-जेल से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की दूरी 3 किमी से अधिक है और नगर का एमजी रोड अधिकतर व्यस्तम एवं भीड़भाड़ वाला मार्ग है। फिर इतने कम समय में इतनी दूरी तय करना कही ना कही सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। इतना ही नहीं जब मेरे भाई की मौत शाम 5.45 पर हो चुकी थी तो हमें आधी रात को 6 घंटे बाद क्यों सूचना दी गई। मृत्यु के पश्चात् इतने घंटे बाद सूचना करना जेल प्रशासन पर शंका जाहिर कर रहा है। मेरे भाई के शरीर पर कई चोट के निशान भी देखे गए हैं। मेरे भाई की तबीयत खराब होने के बाद समय पर उसका उपचार नहीं कराया गया जिसके कारण उसकी मौत हो गई।

पहले भी कैदियों ने जेलर पर लगाया था प्रताड़ना का आरोप

उप-जेल अधीक्षक सुरेन्द्र सिंह राणावत की कार्यशैली व कैदियों के प्रति प्रताड़ना एवं आसपास के रहवासियों से निरंतर वाद-विवाद को लेकर कई शिकायतें सामने आई हैं।

3 सितंबर को उप-जेल के समस्त कैदियों ने जेलर के विरूद्ध मोर्चा खोलते हुए भूख हड़ताल किया था। बाद में एसडीएम के हस्तक्षेप से यह भूख हड़ताल समाप्त हुई थी।

उप-जेल में जेलर की प्रताड़ना के शिकार केवल कैदी या रहवासी ही नहीं हैं बल्कि जेल का अधिकतर स्टाफ भी मानसिक रूप से परेशान है।

कैदी के बीमार होने की जानकारी मिलते ही जेल प्रहरी को इलाज के लिए तुरंत भेजा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी डॉक्टर ने कैदी को मृत घोषित कर दिया। मेरे द्वारा इसकी सूचना कलेक्टर और एसडीएम को दे दी गई थी। कैदी के साथ किसी प्रकार की कोई मारपीट नही हुई है। शरीर पर जो चोट के निशान है वो बेहोश होते समय गिरने के हैं। बाकी मैजिस्ट्रियल जांच के बाद मामला स्पष्ट हो जाएगा। – एसएस राणावत, जेलर उप-जेल, सोनकच्छ