VIDEO: 2000 रुपये के बिजली बिल के लिए 74 वर्षीय किसान को तीन दिन जेल में रहना पड़ा


विडंबना यह है कि बुज़ुर्ग किसान पर जुर्माना कब लगा यह उन्हें भी नहीं पता। वे कहते हैं कि उन्हें इसके बारे में कोई नोटिस या जानकारी ही नहीं दी गई। इस पूरे मामले में पुलिस और बिजली विभाग और प्रशासन सभी संवेदनहीन बने रहे। बज़ुर्ग कहते हैं कि अब उन्हें किसी पर भरोसा नहीं रह गया है इसलिए आगे शिकायत करने से फायदा नही…


ब्रजेश शर्मा ब्रजेश शर्मा
घर की बात Updated On :
जेल से बाहर निकलते वृद्ध कृषक


नरसिंहपुर। बुढ़ापे में मेरी इज्जत बर्बाद हो गई, मैंने कोई गंभीर अपराध किया है, कोई चोरी की है या डांका डाला है या किसी की हत्या कर दी है… यह कहना है उन बुजुर्ग किसान का जिन्हें दो हजार रुपये के बिजली बिल बकाये  के चलते तीन दिन तक जेल रखा गया।

किसान आंदोलन के बीच किसानों को सरकारी तोहफ़े तो दिए ही जा रहे हैं लेकिन किसानों की फज़ीहत भी जारी है। माल्हनबाड़ा के 74 वर्षीय बुजुर्ग को सिर्फ दो हज़ार रुपये के बकाया बिजली बिल न चुकाने के लिए तीन दिन जेल में गुजारने पड़े। विडंबना यह रही कि जिस भाई के नाम से कोई बकाया नहीं है उसके नाम से जबरन नोटिस दिया गया और उसे भी जेल पहुंचा दिया गया।

तीन दिन जेल में गुजारने के बाद सोमवार को जमानत पर बुजुर्ग सहित तीनों को रिहा कर दिया गया। जेल से छूटने के बाद बुजुर्ग ने नम आंखों से कहा बुढ़ापे में इज्जत बर्बाद हो गई ज़िंदगी भर ईमानदारी से जिये और बुढ़ापे में यह कलंक लग गया।

 

इस वृद्ध किसान को जब बिजली विभाग का दो हज़ार रुपये का नोटिस दिया गया तब प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीरता और संवेदनशीलता से नहीं लिया। जिले में प्रशासनिक व्यवस्थाओं की हालत पहले ही ठीक नहीं है।

पुलिस और मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की कार्यप्रणाली आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। इसका एक उदाहरण माल्हनबाड़ा के 74 साल के बुजुर्ग रामप्रसाद गौरव का जेल जाना है। जिन पर महज दो हजार की बिजली बिल बकाया रखने का आरोप था। इसके लिए उन्हें तीन  दिन जेल में गुजारने पड़े।

विडंबना यह है कि उन पर जुर्माना कब लगा  यह उन्हें भी नहीं पता। वे कहते हैं कि उसके लिए ना तो उन्हें कोई नोटिस दिया गया ना तो इसकी उन्हें जानकारी पहुंचाई गई।

पुलिस थाने में जब वह पहुंचे तो उन्हें सीधे न्यायालय भेज दिया गया और वहां से उम्र का लिहाज न रखते हुए जेल पहुंचा दिया गया। इससे भी बदतर स्थिति ये रही कि सुमित्र कौरव के भाई रमेश कौरव को भी जेल भेज दिया गया जबकि उनके नाम से सिर्फ घरेलू मीटर है। जिसका बिजली का बिल सिर्फ 98 रुपये  है। रमेश पर ना तो उन पर कोई बकाया है और ना ही किसी तरह का उन पर कोई मामला दर्ज है  लेकिन पुलिस ने उन्हें भी जेल पहुंचा दिया।

सोमवार को रामप्रसाद कौरव के नाम का दो हजार रु का बकाया बिजली  बिल जब जमा कर दिया गया और अनापत्ति प्रमाण पत्र मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के वितरण केंद्र से प्राप्त किया गया। वहीं रमेश कौरव और उसके भाई सुमित्र के नाम 28563 रु का बिल जमा किया गया और वितरण केंद्र से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया और न्यायालय में दस्तावेज पेश किए गए। जहां से जमानत होने के बाद सोमवार की रात लगभग सात बजे जेल से रिहा हुए।

साख पर लग गया बट्टा , बुढ़ापे में इज्जत ही बर्बादःः वे किसान रामप्रसाद कौरव का कहना था कि उनकी साख पर बट्टा लग गया है। जीवन भर ईमानदारी से जिए और फिर अगर बिल बकाया था तो उन्हें तो जानकारी देना थी कि उनके नाम से इतना बिल बकाया है। जब हजारों रुपए खर्च हो रहे हैं तो दो हज़ार रुपये के बिल के पीछे जेल जाना पड़ा इससे बड़ी बदकिस्मती और क्या हो सकती है..

बुजुर्ग का कहना था कि यह सब एक लाइनमेन का किया धरा है। वहीं पुलिस ने भी उन्हें इस तरह की कोई सूचना नहीं दी कि वह जेल पहुंचाए जा रहे हैं।

परिजन दिन भर रहे परेशानः  बुजुर्ग रामप्रसाद और सुमन्त्र तथा रमेश की जमानत के लिए उनके परिवार के सदस्य सोमवार को दिनभर परेशान रहे। पहले वह बिजली दफ्तर गाड़रवारा पहुंचे। जहां से बताया गया कि सिहोरा विद्युत वितरण केंद्र ही सब कुछ बता सकेगा।

इसके बाद सिहोरा पहुंच कर वहां बिल जमा करने के बाद अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया और फिर वह गाड़रवारा एडीजे कोर्ट पहुंचे वहां दस्तावेज पेश किए  जहां से जमानत क्लियर होने के बाद वह किसी तरह नरसिंहपुर आए  और  यहां से अपने परिजनों को रिहा होने के बाद वापस गांव लेकर पहुंचे।

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