तीख़ी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के बीच भी सचिन पायलट ने निभाई सिंधिया से दोस्ती


सचिन पायलट ग्वालियर आए और ग्वालियर से सभा स्थल पर चले गए। इस बीच छोटी सी मुलाकात ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी हुई दोनों गले मिले और मुस्कुराकर अलविदा कहा। इन दोनों के बीच आपसी रिश्तों और राजनीति का यह सामांजस्य बेहद सुखद नजर आता है लेकिन फिलहाल मध्य प्रदेश की राजनीति इस तरह की दिखाई नहीं दे रही है। 


देश गांव
राजनीति Updated On :

भोपाल। उपचुनावों में अब राजनीतिक दलों के बीच गर्मा गर्मी का माहौल बना हुआ है। भाजपा, कांग्रेस और बीएसपी तथा एसपी सभी एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं और देखा जाए तो यही चुनावी लोकप्रियता और प्रतिद्वंदी पर बढ़त बनाने का एक महत्वपूर्ण ज़रिया भी बना हुआ है।

 

भाजपाई नेता इसमें आगे हैं तो वहीं कांग्रेसी भी लगातार प्रयास कर रहे हैं लेकिन इस बीच कांग्रेस की उम्मीदें  कुछ फीकी पड़ी हैं। इसकी वजह हैं राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट जिन्हें एक ऐसे कांग्रेसी के तौर पर प्रचार करने के लिए बुलाया गया था जो कुछ महीनों पहले तक अपनी पार्टी से नाराज तो थे लेकिन उन्होंने कभी पार्टी छोड़ी नहीं। कांग्रेस का मानना है कि  यहीं वे सिंधिया से बेहतर साबित होते हैं।  हालांकि कांग्रेस के ये स्टार प्रचारक कुछ खास नहीं कर पाए।

 

कांग्रेस पार्टी को उम्मीद थी कि राजस्थान से ग्वालियर आकर सचिन पायलट अपने दोस्त ज्योतिरादित्य सिंधिया पर तीखा हमला बोलेंगे लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। पायलट ने ग्वालियर चंबल क्षेत्र में नौ से अधिक सभाएं की लेकिन इस दौरान एक भी बार उन्होंने सिंधिया का नाम तक नहीं लिया।

 

कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए निश्चित ही यह निराशाजनक रहा होगा क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया फिलहाल ग्वालियर चंबल क्षेत्र में उनकी जीत के आगे सबसे बड़ा सवाल है। जिन्हें हल करने के लिए कांग्रेस के पास जवाब तो कई रहे लेकिन कोई भी जवाब सही समय पर और सही तरीके से नहीं दिया गया।

सचिन पायलट ग्वालियर आए और ग्वालियर से सभा स्थल पर चले गए। इस बीच छोटी सी मुलाकात ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी हुई दोनों गले मिले और मुस्कुराकर अलविदा कहा।

 

इन दोनों के बीच आपसी रिश्तों और राजनीति का यह सामांजस्य बेहद सुखद नजर आता है लेकिन फिलहाल मध्य प्रदेश की राजनीति इस तरह की दिखाई नहीं दे रही है।

 

इस तीखी राजनीत के बीच पायलट को उनके इस रवैया पर भी जवाब देना पड़ा। पत्रकार वार्ता में जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि

मुझे जो कहना था, उसे मैं डंके की चोट पर कहता हूं। जो नहीं कहना है, वो मैं जानता हूं। हम सिद्धांत और मुद्दों की राजनीति करते हैं। मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार ने 15 साल के शासनकाल में किसी बात का जवाब आज तक नहीं दिया। मंदसौर में किसानों पर गोली चलीं, व्यापमं स्कैम में कितनी हत्याएं हुईं, आत्महत्याएं हो रही हैं, बलात्कार हो रहे हैं। कोई सुनने वाला नहीं, इनका कोई जवाब आया है।



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