ग्वालियर: AQI पहुँचा 403 पर, स्वस्थ व रोगियों के लिए खतरा


जीआरएमसी  के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.राम रावत ने बताया कि, प्रदूषण बढ़ना सामान्य लोगों के साथ बीमार व्यक्तियों के लिए अधिक खतरनाक है। अस्थमा, दमा, सांस, हृदयरोगी को प्रदूषित हवा में सांस लेना बीमारी को बढ़ा देता है। ऐसे में घर से निकलें तो मास्क का प्रयोग करें, क्योंकि मास्क हवा में घूम रहे खतरनाक तत्वों को शरीर में प्रवेश करने से रोक देता है। साथ ही मास्क कोरोना संक्रमण से भी बचाता है।


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सांकेतिक फोटो


ग्वालियर। कोरोना के बढ़ते संक्रमण और बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए शहर में पटाखों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी। हालांकि दीपावली की रात को प्रतिबंध का कोई असर दिखाई नहीं दिया। क्योंकि इस प्रतिबंध पर खुद मुख्यमंत्री नाराजगी जता चुके थे और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्र ने भी भोपाल कलेक्टर के एक आदेश को बदलते हुए कहा था पटाखों के लिए कोई समयसीमा नहीं, खूब पटाखें जलाएं। आलम यह हुआ कि पहले से खराब शहर की हवा और खराब होकर गंभीर स्थिति में पहुंच गई, जिससे एक्यूआई बढ़ता चला गया। दीपों के त्योहार पर पटाखों के शोर व बारूद के धुएं ने शहर की आबोहवा में जहर घोलने का काम किया। प्रदूषण के कारण शहर का एयर क्वालिटी इंडेंक्स (एक्यूआई) 403 पर पहुंच गया है। वायु प्रदूषण बढ़ने से बच्चे, बुजुर्ग व ऐसे लोग जिन्हें दमा, अस्थमा, सांस व हृदय संबंधी बीमारी है उनके लिए घातक है।

प्रदूषण बोर्ड का भी कहना है कि शहर में वायु की गुणवक्ता अत्यंत खराब हो गई है। यह स्वस्थ लोगों पर विपरीत प्रभाव डालती है और रोगियों के लिए अत्यंत दुष्प्रभावी है।

शहर में पीएम 10 व पीएम 2.5 का मान कुछ इस तरह से बढ़ा

जीवाजी विश्वविद्यालय फूलबाग

दिन पीएम10 पीएम 2.5 पीएम10 पीएम 2.5

13 नवंबर 238.9 149.1 274.0 171.5

14 नवंबर 206.6 155.8 313.0 251.0

नोट- दीपावली की रात को जीवाजी विश्वविद्यालय में प्रदूषण बोर्ड की लगी ऑन लाइन मशीन पर एक्यूआई 312 और फूलबाग का एक्यूआई 403 पर जा पहुंचा।

देसी धमाकों ने बढ़ाया ध्वनि प्रदूषण

शहर में दीपावली के दिन देसी धमाकों की जमकर बिक्री हुई। देसी धमाकों के इस्तेमाल से ध्वनि प्रदूषण तो बढ़ा ही साथ ही इनमें प्रयुक्त होने वाले खतरनाक रासायन की बारूद जलने से हवा की गुणवक्ता भी खराब हुई।

प्रदूषण बढ़ने के कारक: दीपावली दीपों का त्योहार है लेकिन आतिशबाजी ने शहर की आबोहवा को खराब कर दिया है।

-त्योहार पर साफ सफाई से उठे धूल के कण।

-टूटी सड़कों पर दौड़ते वाहन।

-दीपावली की रात को हुई आतिशबाजी से उठा धुआं।

-दिल्ली में प्रदूषण व एक्यूआई 1999 पर जा पहुंचा।

-दिल्ली की ओर से आने वाली हवाएं प्रदूषण लेकर आईं।

-हवा में नमी होने से धूल व धुआं के कण वायुमंडल में ऊपर नहीं निकल सके।

-कचरे में आग लगाने से उठा धुआं व शहर में कुछ स्थानों पर आगजनी होने से भी प्रदूषण बढ़ा।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

जीआरएमसी  के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.राम रावत ने बताया कि, प्रदूषण बढ़ना सामान्य लोगों के साथ बीमार व्यक्तियों के लिए अधिक खतरनाक है। अस्थमा, दमा, सांस, हृदयरोगी को प्रदूषित हवा में सांस लेना बीमारी को बढ़ा देता है। ऐसे में घर से निकलें तो मास्क का प्रयोग करें, क्योंकि मास्क हवा में घूम रहे खतरनाक तत्वों को शरीर में प्रवेश करने से रोक देता है। साथ ही मास्क कोरोना संक्रमण से भी बचाता है।

 



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