किसान आंदोलन: सिंघु बॉर्डर पर आज किसान नेताओं की बैठक, किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी


अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हनन मुल्ला ने कहा है कि, अगर प्रस्ताव के बाद कुछ सकारात्मक निकल कर आता है तो कल बैठक हो सकती है। इससे यह बात साफ़ है कि अब सब कुछ केंद्र  के पाले में है। 


देश गांव
उनकी बात Published On :

मंगलवार, 8 दिसंबर को  किसानों के भारत बंद के तुरंत बाद अमित शाह के साथ किसान नेताओं की अचानक हुई विफल वार्ता के बाद अब आज किसान यूनियनों के नेता सिंघु बॉर्डर पर बैठक करने जा रहे हैं। इसी बैठक में आगे के लिए निर्णय लिए जायेंगे। किंतु कल रात की मीटिंग के बाद किसान नेताओं की ओर से भी अगले दौर की सरकारी वार्ता के प्रस्ताव पर कुछ साफ़ पर नहीं कहा गया है और केंद्र का प्रस्ताव आज आना है या शायद आ गया हो।  

अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हनन मुल्ला ने कहा है कि, अगर प्रस्ताव के बाद कुछ सकारात्मक निकल कर आता है तो कल बैठक हो सकती है। इससे यह बात साफ़ है कि अब सब कुछ केंद्र  के पाले में है।

इस बीच किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी पंजाब के सुखविंदर सिंह सभरा  ने कहा कि, सरकार ने कल रात की बातचीत हडबडाहट में की। कल शाम बुलाई गई बैठक बेफायदा थी। प्रस्ताव भेजना था तो 6 या 7 दिसंबर को भेजते। अगर प्रस्ताव में संशोधन की बात आती है तो उससे बात नहीं बनेगी।

केन्द्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ कल का भारत बंद बेहद सफल रहा है। शायद यही कारण रहा हो कि गृहमंत्री अमित शाह ने पिछली वार्ता के बाद पूर्व निर्धारित आज 9 दिसंबर की वार्ता से पहले ही मंगलवार को भारत बंद के बीच ही किसान नेताओं को न्‍योता भेज कर 8 की शाम को बातचीत के लिए बुला लिया! बातचीत हुई मंत्री थे, किसान नेता थे और खबर है कि कृषि विशेषज्ञ भी थे तभी तो पूसा में बैठक हुई। किन्तु कोई हल नहीं निकला और यह बातचीत पहले की तरह बेनतीजा समाप्त हो गयी। आज की वार्ता को फ़िलहाल आज की प्रस्तावित वार्ता रद्द कर दी गयी है!

कल की वार्ता से छूटते ही ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्ला ने कहा-“सरकार कृषि कानून वापस लेने को तैयार नहीं।” बैठक के बाद बाहर आकर मोल्ला ने बताया कि अमित शाह ने साफ़ कह दिया कि सरकार कृषि बिल वापस नहीं लेगी।

तीनों नये कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार आज किसान नेताओं को प्रस्ताव भेजेगी। किसान नेता आज 12 बजे सिंघु बॉर्डर पर बैठक करेंगे।

किंतु किसान नेता हन्नान मोल्ला ने साफ़ कह दिया –बीच का कोई रास्ता नहीं है।

 

 

 

 

 

 

 



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