ग्वालियरः 90 की उम्र में फर्राटेदार अंग्रेजी बोलकर भीख मांगता मिला IIT पासआउट


90 साल के वृद्ध के भीख मांगकर गुजारा करने व फुटपाथ पर लेटे होने की जानकारी मिलने पर स्वर्ग सदन के सदस्य उनको अपने साथ ले जाने के लिए जब वहां पहुंचे और उनसे बातचीत की तो हैरान रह गए। फुटपाथ पर सो रहे वृद्ध को उठाकर जब संस्था के सदस्यों ने उनका नाम पूछा तो उन्होंने फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हुए अपना नाम सुरेंद्र वशिष्ठ बताया।


देश गांव
ग्वालियर Published On :
surendra-vashistha
फुटपाथ पर भीख मांगकर भरते थे अपना पेट।


ग्वालियर। शिंदे की छावनी पर 90 साल के एक वृद्ध को फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते देखकर सभी हैरान रह जाते थे। लेकिन, कोई भी उनके बारे में यह नहीं जानता था कि वह आईआईटी कानपुर से पासआउट एक शख्स है, जिसे समय की मार ने यह दिन दिखाया है।

90 साल के वृद्ध के भीख मांगकर गुजारा करने व फुटपाथ पर लेटे होने की जानकारी मिलने पर स्वर्ग सदन के सदस्य उनको अपने साथ ले जाने के लिए जब वहां पहुंचे और उनसे बातचीत की तो हैरान रह गए।

फुटपाथ पर सो रहे वृद्ध को उठाकर जब संस्था के सदस्यों ने उनका नाम पूछा तो उन्होंने फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हुए अपना नाम सुरेंद्र वशिष्ठ बताया।

surendra-vashistha-swarg-sadan
स्वर्ग सदन के सदस्य के साथ सुरेंद्र वशिष्ठ।

जब उन्होंने और पूछताछ की तो पता चला कि वह आईआईटी कानपुर से पासआउट हैं। जानकारी में यह भी सामने आया है कि कुछ साल पहले वे ग्वालियर आरटीओ ऑफिस में एजेंट भी रह चुके हैं।

हालांकि, कभी सुरेंद्र खुद को 1964 बैच का पासआउट तो कभी 1969 बैच के मैकेनिकल ब्रांच से पासआउट बता रहे हैं। साथ ही वे अपनी उम्र भी कभी 97 तो कभी 93 साल बता रहे हैं।

स्वर्ग सदन के एक सदस्य के मुताबिक, सुरेंद्र वशिष्ठ ने बताया है कि उन्होंने कुछ साल पहले खादी भंडार दिल्ली में भी नौकरी की है और इससे पहले वे ग्वालियर आरटीओ ऑफिस में एजेंट के रूप में काम करते थे।

surendra-vashistha-on-footpath
फुटपाथ पर ऐसे लेटे मिले थे सुरेंद्र वशिष्ठ।

सुरेंद्र जी का भतीजा भी ग्वालियर में ही गांधी नगर में ही रहता है। उससे फोन पर संपर्क किया गया तो उसने बताया कि सुरेंद्र वशिष्ठ ने शादी नहीं की है और वे अकेले रहना ही पसंद करते हैं।

आपको बता दें कि करीब एक महीने पहले ग्वालियर में एक पुलिस अफसर मनीष मिश्रा भी अपने साथियों रत्नेश सिंह तोमर और विजय भदौरिया को सड़क पर भीख मांगते हुए मिले थे।

उसके बाद साथियों ने इलाज के लिए इसी संस्था को सौंप दिया था। मनीष मिश्रा 1999 बैच के एएसआई थे। 2006 से तबीयत खराब होने के बाद वह गायब थे।
साथियों को लगा था कि पुलिस मुख्यालय उनका देखभाल कर रही है। लेकिन वह सड़क पर भीख मांगते हुए मिले थे।



Related