कांग्रेस का भी हुआ भाजपा जैसा हाल, टिकिट वितरण में कमलनाथ और दिग्विजय के बीच असहमति के चलते बिगड़ी स्थिति!


कार्यकर्ताओं को सता रहा है हार का खतरा, कई सीटों पर तीखा है विरोध


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राजनीति Updated On :

भोपाल। कांग्रेस पार्टी ने 144 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। इसके बाद इस सूची को जहां कांग्रेस के नेता जीत की गांरटी बता रहीं हैं तो वहीं नेताओं के इस चुनाव पर खूब विरोध भी देखने को मिल रहा है। लिस्ट जारी होने के बाद ही कई नेताओं के इस्तीफे आए तो अब बहुत से स्थानों पर तो अब सार्वजनिक विरोध होने लगा है।

प्रदेश में अब इंदौर, उज्जैन, दतिया सहित करीब 13 विधानसभा क्षेत्रों में घोषित प्रत्याशियों का विरोध हो रहा है। इस बगावत को लेकर कई वजहें बताई जा रहीं हैं लेकिन इनमें से एक पीसीसी प्रमुख कमलनाथ और जीत के लिए सबसे ज्यादा जमीनी मेहनत कर रहे दिग्विजय सिंह के बीच असहमति भी बताई जा रही है।

भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद कई नेताओं की नाराजगी की खबरें आईं और कुछ ने तो पार्टी छोड़ दी इस पर कांग्रेस ने भाजपा का खूब मज़ाक बनाया लेकिन अब कांग्रेस के साथ भी यही हो रहा है। कांग्रेस का विरोध भी सड़कों पर नजर आ रहा है। इनमें इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक चार से कांग्रेस ने सिंधी समाज के राजा मंधवानी को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।

पार्टी के इस फैसले के खिलाफ सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार को गांधी भवन कांग्रेस कार्यालय पहुंचकर विरोध-प्रदर्शन करने के साथ ही चक्का जाम किया और राजा मंधवानी का पुतला जलाया। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने कहा कि मांधवानी की रातों-रात पैराशूट एंट्री कराई गई है, जो वर्षों से कांग्रेस का झंडा उठा रहे कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय है। प्रदर्शनकारी अक्षय कांतिबम को टिकट देने की मांग कर रहे हैं। हालांकि यह सही है कि राजा राजनीति में नए हैं लेकिन उनका विरोध करने वाले अक्षय कांति बम और उनके सर्मथकों ने जो माहौल बनाया वह खुद कांग्रेस की विचारधारा से मेल नहीं खाता। दरअसल बम और उनके सर्मथकों ने सिंधी समाज से आने वाले राजा मंधवानी को पाकिस्तान से आया बताया। मंधवानी का परिवार 80-90 के दशक में भारतीय नागरिक बना है।

इसके अलावा उज्जैन जिले में भी विरोध हो रहा है। जिले की उत्तर विधानसभा से कांग्रेस ने माया त्रिवेदी को प्रत्याशी बनाया है। माया त्रिवेदी को टिकट मिलते ही कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और त्रिवेदी का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया। एनएसयूआई के पूर्व जिला अध्यक्ष अंबर माथुर ने कहा कि हम इस घोषणा का विरोध करते हैं क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने जिसे अपना कैंडिडेट बनाया है वह अयोग्य है। माया त्रिवेदी के पास कोई कार्यकर्ता नहीं है और वह पूर्व में भी निर्दलीय चुनाव लड़कर कांग्रेस को नुकसान पहुंचा चुकी हैं। ऐसे व्यक्ति को टिकट देना कहीं ना कहीं गलत है। प्रदर्शनकारी विवेक यादव को टिकट देने का ऐलान कर रहे हैं। हालांकि यादव ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ले ली है और खबर है कि पार्टी उन्हें जल्दी ही अपना उम्मीदवार घोषित कर सकती है।

भाजपा के बड़े नेता माने जाने वाले गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की सीट दतिया से उनके सामने कांग्रेस ने अवधेश नायक को टिकिट दिया है। यहां भी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने नायक का पुतला जलाया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं की मांग है कि नरोत्तम मिश्रा के सामने राजेंद्र भारती को टिकट दिया जाए। राजेंद्र भारती, मिश्रा के सामने पिछला चुनाव ढाई हजार वोटों से हारे थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि भारती वर्षों से संघर्ष कर रहे थे और पार्टी द्वारा उनके संघर्ष को अनदेखा किया गया है। राजेंद्र भारती खुद भी सक्रिय हैं और राहुल गांधी से मिलने के लिए दतिया से दिल्ली पहुंच गए हुए हैं।

इसके अलावा टीकमगढ़ जिले की खरगापुर, सतना जिले की नागौद, मंदसौर जिले की सुवासरा, ग्वालियर ग्रामीण, छतरपुर जिले की महाराजपुर और बिजावर, धार जिले की धरमपुरी, रतलाम जिले की आलोट और सीहोर जिले की बुधनी सीट पर भी घोषित प्रत्याशियों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व द्वारा नाराज लोगों को मनाया जा रहा है लेकिन यह आसान साबित नहीं हो रहा है। इसे लेकर कमलनाथ ने सोमवार को को प्रेस वार्ता भी की। उन्होंने अपना पुराना बयान फिर दोहराते हुए कहा कि चार हजार लोगों ने टिकिट की मांग की थी और सभी कह रहे थे कि हम जीत रहे हैं ऐसे में सर्वे में जो मजबूत साबित हुए उन्हीं को टिकिट दिया गया है।

कांग्रेसियों को लग रहा है डर

हालांकि कांग्रेस के कई नेता कांग्रेस अध्यक्ष की इस मांग को मानने को तैयार नहीं है।उनका मानना है कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच टिकिट बटवारे को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी है और यही वजह है कि इस तरह के प्रदर्शन हो रहे हैं। इसे लेकर अब इन नेताओं को डर भी लग रहा है। भोपाल में कमलनाथ खेमे के एक नेता ने बताया कि सर्वे में कुछ गलतियां हुईं हैं जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए था। वहीं सभी नेता अपने करीबियों को टिकिट देने पर अड़े थे और इस स्थिति से बचना लगभग असंभव हो गया था। इन नेताओं का कहना है कि सीट बटवारे से जन्मी इस स्थिति के चलते करीब दस से पंद्रह सीटों का नुकसान हो सकता है लेकिन अभी दूसरी सूची आना बाकी है।



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