महू में ऑनलाइन सट्टे का पर्दाफाश, छह माह में 53 करोड़ का लेन-देन


1 करोड़ 31 लाख 66 हजार 623 रुपये नगदी बरामद, गत छह माह में 53 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। मुख्य आरोपित ने छह करोड़ की संपति खरीदी, डेढ़ करोड़ रुपये के 13 बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए। सॉफ्टवेयर गेम बनाने वाला भी गिरफ्तार।


अरूण सोलंकी अरूण सोलंकी
इन्दौर Updated On :
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डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र द्वारा 20 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की गई

डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र द्वारा 20 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की गई


महू। महू पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा संचालित करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। सट्टा के क्षेत्र में यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बताई जा रहा है, जिसमें सवा करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जब्त की गई और तेरह बैंक खाते फ्रिज किए गए हैं। इस प्रकरण में मुख्य आरोपित जेल में है जबकि अन्य को पूर्व में जमानत मिल चुकी है।

ऑनलाइन सट्टे पर की जा रही कार्यवाही के तहत महू थाने की टीम को 12 जुलाई को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि थाना महू क्षेत्र के अंतर्गत के गुजरखेड़ा निवासी राजू वर्मा के मकान में बड़े स्तर पर ऑनलाइन सट्टा खिलाया जा रहा है। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुये राजू वर्मा निवासी गुजरखेडा महू के मकान से विकाश पिता मनोहर सिह यादव उम्र 25 साल निवासी खंडवा, जितेन्द्र पिता नारायण लोवंशी उम्र 24 साल निवासी सिवनी मालवा जिला होशगांबाद, हेमंत पिता अनिल गुप्ता उम्र 23 साल निवासी बरमकेला छत्तीसगढ, सोनू पिता संतोष गुप्ता उम्र 20 साल निवासी बरमकेला छत्तीसगढ़ को गिरफ्तार किया व इनके पास से 3 लैपटॉप व मोबाइलों के जरिये ऑनलाइन सट्टा का खेल करते पकड़ा गया।

पूछताछ करने पर आरोपित राजा वर्मा उर्फ लोकेश पिता राजू वर्मा ने बताया कि सट्टा खिलाने के लिए उक्त समस्त व्यक्तियों को नौकरी पर रखा था, जिसमें पलाश अभिचंदानी व शुभम कलमें भी राजा वर्मा के अवैध ऑनलाइन सट्टे के कारोबार में सम्मिलित होना पता चला। विकाश यादव, जितेन्द्र लोवंशी, हेमंत गुप्ता, सोनू गुप्ता, लोकेश उर्फ राजा वर्मा, पलाश अभिचंदानी, शुभम कलमें, मुकेश अभिचंदानी और मनोज मालवीय को गिरफ्तार किया गया है।

ऐसे होता था सटटे का कारोबार – 

मुख्य आरोपित राजा वर्मा जो महू व इंदौर के गरीब मजदूर वर्ग के लोगों को दुकान खुलवाने का लोन दिलवाने के नाम से उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड मंगवाकर गुमास्ता बनवाता था। उसके बाद अलग-अलग बैंकों में गरीब मजदूरों के नाम से व्यापारी फर्म बनाकर करंट अकाउंट खुलवाता था। इन खातों में ही ऑनलाइन सट्टे के पैसे भारी मात्रा में जमा होते थे।

प्रारंभिक जांच में 13 बैंक खातों की बात सामने आई है, जिनमें पिछले छह माह में लगभग 53 करोड 23 लाख 70 हजार 417 रुपयों का लेन-देन होना पाया गया है। राजा वर्मा ने इंदौर के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर मनोज उर्फ मोंटी पिता कैलाश मालवीय निवासी पालदा इंदौर से ऑनलाइन सट्टा खिलवाने के लिए सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर तैयार करवाया था। मनोज ने ही राजा वर्मा को ऑनलाइन सट्टा चलाने के लिए यह सॉफ्टवेयर बनाकर दिया था।

राजा वर्मा द्वारा उक्त ऑनलाइन सट्टा का कारोबार लगभग दो वर्षों से संचालित किया जा रहा था। राजा वर्मा द्वारा लगभग 6 करोड रुपये मूल्य की संपति खरीदी गई है। अब तक की कार्यवाही में 1 करोड़ 31 लाख 66 हजार 623 रुपये की नकद धनराशि जब्त की गई है जबकि डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की राशि अलग-अलग बैंक खातों में फ्रीज की गई है, जिस पर कार्यवाही जारी है।

इस सटटे के कारोबार का पर्दाफाश करने वाले पुलिस अधिकारियों व जवानों को डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र द्वारा 20 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।