जनता की सेहत से हो रहा खिलवाड़, बाजारों में बिक रहे कार्बाइड से पके फल


एक ओर जहां मौसमी बीमारियां लोगों को रोगी बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर कार्बाइड से फलों को पकाकर भी बीमारियों को परोसा जा रहा है। प्रतिबंध के बाद भी फल विक्रेता चोरी छपे प्रशासन की आंखों में झूल झोंककर कार्बाइड से फल पकाकर बेच रहे हैं।


आशीष यादव आशीष यादव
इन्दौर Published On :
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धार। एक ओर जहां मौसमी बीमारियां लोगों को रोगी बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर कार्बाइड से फलों को पकाकर भी बीमारियों को परोसा जा रहा है। कार्बाइड से फल पकाने पर प्रतिबंध है, इसके बाद भी फल विक्रेता चोरी छपे प्रशासन की आंखों में झूल झोंककर कार्बाइड से फल पकाकर बेच रहे हैं।

ऐसे फलों में प्राकृतिक गुण व स्वाद तो चला ही जाता है, साथ ही बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। वहीं थोड़े अधिक पैसा कमाने के लालच और नुकसान से बचने के लिए वर्तमान में कच्चे फलों का कारोबार जोरों पर है।

शहर में अधिकांशत: कच्चे फल ही आ रहे हैं। पके फलों की तुलना में इनको लाना, ले जाना आसान होता है। कच्चे फल सड़ने और पिचककर खराब होने का डर नहीं होता। इससे नुकसान की संभावना न के बराबर होती है जिससे कारोबारी आसानी से बच सकते हैं।

साथ ही ये पके फलों की तुलना में सस्ते भी आते हैं इसलिए कारोबारी पके फलों के स्थान पर कच्चे फल लाने को प्राथमिकता देते हैं। फिर इन फलों को गोदामों में रखकर कार्बाइड की मदद से पकाकर बेचते हैं।

जब जिला मुख्यालय पर कई फलों की गोदामों पर जाकर देशगांव संवाददाता ने देखा तो वहां बड़ी मात्रा में कच्चे फलों को चोरी-छपे कार्बाइड से पकाने का काम जारी था।

ऐसे पकाए जाते हैं फल –

फलों के गोदाम में कच्चे फलों के अलग-अलग ढेर लगा लिए जाते हैं। इसके बाद कार्बाइड के पावडर की पुड़िया बनाई जाती है और इन्हें फलों के ढेर में फंसा दिया जाता है। फिर इस ढेर को पत्तों, बोरों व तिरपाल से इस तरह ढंका जाता है कि फलों तक बिल्कुल भी हवा न पहुंचे।

दो से तीन दिन इन्हें ऐसे ही छोड़ दिया जाता है और फल पक कर तैयार हो जाते हैं। इन फलों में बेहतरीन चमक व चिकनापन होता है लेकिन एक-दो दिन में ही ये सड़ जाते हैं।

स्वास्थ पर डालते हैं प्रभाव, हो सकते हैं गंभीर रूप से बीमार –

डॉक्टरों के अनुसार इस तरह पकाए गए फल आपको पोषक तत्व तो देते नहीं, उल्टा बीमार कर सकते हैं। इन फलों में मिठास अधिक होती है। होम्योपैथिक डॉक्टर आशुतोष मकवाना ने बताया कि कार्बाइड से पके फलों से पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। इससे एसिडिटी और पेट में जलन भी हो सकती है, इसलिए इन फलों को खाने से बचना चाहिए।

कम समय में हो जाता है तैयार –

कार्बाइड से पकाए गए फल दो से तीन दिन में पककर तैयार हो जाते हैं। इस समय अधिक मात्रा में आम व केला आ रहा है। अधिकतर गोदामों में कच्चे आम व केले भरे पड़े हैं।

जब इसकी जानकारी फल विक्रेता से निकाली तो उसने नाम ना छापने की शर्त पर बताया की थोड़े से लाभ के लिए बड़े व्यापारी जनता के साथ खिलवाड़ करते हैं। फिर उन्होंने बताया कि आम-केले के अलावा पपीता व अन्य फलों को भी व्यापारी चोरी-छपे पकाते हैं। इसका पता अधिकारियों को नहीं रहता।

अधिकारियों की निष्क्रियता से बेखौफ व्यापारी –

फल व सब्जियों की गुणवत्ता को जांचने के लिए खाद्य एवं औषधि निरीक्षण विभाग भी नियमित कार्रवाई करता है। फिर भी फल-सब्जियों को रसायनों के प्रयोग से पकाने व बड़ा करने का गोरखधंधा बेखौफ चल रहा है। यदि विभाग फल-सब्जियों की नियमित सैम्पलिंग करे तो व्यापारियों में इसके प्रति डर भी हो और इस गोरखधंधे पर लगाम लगाई जा सके।

फलों के दाम भी लेते हैं मनमाना –

फल विक्रेताओं द्वारा तय किये गये दामों पर भी प्रशासन लगाम नहीं लगा पा रहा है। कोरोना के गंभीर संकट काल में फलों-सब्जियों के जो भाव थे आज भी उसी भाव में बेचा जा रहा है। दाम कम होने पर भी भाव कम नहीं किए जा रहे हैं जिससे जनता को महंगे दामों पर ख़रीदी करनी पड़ रही है।

जांच कर करेंगे कार्रवाई –

कार्बाइड से फल पकाना प्रतिबंधित है। इससे पकाए गए फल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। विभाग कार्रवाई करता रहता है। पिछले बार सभी व्यापारी के यहां जाकर जांच की थी। अगर कोई कार्बाइड से फल पकाने का कार्य कर रहा है तो जांच कर करवाई की जायेगी।

– सचिन लोगरिया, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, धार