देवास के शासकीय विधि कॉलेज में नहीं हो सकती अयोग्य प्राचार्य की नियुक्ति- हाईकोर्ट


शासकीय विधि महाविद्यालय, देवास में उच्च शिक्षा विभाग ने समाजशास्त्र की प्रोफेसर डॉ. शोभा सुद्रास को नियम विरुद्ध नियुक्त किया था। काफी दबाव के बाद उच्च शिक्षा मंत्री ने प्राचार्य का तबादला शासकीय महाविद्यालय, अलीराजपुर कर दिया। अपने तबादले के खिलाफ वे हाईकोर्ट में चली गई थी। हाईकोर्ट ने अपने ऐतिहासिक निर्णय द्वारा प्राचार्य की याचिका खारिज कर दी।


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उज्जैन Published On :
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देवास। शासकीय विधि महाविद्यालय, देवास में दबंगतापूर्वक डटी प्रोफेसर डॉ. शोभा सुद्रास को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी अयोग्य की नियुक्ति कॉलेज में प्रिंसिपल के रूप में नहीं हो सकती है।

डॉ. शोभा सुद्रास ने 21 अक्टूबर 2020 को हाईकोर्ट के इंदौर बेंच में शासकीय महाविद्यालय, अलीराजपुर में अपने स्थानांतरण को लेकर वाद प्रस्तुत किया और पुनः देवास विधि महाविद्यालय में अंशकालिक रूप से नियुक्ति का कहा।

हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक रूसिया ने डॉ. शोभा सुद्रास की याचिका सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विधि महाविद्यालय में विधि के विशेषज्ञ ही प्राचार्य हो सकते हैं न कि समाजशास्त्र के।

हाईकोर्ट का यह निर्णय ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत बड़ा न्याय दृष्टांत बन गया है, क्योंकि उच्च शिक्षा विभाग के अदूरदर्शितापूर्ण निर्णय ने विधि छात्रों का बहुत अहित किया है।

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बता दें कि शासकीय विधि महाविद्यालय, देवास में उच्च शिक्षा विभाग ने समाजशास्त्र की प्रोफेसर डॉ. शोभा सुद्रास को नियम विरुद्ध नियुक्त किया था। इसके खिलाफ छात्रों ने क्रमबद्ध आंदोलन किया व स्थानीय राजनेताओं ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

काफी दबाव के बाद उच्च शिक्षा मंत्री ने प्राचार्य का तबादला शासकीय महाविद्यालय, अलीराजपुर कर दिया। अपने तबादले के खिलाफ वे हाईकोर्ट में चली गई थी। हाईकोर्ट ने अपने ऐतिहासिक निर्णय द्वारा प्राचार्य की याचिका खारिज कर दी।

इसके बावजूद डॉ. शोभा सुद्रास विधि महाविद्यालय, देवास में दबंगतापूर्वक डटी रहीं। उन्होंने लीड कॉलेज के प्राचार्य से लेकर जिला कलेक्टर तक के बारे में मीडिया के सामने अपनी विद्वत्तापूर्ण शैली में कलेक्टर को भी चुनौती दे दी। अंत में प्रशासन ने पंचनामा बनाकर उन्हें हटाते हुए महाविद्यालय का प्रभार डॉ. अजय चौहान को सौंप दिया।

इस अपमानजनक स्थिति के बाद भी डॉ. शोभा सुद्रास ने महाविद्यालय में आना बंद नहीं किया व स्टॉफ कर्मचारियों के कक्ष में ही बैठना शुरू कर दिया। संभवतः पिछले कुछ माह से उनके देवास विधि महाविद्यालय में उपकृत भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों ने उन्हें यह सहूलियत प्रदान की।

कारण यह है कि जो डॉ. शोभा सुद्रास स्वयं 34 लाख रुपये के घोटाले में निलंबित होकर जांच के प्रकरण में संलिप्त हैं तो उनसे ईमानदारी की उम्मीद नहीं की जा सकती। इन्होंने देवास में भी अपने भष्टाचार के पैर पसारे और जनभागीदारी के लाखों रुपयों को नियम विरुद्ध ठिकाने लगा दिया।

इसके विरुद्ध भी छात्रों ने ज्ञापन दिए थे और मांग की थी कि डॉ. शोभा सुद्रास के विधि महाविद्यालय में प्राचार्य रहते लिए गए सभी निर्णयों की पुनः न्यायिक प्रक्रिया अनुसार जांच की जाकर उसमें संलिप्त दोषी के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाए।



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