विनाश की ओर नर्मदा पट्टी के जंगल

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सरदार सरोवर बांध के बैक वॉटर में डूब रहे जंगल

धार जिले के डही में डूब रहे जंगल का एक दृश्य


धार। सरदार सरोवर बांध के बैक वॉटर से नर्मदा पट्टी के गांवों के साथ-साथ जंगल भी प्रभावित हो रहे हैं। इसका असर धार, बड़वानी व आलीराजपुर जिले के जंगलों पर भी पड़ रहा है। ये जंगल अब खत्म होने की कगार पर पहुंच रहे हैं। वन्य क्षेत्र के एक बड़े इलाके में पानी भर चुका है जो यहां की पारिस्थितिकी को भी प्रभावित करेगा। इस इलाके में करीब पौने दो लाख पेड़ डूब चुके हैं लेकिन इसके बाद भी इस ओर किसी का ध्यान नहीं दिया गया है। सड़न से क्षेत्र में गैसीय असंतुलन का भी खतरा बना हुआ है लेकिन इन सभी खतरों के बावजूद भी इस पर किसी का ध्यान नहीं गया है।

तीनों जिलों के सैकड़ों गांव और उनकी सीमा से जुड़े जंगलों में अब बैक वॉटर घुस चुका है। यहां के हरे-भरे जंगलों में अब पानी ही पानी नजर आ रहा है। उंचाई से देखने पर नजर आता है कि जंगल का एक बड़ा जलमग्न हो चुका है । रुके हुए इस पानी के विपरीत असर भी नजर आने लगे हैं। जंगल के बहुत से इलाकों में पेड़ अब सूखने लगे हैं।

इससे पहले भी बैक वॉटर का एक बड़ा हिस्सा काफी समय तक पानी में डूबा रहा था और इसके बाद फिर वही हाल है। स्थानीय प्रशासन भी इसे कोई खास समस्या नहीं मान रहा है। प्रशासन ने अब तक इस विषय पर कोई खास ध्यान ही नहीं दिया है। पेड़ों के डूबने के बाद उसके सड़न से उत्पन्न होने वाली विषैली गैसों के पर्यावरणीय प्रभावों पर भी सब मौन है। नर्मदा बचाओ आंदोलन ने एक आंशिक सर्वे किया है। इसके अनुसार 178 गांवों में लगभग 1.75 लाख पेड़ डूब चुके हैं।

जानकार बताते हैं कि इन जैविक पर्दा‍थों के सड़ने से उत्पन्न विषैली गैसें स्थानीय पर्यावरण पर लंबे समय तक प्रतिकूल असर पैदा करेंगी। इन पदार्थों के सड़ने के कारण कार्बन डाईऑक्साईड और अमोनिया वायुमण्ड‍ल के गैसीय संतुलन में बदलाव लाएगी जो स्थानीय जीव-जंतुओं और नए पेड़-पौधों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इसके अलावा सरदार सरोवर में लगातार जलभराव के साथ डूब क्षेत्र में भूगर्भीय हलचल भी भविष्य मेें बढ़ जाएगी।



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