सरकार से निराश चयनित शिक्षक की आत्महत्या, आठ साल के बेटे ने पिता को ज़हर पीते हुए देखा और फिर ख़ुद भी पी लिया


मध्यप्रदेश सरकार के रवैये से निराश हैं शिक्षक, नौकरी मांगने गए शिक्षकों पर पिछले महीने किया था लाठी चार्ज


देश गांव
उनकी बात Updated On :

भोपाल। पिछले करीब तीन साल से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे चयनित शिक्षकों का सब्र अब जवाब देने लगा है। खरगोन के अकावलिया गांव में एक पैंतीस वर्षीय चयनित शिक्षक ने नौकरी न मिलने के तनाव में आत्महत्या कर ली। मृतक का नाम राकेश पाटीदार है। राकेश ने जहर पी लिया और जब तक उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जाता तब तक उनकी मौत हो गई।

राकेश के आठ साल बेटे ने अपने पिता को अपनी आंखों से ज़हर पीते देखा और कुछ देर बाद अकेले में उसने भी ज़हर पी लिया। जिसके बाद से बेटे को गंभीर हालत में वेंटिलेटर पर रखा हुआ है।

बताया जाता है कि राकेश आर्थिक तंगी के कारण डिप्रेशन में थे और उनके पास केवल नौकरी की ही उम्मीद थी लेकिन सरकार द्वारा नियुक्ति में लगातार देरी किये जाने के कारण वे निराश हो चुके थे। राकेश के शैक्षणिक स्तर से पता चलता है कि वे एक होनहार विद्यार्थी रहे हैं। उच्च माध्यमिक शिक्षक परीक्षा के कृषि विषय के मेरिट में जनरल केटेगिरी मे राकेश पाटीदार की 5वीं वरियता थी।

एक समाचार संस्था से बात करते हुए राकेश के साथी भूतेश चंद्रा ने बताया कि राकेश पाटीदार के पास  पास खेती के लिए छोटी सी जमीन है। परिवार में पत्नी के साथ 5 और 8 साल के दो बेटे हैं। ऐसे में परिवार चलाने के लिए उनके पास कोई दूसरा ठोस साधन नहीं थे।

इसके अलावा राकेश शिक्षकों को चयन प्रक्रिया में सरकार के रवैये के कारण भी दुखी थे। उनके तनाव का कारण चयनित शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर सरकार का रवैया भी था। बताया जाता है कि  पिछले दिनों 18 अगस्त के प्रदर्शन के बाद सरकार ने जिस तरह बेरोज़गार शिक्षकों की पिटाई की उसे लेकर वे दुखी थे और एक तरह से उनकी उम्मीदें टूट गईं थीं।

चयनित शिक्षकों द्वारा निराशा और तनाव में आकर आत्महत्या का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले धार जिले में भी एक शिक्षक ने आत्महत्या की थी। इसके अलावा भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे कई शिक्षकों की मौत अपनी नियुक्ति के इंतज़ार में अब तक हो चुकी है।

राकेश की आत्महत्या के इस मामले के बाद चयनित शिक्षकों में निराशा और सरकार के प्रति नाराजगी नजर आ रही है। राज्य सरकार के खिलाफ चयनित शिक्षक सोशल मीडिया पर मोर्चा खोले हुए हैं। कुछ शिक्षकों ने बताया कि पिछले दिनों भोपाल में पुलिस द्वारा किये गए लाठी चार्ज के बाद अब यह तय नजर आ रहा है कि सरकार अपने खिलाफ किसी भी तरह का नकारात्मक प्रचार नहीं होने देना चाहती है। ऐसे में वे सोशल मीडिया पर अपनी मांगों को उठाते रहेंगे। हालांकि इससे कितना परिवर्तन होगा यह खुद शिक्षकों को भी नहीं पता है।